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अब सवाल यह है कि क्या कलेक्टर ऑफिस दोनों कर्मचारियों स्टेनोग्राफर संतोष श्रीवास्तव और निगम कर्मचारी अनिल तांतोड को उनके मूल विभागों में वापस भेजेगा या फिर वर्षों से चली आ रही यह व्यवस्था यूं ही जारी रहेगी। यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।