Ram Mandir: हे राम! अब तो आपके घर में ही चोरी

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Ram Mandir: हे राम! अब तो आपके घर में ही चोरी

रंजन श्रीवास्तव

रामलला अब अपने घर में विराजमान हैं. हाई-प्रोफाइल लोगों का एक ट्रस्ट भी है, जिसको राम मंदिर के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी दी गई है. जाने कितने सुरक्षाकर्मी और सीसीटीवी कैमरे चौबीसों घंटे सबकी आवाजाही पर नजर रखते रहते हैं. शासन-प्रशासन के टॉप एजेंडे में राम मंदिर की सुरक्षा और देखभाल है, भले ही अयोध्या में भाजपा को मंदिर बनाने के बाद भी हार मिली. एक आम आदमी बिना सुरक्षा जांच के मंदिर के अंदर फटक भी नहीं सकता, पर जाने कितने समय से मंदिर के अंदर से लोगों द्वारा दिए गए दान की चोरी हो रही थी.

अगर मामला कुछ सौ या हजार रुपयों का होता या अगर कुछ लाख का भी होता, तो संभवतः मंदिर प्रबंधन इस बात की हवा भी नहीं लगने देता. पर चोरी तो करोड़ों रुपयों की है. चोरी की गई राशि का वास्तविक अनुमान अभी भी लगाना कठिन है, पर चूंकि यह चोरी एक लंबे समय से ऑर्गेनाइज्ड तरीके से हो रही थी, अतः चोरी की गई राशि का अलग-अलग अनुमान लगाया जा रहा है. आम आदमी पार्टी के नेता तथा राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने तो दावा किया है कि चोरी की गई यह राशि 200 करोड़ रुपये से ज्यादा है.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में 15 सदस्य हैं, जिसके अध्यक्ष 88 वर्षीय महंत नृत्य गोपाल दास हैं. आरएसएस से जुड़े चंपत राय जनरल सेक्रेटरी हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा टेम्पल कंस्ट्रक्शन कमेटी के चेयरमैन हैं. अन्य 12 लोग भी हाई-प्रोफाइल हैं, जिनमें केंद्र सरकार के एक नॉमिनी जो आईएएस अधिकारी हैं तथा राज्य सरकार के एक नॉमिनी जो आईएएस अधिकारी हैं. अयोध्या के जिलाधिकारी इस ट्रस्ट के एक्स-ऑफिशियो सदस्य हैं.

यानि ट्रस्ट में ऐसे लोग हैं जिनका प्रशासन और पुलिस पर अच्छा-खासा प्रभाव है तथा जिनकी उपस्थिति में ट्रस्ट में किसी तरह की हेराफेरी के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता.

पर करोड़ों की चंदा चोरी बता रही है कि मंदिर के प्रबंधन में भयंकर खामी थी और ट्रस्ट का जनरल सेक्रेटरी होने के नाते चंपत राय की यह जिम्मेदारी थी कि वे मंदिर के प्रबंधन में कोई खामी नहीं आने दें और अगर कहीं कोई गड़बड़ कर रहा हो तो वह उनके तत्काल संज्ञान में आ जाए, जिससे वे उस खामी को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई कर सकें.

अभी यह नहीं पता कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों, खासकर चंपत राय को इस दान की राशि में घपले की शंका कब से थी, पर दान चोरी का यह मामला जून में ही सामने आया. असामान्य स्थिति देखते हुए ट्रस्ट ने जांच की पहल की और भाजपा की राज्य सरकार ने चंदा चोरी की जांच के लिए एक विशेष जांच दल भी गठित कर दिया है, पर आश्चर्य इस बात का है कि देश में करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में दान चोरी की जांच के लिए ट्रस्ट ने अभी तक पुलिस थाने में कोई एफआईआर नहीं की है.

एसआईटी ने भी अभी तक कोई एफआईआर की पहल नहीं की है. लगता है कि सरकार भी तुरंत एफआईआर किया जाए, इस मूड में नहीं है.

एफआईआर नहीं किए जाने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा चल रही है.

अगर ट्रस्ट के पदाधिकारी, खासकर चंपत राय, इस चोरी से अनजान थे तो यह आश्चर्य का विषय है. क्योंकि दान में मिली राशि को गिनती के लिए जिन कर्मचारियों की ड्यूटी होती थी, उनमें से कुछ के जीवन में असामान्य बदलाव दिखाई दे रहा था तथा उनकी संपत्ति में उनकी आय से ज्यादा की बढ़ोतरी दिखाई दे रही थी. उनकी लाइफ स्टाइल को लेकर उनके आसपास के लोगों में चर्चा बहुत दिनों से चल रही थी, पर इन सभी बातों से ट्रस्ट के पदाधिकारी अनजान थे या अगर उनको जानकारी भी थी तो इसको बदस्तूर चलने दिया.

अयोध्या से आ रही मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लंबे समय से कुछ शातिर और उनसे जुड़े लोग दान राशि की गणना में लगे हुए थे. चूंकि इनके ऊपर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय का अटूट विश्वास था, अतः उनकी ड्यूटी राशि की गणना में लगातार लगती रही.

जबसे मंदिर की स्थापना हुई है, तबसे अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये का चढ़ावा मंदिर में आ चुका है. इस राशि में से 2 करोड़ का गबन हुआ या 20 करोड़ का या 200 करोड़ का, यह जांच के बाद ही पता चलेगा.

जो सवाल अभी अनुत्तरित हैं, वे यह हैं कि इस चंदा और चढ़ावा चोरी में वाकई कितने लोग शामिल हैं, चोरी का कृत्य सिर्फ इनके द्वारा किया गया या इनके पीछे कोई मास्टरमाइंड भी है. अगर कोई मास्टरमाइंड है तो वह क्या ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में शामिल है या वह बाहरी है. ट्रस्ट और सरकार इस मामले में एफआईआर से क्यों बचना चाहते हैं?

क्या यह सही है कि दान और चढ़ावा गिनने में सिर्फ उन्हीं को रखा जाता था जो चंपत राय के विश्वासपात्र थे? मंदिर प्रबंधन ने राशि गिनने की व्यवस्था में चेक एंड बैलेंस क्या रखा था और अगर चंपत राय या अन्य किसी ट्रस्टी की लापरवाही की वजह से दान और चढ़ावा चोरी जैसे घृणित कृत्य को देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित राम मंदिर में अंजाम दिया गया, तो उस ट्रस्टी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?