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दिया जाएगा।
इस आदेश से दिक्कत आ रही थी और कई शासकीय सेवकों ने न्यायालय की शरण ली थी। कोर्ट से उनके पक्ष में फैसले भी हो रहे है। इसलिए इस पर विराम लगाने अब सामान्य प्रशासन विभाग ने नियमों में ही संशोधन कर दिया है।
नये प्रावधान के तहत अब इस योजना में यदि कोई शासकीय सेवक उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ ले चुका होता है और बाद में नियमित पदोन्नति मिलने पर पदोन्नति स्वीकार करने से इंकार करता है तो उसे पूर्व से स्वीकृत उच्चतर वेतनमान के अंतर्गत वित्तीय लाभ वापस नहीं लिया जाएगा लेकिन उसे बाद में कोई उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा। यह निर्देश जारी होने की दिनांक से प्रभावशील माने जाएंगे और पुराने निर्णित प्रकरण पुन: नहीं खोले जाएंगे।