हत्यारे डॉक्टर के बेटे श्रीकांत ने भी की डेढ़ करोड़ की धोखाधड़ी कर सर्जन डा. अनिल सिंह के विश्वास की हत्या ?

Shrikant, the son of the murdered doctor, also committed a fraud of 1.5 crore and murdered the trust of surgeon Dr. Anil Singh?

3178

हत्यारे डॉक्टर के बेटे श्रीकांत ने भी की डेढ़ करोड़ की धोखाधड़ी कर सर्जन डा. अनिल सिंह के विश्वास की हत्या ?

संभागीय ब्यूरो चीफ चंद्रकांत अग्रवाल की एक्सक्लूसिव खबर

इटारसी। नर्मदापुरम के अपने ही ड्राइवर की जघन्य हत्या कर उसके टुकड़े टुकड़े कर गलाने वाले डॉक्टर सुनील मंत्री पिछले तीन महीने से जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उन्हीं डॉक्टर मंत्री के बेटे श्रीकांत मंत्री पर भी अब 1.58 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगा है। इतना ही नहीं आरोपी श्रीकांत द्वारा जिले के एक सुविख्यात सर्जन के परिवार का एक्सीडेंट कराने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। इटारसी के प्रसिद्ध माता मंदिर अस्पताल के संचालक,विख्यात सर्जन डॉक्टर अनिल सिंह ने इटारसी थाने में श्रीकांत मंत्री के खिलाफ धारा 420, 506 के तहत प्रकरण दर्ज कराया है।

यह पूरा मामला कोरोना काल के समय का है। ज्ञात रहे कि श्रीकांत के पिता डा. सुनील मंत्री अपने ड्राइवर की हत्या करने के पूर्व माता मंदिर अस्पताल में ओपीडी देखते थे। कोरोना काल के दौरान डा. मंत्री ने अपने बेटे श्रीकांत मंत्री का परिचय अस्पताल के संचालक डा.अनिल सिंह से कराया। श्रीकांत ने डा. सिंह को एक बिजनेस प्रस्ताव दिया एक दवा कंपनी में रुपए लगाने का। यह गारंटी भी दी कि 2,3 साल में ही रुपए डबल हो जाएंगे। डॉक्टर अनिल सिंह उसकी बातों में आ गए और उन्होंने अपने अस्पताल को गिरवी रखकर आईसीआईसीआई और कोटक महेंद्रा बैंक से 1 करोड़ 58 लाख 39 हजार रुपए का लोन ले लिया। यह रुपए उन्होंने श्रीकांत के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। करीब 3 साल गुजर जाने के बाद भी आरोपी श्रीकांत ने उन्हें रुपए नहीं लौटाएं। इटारसी थाना के टीआई रामस्नेही चौहान ने बताया कि आरोपी श्रीकांत से डा.सिंह की जान पहचान ज्यादा हो गई। कोविड काल के दौरान रुपए दवा कंपनी में लगाकर डबल कराने का कहा था। लेकिन न रुपए डबल हुए और न मूल रुपए श्रीकांत ने लौटाए।

WhatsApp Image 2023 06 01 at 10.12.18 PM
फरियादी सर्जन डा.अनिल सिंह,संचालक माता मंदिर हॉस्पिटल,इटारसी।

अस्पताल के संचालक डॉक्टर अनिल सिंह ने पुलिस को बताया कि इस धोखाधड़ी के कारण अस्पताल आर्थिक रूप से खराब स्थिति में है। रुपए मांगने पर आरोपी श्रीेकांत फरियादी अनिल सिंह को उसके परिवार का एक्सीडेंट कराने की धमकी दे रहा है। प्रथम सूचना रिपोर्ट, एफआईआर में वर्णित तथ्यों की बात करें तो फरियादी जिले के सुविख्यात सर्जन डा.अनिल सिंह पिता स्व. राजेश्वर सिह उम्र 60 वर्ष, निवासी माता मंदिर हॉस्पिटल, इटारसी ने एक लिखित आवेदन पत्र इस आशय का प्रस्तुत किया है कि अनावेदक श्रीकांत मंत्री द्वारा प्रवंचना कारित करते हुए कपट पूर्वक तथा बेईमानी से छल कारित करने की नीयत से उसके अर्थात फरियादी डा.अनिल सिंह से कुल एक करोड़, अठ्ठावन लाख, उनचालिस हजार रुपए की राशि उद्यापित करते हुए धोखाधड़ी का अपराध कारित किया है। इसके अतिरिक्त फरियादी अनिल सिंह द्वारा श्रीकान्त मंत्री से विधिक पैसा मांगने पर फरियादी के परिवार का एक्सीडेंट कराने की धमकी भी श्रीकांत मंत्री द्वारा दी गयी है। आरोपी श्रीकांत मंत्री द्वारा कारित कृत्य धारा 420,506 भादवि. का होने से उसके विरूद्द अपराध कारित कर विवेचना में लिया गया है। आवेदन पत्र में कहा गया है कि मैं इटारसी स्थित माता मंदिर अस्पताल का संचालक हूँ। मेरे अस्पताल में डा.सुनील मंत्री ने ओ.पी.डी. प्रेक्टिस लगभग 4-5 साल, फरवरी 2019 तक की थी।

