
226 दिन में दूसरी विमान दुर्घटना: पहले विजय रूपाणी, अब अजीत पवार, सुरक्षा समीक्षा की आवश्यकता
▪️राजेश जयंत▪️
देश आज एक गंभीर विमानों हादसों के सिलसिले से उबरने का प्रयास कर रहा है। 16 जून 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का असमय निधन हुआ। केवल 226 दिन (लगभग 7.5 महीने) के अंतराल में दो वरिष्ठ नेताओं की यह घटनाएं केवल व्यक्तिगत दुःख नहीं हैं, बल्कि विमान सुरक्षा, तकनीकी मानक और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती हैं। जन भावना में शोक और निराशा के साथ‑साथ यह प्रश्न भी जोर पकड़ रहे हैं कि क्या यह केवल दुर्भाग्यपूर्ण हादसे थे या कहीं सिस्टमिक चूक और तकनीकी लापरवाही भी शामिल थी।

● पहली घटना: विजय रूपाणी का विमान हादसा
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहे थे, जब टेकऑफ के कुछ ही समय बाद विमान नियंत्रण खो बैठा और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में सैकड़ों यात्री मारे गए और केवल एक यात्री ही बच पाया। रूपाणी का निधन डीएनए परीक्षण से पुष्ट हुआ। इस हादसे ने विमान सुरक्षा, प्री‑फ्लाइट चेक, तकनीकी रख‑रखाव और घरेलू/अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मानकों पर गंभीर बहस छेड़ी।

● दूसरी घटना: अजीत पवार का बारामती विमान हादसा
आज 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड विमान बारामती में लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार सभी छह लोग- पवार, उनके सुरक्षा अधिकारी, सहायक और चालक दल के सदस्य मारे गए।
यह घटना महाराष्ट्र और देशभर की राजनीति को झकझोर कर रख दी। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री सहित कई नेता शोक व्यक्त कर चुके हैं, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक पूरी व्याख्या अभी भी स्पष्ट नहीं हुई।
● समानताएं और असमानताएं
• दोनों वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु विमान हादसे में हुई।
• जन और राजनीतिक प्रतिक्रिया गहरी शोक और चिंता से भरी।
• विमान सुरक्षा और तकनीकी मानक पर व्यापक सवाल उठे।
• स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग उठी।
असमानताएं:
• रूपाणी का हादसा टेकऑफ के दौरान, पवार का हादसा लैंडिंग के समय हुआ।
• रूपाणी का विमान अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर, पवार का चार्टर्ड विमान स्थानीय उड़ान पर था।
• रूपाणी हादसे में सैकड़ों यात्री प्रभावित, पवार हादसे में 6 सवार सभी मारे गए।
• राजनीतिक प्रभाव अलग राज्य स्तर पर: गुजरात में रूपाणी, महाराष्ट्र में पवार।
● विशेषज्ञ और तकनीकी दृष्टिकोण
विशेषज्ञों के अनुसार दोनों हादसों में निम्न बिंदुओं पर गहन समीक्षा जरूरी है:
• टेकऑफ और लैंडिंग प्रोटोकॉल- दो सबसे संवेदनशील चरण।
• रनवे सुरक्षा और मौसम निगरानी।
• तकनीकी रख‑रखाव और एयरक्राफ्ट सेंसर।
• मानवीय प्रतिक्रिया और आपातकालीन प्रक्रिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी कारकों का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी विश्लेषण होना आवश्यक है।
● जन भावना: केवल शोक नहीं, सवाल भी
जनता शोक व्यक्त करने के साथ‑साथ पूछ रही है:
• क्या सार्वजनिक सुरक्षा उपायों का पालन दोनों हादसों में सही हुआ?
• क्या वरिष्ठ नेताओं की यात्रा सुरक्षा मानकों के अनुसार थी?
• क्या तकनीकी, रनवे और मौसम निगरानी पूर्ण और अद्यतन थी?
इन सवालों का जवाब ना मिलना जन विश्वास पर गंभीर असर डालता है।
● राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक प्रभाव
• विजय रूपाणी का निधन गुजरात की राजनीति के लिए बड़ा झटका था।
• अजीत पवार की मौत ने महाराष्ट्र में प्रशासनिक संतुलन और नीतिगत गति को प्रभावित किया।
दोनों घटनाओं ने राजनीतिक रिक्तता, नीति निर्णय और नेतृत्व विकल्पों पर असर डाला है।
● विमान सुरक्षा और नीति‑स्तर समीक्षा की आवश्यकता
• DGCA और संबंधित विमानन एजेंसियों के माध्यम से स्वतंत्र जांच आयोग का गठन।
• वरिष्ठ नेताओं की यात्रा मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का विशेष अध्ययन।
• रनवे सुरक्षा, मौसम पूर्वानुमान और तकनीकी रख‑रखाव के नियमों की पुनरावलोकन।
• नागरिक उड्डयन विभाग को पारदर्शी रिपोर्ट जारी करने का आदेश।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि 226 दिन में दो वरिष्ठ नेताओं की मौत केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि नीति सुधार और तकनीकी सुरक्षा की चुनौती भी है।
● समाज और लोकतंत्र के लिए संदेश
• सुरक्षा, तैयारी और जवाबदेही का स्तर ऊंचा होना चाहिए।
• जनता को विश्वास दिलाया जाए कि नेताओं और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
• स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच से भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
● निष्कर्ष
16 जून 2025 से 28 जनवरी 2026 तक केवल 226 दिन में दो वरिष्ठ नेता सहित सैकड़ो यात्रियों को विमान हादसों में खोना राष्ट्रीय राजनीति और विमान सुरक्षा प्रणाली के लिए चेतावनी है।
यह समय है:
• जांच आयोग की मांग मजबूत करने का
• सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने का
• जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने का
सिर्फ दुःख जताने से काम नहीं चलेगा, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता जरूरी है।





