Solar project bribery scandal: निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ीं, SIT ने आरोपी मानते हुए बयान की अनुमति मांगी

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Solar project bribery scandal: निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें बढ़ीं, SIT ने आरोपी मानते हुए बयान की अनुमति मांगी

Lucknow: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित Solar project bribery scandal में निलंबित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश की कानूनी और प्रशासनिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अभिषेक प्रकाश को औपचारिक रूप से आरोपी मानते हुए उनका बयान दर्ज करने के लिए नियुक्ति विभाग से अनुमति मांगी है। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

 

▪️क्या है पूरा मामला

-यह मामला SAEL Solar Power कंपनी के लगभग 7000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से जुड़ा है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश में सोलर परियोजना की मंजूरी के लिए जब कंपनी ने Invest UP के माध्यम से आवेदन किया, तब तत्कालीन सीईओ अभिषेक प्रकाश के कथित इशारे पर उनके करीबी दलाल निकांत जैन ने परियोजना स्वीकृति के बदले 5 प्रतिशत कमीशन की मांग की। यह राशि करीब 350 करोड़ रुपए आंकी गई है। कंपनी का कहना है कि जब घूस देने से इनकार किया गया, तो फाइल को जानबूझकर रोका गया और मंजूरी प्रक्रिया बाधित कर दी गई।

 

▪️मुख्यमंत्री ने दिखाई सख्ती

-मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया था। इस कार्रवाई को सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा गया।

 

▪️दलाल की गिरफ्तारी और जमानत

-घूस मांगने के आरोप में निकांत जैन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में उसे जमानत मिल गई, लेकिन फिलहाल वह कहां है, इसकी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इसी तरह निलंबन के बाद आईएएस अभिषेक प्रकाश कहां हैं, इसको लेकर भी स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।

 

▪️SIT की जांच और चार्जशीट

-SIT ने इस मामले में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें कॉल डिटेल्स, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान शामिल बताए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता कंपनी के प्रतिनिधि ने अपने हलफनामे में सीधे तौर पर अभिषेक प्रकाश का नाम लिया, जिसके आधार पर SIT ने उन्हें आरोपी मानते हुए पूछताछ की अनुमति मांगी है।

 

▪️विभागीय और विजिलेंस जांच की संभावना

-सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि बयान और साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं, तो विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ विजिलेंस जांच और संपत्ति की जांच भी तेज की जा सकती है। मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी और नैतिक जवाबदेही का भी बन चुका है।

 

▪️कौन हैं अभिषेक प्रकाश

-अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे Invest UP के सीईओ और औद्योगिक विकास विभाग में अहम पदों पर रह चुके हैं। निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े पदों पर उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया है।

▪️अब आगे क्या

-नियुक्ति विभाग से अनुमति मिलने के बाद SIT अभिषेक प्रकाश का बयान दर्ज करेगी। इसके आधार पर तय होगा कि मामला केवल मध्यस्थ तक सीमित रहेगा या सीधे अधिकारी की भूमिका पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। सरकार और जांच एजेंसियों के लिए यह मामला निवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।