उस दौरान डा. सुनील मंत्री ने मुझे उनके बेटे श्रीकांत मंत्री से मिलवाया था। चूंकि डा.सुनील मंत्री हमारे हॉस्पिटल में प्रेक्टिस किया करते थे, इस कारण सामान्य नैतिक अनुक्रम में मेरे अच्छे व्यवहार उनके बेटे श्रीकांत मंत्री से भी बन गये थे। वर्ष 2018 के प्रारंभ मे श्रीकांत मंत्री ने मुझसे कहा कि वह इंदौर मे एक कंपनी में कार्य करता है तथा उसने मुझसे कहा कि आप उस कंपनी में पैसा लगाइए तो लगभग दो तीन साल मे आपके पैसे दुगुने हो जायेंगे। तब मैने श्रीकांत मंत्री से कहा कि ऐसी कोन सी कंपनी है जो दो तीन साल मे पैसे दुगुने कर देती है। तब श्रीकांत ने कहा कि आप मुझ पर भरोसा रखिए, आपके पैसे नहीं डूबेंगे सारी जबाबदारी मेरी रहेगी। तब मैंने श्रीकांत की बातों पर भरोसा करते हुए, कोटेक महिंदा बैंक शाखा होशंगाबाद से 1,25,00,000/- रूपये का लोन लिया था जिसमें से मुझे अपने कोटेक महिंदा बैक के खाता कमांक 5512591916 के खाते में कुल 1,23,89,375/- रूपये की राशि मेरे खाते मे प्राप्त हुयी थी, तदुपरांत मैने दिनांक 16 फरवरी 2018 को ही आरोपी श्रीकांत मंत्री के आईसीआईसी बैंक के खाता क्रमांक 037601517492 में 75 लाख रूपये आर.टी.जी.एस. के माध्यम से, 17 फरवरी 2018 को 28 लाख 99 हजार रूपये आर टी.जी.एस. के माध्यम से, तथा 6 मार्च 2018 को 17 लाख 40 हजार रूपये आरोपी श्रीकांत मंत्री के खाते में उसके कहने पर मैने जमा किए थे। चूंकि लोन लेने के पहले तथा आरोपी के खाते में पैसे जमा करने के पूर्व मैने आरोपी श्रीकांत मंत्री से कहा था कि तुम्हारे और मेरे बीच जो सम व्यवहार होना है उसका विधि अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित कर लेते है किन्तु श्रीकांत मंत्री हीलाहवाली करता रहा। इसके बाद मैने आरोपी श्रीकांत मंत्री के खाते में कुल 3 उक्त बड़ी रकमो की राशि जमा करने के बाद उससे कहा कि तुमने अनुबंध पत्र अभी तक निष्पादित नही किया है। जिस पर मेरे दबाब देने के बाद 12 मार्च 2018 को मेरे और श्रीकांत मंत्री के बीच एक इकरार नामा हुआ। उसके अनुसार तैयार करवाकर प्रस्तुत किया गया। जिस पर मैने कहा कि इस इकरारनामा में वे सभी बातें नहीं हैं,जो हमारे मध्य तय हुई थीं। उचित स्टांप पर एक विधिक अनुबंध पत्र तैयार किया जाना चाहिए। तब श्रीकांत मंत्री ने मुझसे कहा कि आप तो मुझ पर भरोसा रखिए। इकरारनामा तो मात्र एक औपचारिकता है।

