अमझेरा में श्री कृष्ण रुक्मणी लोक: मुख्यमंत्री की मंशा, अफसरों की दौड़… फिर सामने आया बड़ा पेंच

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अमझेरा में श्री कृष्ण रुक्मणी लोक: मुख्यमंत्री की मंशा, अफसरों की दौड़… फिर सामने आया बड़ा पेंच

अमझेरा से गोपाल खंडेलवाल की ग्राउंड रिपोर्ट

अमझेरा (धार): धार जिले में अमझेरा स्थित अमका झमका तीर्थ पर “श्रीकृष्ण-रुक्मणी लोक” को लेकर धार जिला प्रशासन पिछले एक सप्ताह से युद्धस्तर पर तैयारी कर रहा था, अब वही परियोजना वन विभाग की आरक्षित जमीन में उलझती नजर आ रही है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की विशेष रुचि के बाद जिस धार्मिक परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा था, उसकी राह में अब कागजी और विभागीय प्रक्रियाओं की बड़ी दीवार खड़ी हो गई है।

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दरअसल, अमका-झमका तीर्थ स्थित प्राचीन श्रीकृष्ण-रुक्मणी हरण स्थल पर बनने वाले “ श्री कृष्ण रुक्मणी लोक” के लिए प्रशासन ने जिस जमीन का चयन किया, वह वन विभाग की आरक्षित भूमि निकली। जमीन की वास्तविक स्थिति सामने आते ही राजस्व अमले में हलचल मच गई और पूरे दस्तावेज तत्काल जिला कलेक्टर कार्यालय भेज दिए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अमका-झमका तीर्थ से जुड़ाव के बाद इस स्थान का स्वरूप तेजी से बदलने लगा है। जन्माष्टमी पर हर वर्ष यहां पहुंचने वाले मुख्यमंत्री ने इस स्थल को धार्मिक आस्था और पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की इच्छा जताई थी। पिछले दिनों स्वयं जिला कलेक्टर भी यहां पहुंचे थे।

इसी के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ।

सरदारपुर एसडीएम सलोनी अग्रवाल, नायब तहसीलदार काशीराम वास्केल और राजस्व अमला मौके पर पहुंचा। अफसरों ने जमीन का सीमांकन और निरीक्षण शुरू किया। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो पूरा मामला वन विभाग की आरक्षित जमीन पर जाकर अटक गया।

“जहां बनना था ‘रुक्मणी लोक’, वहां वन विभाग का अधिकार”

सूत्रों के मुताबिक अमका-झमका तीर्थ के समीप सर्वे नंबर 1204 की करीब 25.927 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 3 बीघा क्षेत्र “श्रीकृष्ण-रुक्मणी लोक” के लिए प्रस्तावित किया गया था। यहां भगवान श्रीकृष्ण की रुक्मणी हरण लीला, धार्मिक प्रसंग, तीर्थ महिमा और सांस्कृतिक भवनों का निर्माण प्रस्तावित है।

लेकिन जमीन वन विभाग के आरक्षित क्षेत्र में होने से अब परियोजना सीधे वन स्वीकृति की प्रक्रिया में फंस सकती है। सरकारी निर्माण के लिए वन भूमि हस्तांतरण आसान नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में भोपाल से लेकर दिल्ली तक मंजूरी की लंबी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

” *क्या अब फाइलों में दौड़ेगा ‘रुक्मणी लोक’! ??”*

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि परियोजना को लेकर प्रदेश स्तर से लगातार मॉनिटरिंग हो रही है, लेकिन वन विभाग की आरक्षित भूमि सामने आने के बाद अब पूरा मामला कागजी प्रक्रिया पर निर्भर हो गया है।

यानी जिस “ श्री कृष्ण रुक्मणी लोक” को जल्द आकार देने की तैयारी थी, वह अब फाइलों और अनुमतियों के बीच धीमी रफ्तार पकड़ सकता है।

*धार्मिक आस्था से जुड़ा है अमका-झमका तीर्थ*

अमका-झमका तीर्थ को क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी हरण प्रसंग से जोड़ा जाता है। वर्षों से यहां श्रद्धालुओं की आस्था बनी हुई है। अब सरकार इस स्थल को बड़े धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की तैयारी में है।

*इनका कहना है -*

“रुक्मणी लोक के लिए प्रस्तावित जमीन का निरीक्षण किया गया था। जांच में जमीन वन विभाग की आरक्षित भूमि पाई गई है। संबंधित दस्तावेज जिला स्तर पर भेज दिए गए हैं।”

— सलोनी अग्रवाल, एसडीएम सरदारपुर