Punishment for Demanding Bribe for Loan : बैंक ऋण के लिए रिश्वत मांगने वाले बैंक मैनेजर को 4 साल की सजा!

लोकायुक्त ने दर्ज किया था मामला, एक सहआरोपी को दोषमुक्त किया!

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सिंहस्थ-2004

Punishment for Demanding Bribe for Loan : बैंक ऋण के लिए रिश्वत मांगने वाले बैंक मैनेजर को 4 साल की सजा!

Ratlam : अदालत ने यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के मैनेजर को कर्ज के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में 4 साल की सजा सुनाने के साथ जुर्माना भी किया है। यह मामला 2018 का है। संतोष कुमार गुप्ता विशेष न्यायाधीश ने तत्कालीन बैंक प्रबंधक को बैंक ऋण जारी करने के लिए 25 हजार रुपए की रिश्वत मांगने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7 और 13 (1) डी में दोषसिद्ध पाते हुऐ धारा 7 को 13 (1) डी में समाहित मानते हुए धारा 13 (1) डी सहपठित धारा 13 (2) एवं 120 बी भादवि के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध के लिए 4 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 1 हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित कर आरोपी बैंक मैनेजर महेन्द्र सिंह डेहरिया पिता हेमचन्द्र डेहरिया उम्र 43 यूनियन बैंक आफ इण्डिया शाखा नामली चैरई पुलिस थाना जिला छिंदवाड़ा को जेल भेजा गया।तथा आरोपी दिलीप शर्मा पिता लादूराम शर्मा उम्र 64 विशेष सहायक (क्लर्क) यूनियन बैंक आफ इण्डिया शाखा नामली निवासी 138/3 खानबावड़ी रतलाम को दोषमुक्त किया गया।

इस मामले में जिला अभियोजन अधिकारी गोविन्द प्रसाद घाटिया ने बताया कि 16.फरवरी. 2018 को आवेदक हिम्मत सिंह पिता रूपसिंह राजपूत निवासी गुवालखेडी पोस्ट बरबोदना तहसील जिला रतलाम ने उज्जैन के लोकायुक्त कार्यालय पंहुचकर एक लिखित शिकायत कि थी कि मेरे पिताजी रूप सिंह एवं मेरे चाचा बलवंत सिंह,फुल सिंह के नाम से संयुक्त केसीसी खाता यूनियन बैंक आफ इण्डिया शाखा नामली जिला रतलाम में हैं और मेरे पिताजी रूप सिंह ने आचार्य विद्यासागर योजना के अंतर्गत पशुपालन के लोन के लिए पशु चिकित्सालय रतलाम में आवेदन किया था,वहां से 4 लाख 25 हजार रूपए सब्सिडी सहित लोन स्वीकृति होकर यूनियन बैंक आफ इण्डिया पहुंच चुका है।जिसकी राशि निकालने हेतु महेन्द्र सिंह डेहरिया शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक आफ इण्डिया शाखा नामली से मिला तो उन्होने किश्त जारी करने के लिए मुझसे 25 हजार रूपए रिश्वत की मांग की है।

इस पर निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव विपुस्था लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन ने रिश्वत की मांग की जाने की पुष्टि की जाने के लिए आवेदक हिम्मत सिंह को रिश्वत संबंधी वार्तालाप को गोपनीय रूप से रिकॉर्ड करने के लिए शासकीय डिजिटल वाईस रिकॉर्डर देकर आरोपी महेन्द्र सिंह डेहरिया , सह-आरोपी दिलीप शर्मा और हिम्मत सिंह के मध्य हुई रिश्वत संबंधी बातचीत की रिकॉर्डिंग कराई गई। तत्पश्चात रिश्वत की मांग प्रमाणित पाए जाने पर, विधिवत ट्रैप कार्यवाही 17.फरवरी.2018 को यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया शाखा नामली जिला रतलाम में की गई तथा सह-आरोपी दिलीप शर्मा को आवेदक हिम्मत सिंह राजपूत से 25 हजार रूपए रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव के द्वारा ट्रेप किया गया।

आवेदक हिम्मत सिंह ने निरीक्षक बसंत श्रीवास्तव को बताया कि वह बैंक के अंदर गया था।बैंक मैनेजर से मिला तो उन्होने हाथ से इशारा करके दिलीप शर्मा उर्फ जोशी को रूपए देने को कहा।इस पर वह दिलीप शर्मा के साथ बैंक से बाहर आया और दिलीप शर्मा उर्फ जोशी को रिश्वत के रूपए दे दिए। विज्ञप्त पंच विमल कुमार सूर्यवंशी ने सह-आरोपी दिलीप शर्मा उर्फ जोशी से रिश्वत की राशि के बारे में पूछा तो उसने बताया कि मैंने महेन्द्र सिंह डेहरिया के कहने पर हिम्मत सिंह से 25 हजार रूपए लेकर अपनी पहनी हुई ब्लू कलर की जींस की पेंट की पीछे की दाहिनी जेब में रखे हैं। जिस पर विज्ञप्त पंच विमल कुमार सूर्यवंशी ने सह-आरोपी दिलीप शर्मा उर्फ जोशी की पहिनी हुई ब्लू कलर की जींस की पेंट की पीछे की दाहिनी जेब में से रिश्वत के रूपए निकाले और गिने तो 25 हजार रूपए थे।

इन करेंसी नोटो के नंबरों का मिलान किए जाने पर ये नोट वही नोट पाए गए,जो लोकायुक्त कार्यालय में फिनाफ्थीलीन पावडर लगाकर आवेदक की जेब में रखवाए गए थे। मौके पर सह-आरोपी दिलीप शर्मा के हाथों को सोडियम कार्बोनेट पाउडर के घोल में धुलवाया गया तो घोल का रंग गुलाबी हो गया।सह-आरोपी ने रिश्वत के नोट लेकर पहिनी हुई ब्लू कलर की जींस की पेंट की पीछे की दाहिनी जेब में रख लिए थे।एफएसएल विभाग के अधिकारी द्वारा रासायनिक परीक्षण में सह-आरोपी के हाथ धुलवाने के घोल और ब्लू कलर की जींस की पेंट की पीछे की दाहिनी जेब जिसमें रिश्वत की राशि रखी गई थी।जिसके पोंछने के घोल में फिनाफ्थलीन का परीक्षण धनात्मक पाया था।

विवेचना में अपराध प्रमाणित पाए जाने पर आरोपीगणों के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन द्वारा आरोपीगणों के विरुद्ध अभियोग पत्र 15.अक्टोबर.2019 को विशेष न्यायालय रतलाम में प्रस्तुत किया गया था।

जिसमें विचारण उपरांत विशेष न्यायालय रतलाम द्वारा आरोपी महेन्द्र सिंह डेहरिया तत्कालीन शाखा प्रबंधक,यूनियन बैंक आफ इण्डिया,शाखा नामली जिला रतलाम को दोषसिद्ध किया गया एवं एक अन्य आरोपी दिलीप शर्मा पिता लादूराम शर्मा उम्र 64 वर्ष विशेष सहायक (क्लर्क) यूनियन बैंक आफ इण्डिया को दोषमुक्त कर दिया गया। शासन की ओर से प्रकरण में पैरवी कृष्णकांत चौहान, विशेष लोक अभियोजक (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) द्वारा की गई।