राज-काज: भाजपा के राज्यसभा दावेदारों में कांग्रेस से आए नेता भी….

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राज-काज: भाजपा के राज्यसभा दावेदारों में कांग्रेस से आए नेता भी.

दिनेश निगम ‘त्यागी’

0 भाजपा के राज्यसभा दावेदारों में कांग्रेस से आए नेता भी….

BJP and Congress

– कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के राज्यसभा का अगला चुनाव न लड़ने की घोषणा से सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भाजपा में भी टिकट हासिल करने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। राज्यसभा के पिछले चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी कांग्रेस से आए दो नेता भाजपा से प्रमुख दावेदार हैं। एक हैं सुरेश पचौरी और दूसरे रामनिवास रावत। पचौरी पिछले दिनों भाजपा नेतृत्व से कई मुलाकातें कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से भी सौजन्य भेंट की थी। इन मुलाकातों को राज्यसभा के लिए लाबिंग से जोड़ कर देखा जा रहा है। रावत लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। प्रदेश सरकार में उन्हें मंत्री भी बनाया गया था लेकिन विधानसभा का उप चुनाव हारने के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। लिहाजा, भाजपा नेतृत्व कांग्रेस से आए किसी नेता को अवसर देता है या नहीं, समय बताएगा। भाजपा के अन्य दावेदारों में नरोत्तम मिश्रा, लाल सिंह आर्य, अरविंद भदौरिया, विनोद गोटिया के नाम शामिल हैं। नरोत्तम, केंद्रीय मंत्री अमित शाह की पसंद हैं और विधानसभा चुनाव हारने के बाद से खाली हैं। वे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद के भी दावेदार थे लेकिन अवसर नहीं मिला। अब राज्यसभा के लिए जोर आजमाईश कर रहे हैं।

*0 क्या सच में खत्म होगा भाजपा नेताओं का इंतजार….?*

Bjp Membership Campaign

– प्रदेश में भाजपा की माेहन सरकार के दो साल से ज्यादा का समय पूरा हो चुका है लेकिन अब तक निगम-मंडलों, आयोगों आदि में राजनीतिक नियुिक्तयां नहीं की जा सकीं। इससे पहले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी यही होता था, विधानसभा चुनाव से एक-दो साल पहले ही राजनीतिक नियुक्तियां होती थीं। प्रदेश भाजपा का मुखिया बनने के कुछ समय बाद हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियां जल्दी की जाएंगी, बावजूद इसके कोई नतीजा नहीं निकला। एक बार फिर उनके बयान से ही नियुक्तियों के इंतजार में बैठे भाजपा नेताओं की उम्मीद जागी है। रतलाम में उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि निगम-मंडलों, आयोगों के साथ निकायों में एल्डरमैनों की जल्दी नियुक्तियां की जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सूची तैयार है, जल्दी जारी की जाएगी। इस बयान के बाद मीडिया में एक बार फिर वे नाम सुर्खियों में आ गए हैं, जिनके नियुक्ति पाने की संभावना है। हालांकि अब भी सवाल उठाया जा रहा है कि क्या सच में नियुक्ति की उम्मीद में बैठे नेताओं का इंतजार खत्म होगा? प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां ही लंबित नहीं हैं, प्रदेश मंत्रिमंडल में फेरदबल की चर्चा भी लंबे समय से है। छत्तीसगढ़, गुजरात और राजस्थान में यह हुआ तो मप्र को लेकर भी चर्चा चल पड़ी लेकिन इस मसले पर भी कुछ नहीं हुआ।

*0 कफ सिरप, दूषित पानी की तरह गोमांस पर किरकिरी….*

– प्रदेश में पहले कफ सिरप का कहर, फिर इंदौर में दूषित पानी से तबाही और अब राजधानी भोपाल में 26 टन गोमांस मिलने से प्रदेश सरकार कटघरे में है। दूषित पानी से मौतों की गूंज भोपाल से लेकर दिल्ली तक है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। सवाल यह है कि जब मप्र में गोहत्या पर प्रतिबंध है तो प्रदेश में गोमांस की तस्करी कैसे हो रही है? कफ सिरप मामले में किसी मंत्री ने जवाबदारी नहीं ली थी। दूषित पानी से मौतों के मामले में भी कोई आगे नहीं आया और अब गोमांस मामले में किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही। पीएचक्यू के सामने एक ट्रक से मिला 26 टन गोमांस भोपाल नगर निगम के जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ा बताया जा रहा है। स्लॉटर हाउस को मात्र 4 लाख रुपए सालाना किराए पर लाइवस्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। इस मामले में 9 कर्मचारियों को निलंबित किया गया, स्लाटर हाउस को सील कर कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया। जांच के आदेश हुए लेकिन अन्य मामलों की तरह महापौर सहित किसी जन प्रतिनिधि ने इसकी जवाबदारी नहीं ली। इस मसले पर खुलासा हुआ है कि पूर्व महापौर आलोक शर्मा और कृष्‍णा गौर स्लॉटर हाउस खुलने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इस पर रोक भी लगाई थी, लेकिन वर्तमान महापौर मालती राय की रुचि के कारण स्‍लॉटर हाउस प्रारंभ हुआ था।