इकरारनामा की शर्तों अनुसार श्रीकांत मंत्री को प्रतिमाह 01 लाख 63 हजार 227 रूपये मेरे द्वारा लिए गए लोन की किश्तो को अदा करने के संबंध में मुझे दिया जाना तय किया गया था, जिसके अनुपालन मे श्रीकांत मंत्री द्वारा माह मार्च 2018 तथा माह अप्रेल 2018 की किश्ते जमा नहीं की गयी। इसके पश्चात श्रीकांत मंत्री द्वारा 8 सितंबर 2018 तक कुल 5 किश्ते 1,63,500/- रुपेय प्रतिमाह की दर से जमा की गयी। मैने श्रीकांत मंत्री से कहा कि तुम मेरे साथ जानबूझकर बेईमानी क्यों कर रहे हो तब श्रीकांत मंत्री ने कहा कि पारिवारिक समस्या के कारण वह मार्च 2018 और अप्रेल 2018 की किश्त जमा नही कर पाया है। भविष्य में वह नियमित रूप से सभी किश्ते जमा करेगा। इसके बाद श्रीकांत मंत्री ने मुझसे कहा कि उसे कुछ और पैसों की जरूरत है जिन्हे वह समय पर लौटा देगा तथा मुझसे कहा कि मैं बैंक से लोन लेकर उसे पैसा दे दूँ। तब मैने श्रीकांत मंत्री के कहने पर कोटेक महिंद्रा बैंक से कुल 39 लाख रूपये का लोन सितंबर 2018 मे लिया था। जिस संबंध मे मुझे बैंक द्वारा 38 लाख 65 हजार 485 रूपये की राशि मेरे उक्त संदर्भित खाते मे 04.10.2018 को प्राप्त हुयी थी। जिस संबंध मे मैने श्रीकांत के कहे अनुसार उसके आईसीआईसी बैंक के खाता कमांक 037601517492 में 37,01, 985/- रुपये की राशि जमा की थी। इसके पश्चात आरोपी श्रीकांत मंत्री द्वारा मुझसे पूर्व में ली गयी राशि के संबंध मे कुल 04 अन्य किश्त कुल राशिं बराबर 07 लाख 57 हजार रूप्ये की राशि 04 किश्तो के माध्यम से खाते में प्रदान की गयी। इसके पश्चात श्रीकांत मंत्री ने इकरारनामा की शर्तों अनुसार प्रति माह दी जाने वाली किश्त को जमा करना बंद कर दिया तथा श्रीकांत द्वारा मुझसे बाद में ली गयी कुल राशि 37 लाख 01 हजार 985 रूपये के संबंध मे बिल्कुल भी राशि की अदायगी आज तक नही की गयी। इस दौरान मैने कई बार श्रीकांत से मेरे द्वारा दी गयी विधिक राशि की मांग प्रत्यक्ष रूप से तथा दूरभाष से की किंतु श्रीकांत मंत्री द्वारा नियमित रूप से राशि दिए जाने के संबंध मे हीलाहवाला किया गया।

तत्पश्चात मेरे द्वारा फोन लगाने पर मुझसे कहा गया कि तुमसे जो बने वो कर लो। मैं तुम्हारा पैसा नही दूंगा। यदि तुम बार बार पैसों की मांग करोगे तो मै तुम्हारे परिवार वालों का एक्सीडेंट करा दूंगा। इस तरह मेरे साथ आरोपी श्रीकांत मंत्री द्वारा प्रवंचना कारित करते हुए कपट पूर्वक तथा बेईमानी से छल कारित करने की नीयत से मेरी कुल 1,58,39000/- ( शब्दो मे एक करोड़, अठ्ठावन लाख, उनचालिस हजार रुपये) की राशि उद्यापित करते हुए धोखाधड़ी का अपराध कारित किया है। इसके अतिरिक्त श्रीकांत मंत्री द्वारा मेरा विधिक पैसा उससे मांगने पर मेरे परिवार का एक्सीडेंट कराने की धमकी भी दी गयी है। अतएव आरोपी श्रीकांत मंत्री द्वारा कारित कृत्य धारा 420,506 भादवि. का होने से उसके विरूद्द उपरोक्त धाराओ का अपराध पंजीबद्द करते हुए समुचित कार्यवाही करने का कष्ट करें। तदनुसार ही पुलिस ने उपरोक्त धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। मीडियावाला ने डा. अनिल सिंह से बात की तो उन्होंने लगभग सभी वही बातें बताएं जो एफआईआर के तथ्यों में दर्ज हैं।वहीं श्रीकांत मंत्री से कई बार उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की पर हर बार स्विच आफ मिला। ट्रू कालर पर वह मोबाइल नंबर श्रीकांत मंत्री के नाम पर ही होने की पुष्टि भी हुई।