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इंदौर में जब मुख्यमंत्री पुलिस प्रशासन और जिले के अफसरों की मीटिंग लेने के बाद पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे तब पत्रकारों ने पुलिस में भ्रष्टाचार की तरफ उनका ध्यान आकर्षित किया था। और मूल वजह भी कहीं न कहीं तंत्र में व्याप्त गड़बड़ियों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। इसी वजह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बेचैनी हुई है। डॉ मोहन यादव की बचैनी को सकारात्मक नजरिए से लेते हुए यह उम्मीद की जा सकती है कि ऐसी लापरवाही के चलते घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। और तंत्र में व्याप्त गड़बड़ियों का खात्मा होकर रहेगा। ताकि डॉ. मोहन यादव की बेचैनी व्यर्थ न जा सके। बाकी त्वरित सख्त कार्यवाही बढ़िया है और यातायात समस्याओं का समग्र निराकरण की सोच भी संवेदनशीलता से भरी है। और भरोसा है कि बेचैनी का दीर्घकालिक असर कसौटी पर खरा उतरेगा…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।