*0 यह दिग्विजय की नेतृत्व पर दबाव की रणनीति तो नहीं….!*

Digvijaya Singh
Digvijaya Singh

– कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह कोई बयान दें और उसे सीधा-सपाट मान लिया जाए, यह कैसे संभव है? इसीलिए जब उन्होंने कहा कि इस बार वे राज्यसभा की सीट छोड़ रहे हैं, तो इसके भी मायने निकाले जाने लगे। माना जा रहा है कि दिग्विजय ने इस बयान के जरिए एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं। पहला यही कि उन्हें संकेत मिल गया है कि कांग्रेस आलाकमान इस बार उन्हें राज्यसभा नहीं भेजेगा, तो उन्होंने पहले ये ही घोषणा कर दी कि वे राज्यसभा नहीं जाएंगे। इसे खुद को पीड़ित दिखा कर दिग्विजय की केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। दिग्विजय ने लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा कर रखी थी लेकिन नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने लगातार दो बार चुनाव लड़ना पड़ा। इस लिहाज से उनकी घोषणा के कोई मायने नहीं हैं। वैसे भी अप्रैल में उनका कार्यकाल पूरा हो रहा है। वे सीट छोड़ नहीं रहे हैं। इसलिए अभी से इस बयान का क्या औचित्य? राज्यसभा छोड़ने का बयान देने के साथ उन्होंने यह भी कह दिया कि प्रदेश में अजा वर्ग का मुख्यमंत्री बनता है तो उन्हें खुशी होगी। लगे हाथ कांग्रेस अजा विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मांग कर डाली कि राज्यसभा के लिए दलित वर्ग के किसी नेता को मौका दिया जाए। इस तरह उन्होंने दलित वर्ग का मुद्दा उठा कर जीतू पटवारी की दावेदारी को पीछे धकेल दिया।

*0 अबकी बार ‘फूल’ ने बो दिए कांग्रेस की राह में ‘कांटे’….*

05 12 2023 phool singh baraiya 23597281

– कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले जो काम वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने किया था, वही कारनामा पार्टी विधायक फूल सिंह बरैया ने राहुल गांधी के इंदौर दौरे से पहले कर दिया। दिग्विजय ने आरएसएस की तारीफ करते हुए उनसे सीखने की बात कही थी और फूल सिंह ने अजा-जजा वर्ग की लड़कियों के साथ रेप की घटनाओं को तीर्थ पुण्य से जोड़ कर नई थ्योरी दे दी। तब दिग्विजय का बयान चर्चा में रहा था और वर्किंग कमेटी बैठक के निर्णय पीछे छूट गए थे। इसी तरह बरैया के बयान के सामने राहुल का इंदौर दौरा फीका पड़ गया। फूल सिंह ने अपने बयान से कांग्रेस की राह में जो कांटे बिछाए हैं, पार्टी उससे उबरती नहीं दिख रही। बरैया का यह बयान भी कांग्रेस के लिए सेल्फ गोल माना जा रहा है। बरैया ने अपने विवादित बयान में कहा कि अजा-जजा वर्ग की लड़कियां सुंदर नहीं होतीं फिर भी उनके साथ रेप हाेता है। उन्होंने कहा कि ग्रंथों में लिखा है कि यदि इस वर्ग की महिलाओं के साथ कोई सहवास करता है, तो उसे तीर्थ के बराबर पुण्य मिलता है। इसी सोच के कारण चार महीने और 10 महीने की बच्चियों तक के साथ रेप हो रहे हैं। बयान से कांग्रेस इस कदर घिरी है कि जवाब नहीं सूझ रहा। एक तरफ भाजपा हमलावर है और दूसरी तरफ जीतू पटवारी ने कहा है कि इसके लिए बरैया को नोटिस जारी किया गया है।

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