
मूल्यनिष्ठ न्याय व जीवन में मूल्यों के संरक्षण हेतु अध्यात्म जरूरी: – अध्यक्ष मानव अधिकार आयोग डॉ अवधेश प्रताप सिंह
वरिष्ठ पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
माउंट आबू । ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ज्ञान सरोवर, माउंट आबू(राजस्थान) में राष्ट्रीय न्यायविद व विधिवेत्ता सम्मेलन सम्पन्न हुआ । इसमें देश भर से विभिन्न प्रांतों से न्यायविद और विधि से जुड़े वरिष्ठ जनों ने सहभागिता कर मूल्य आधारित न्याय विषय पर विचार साझा किए ।

न्यायविदों के राष्ट्रीय सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि डॉ अवधेश प्रताप सिंह, अध्यक्ष मप्र मानव अधिकार आयोग ने उद्बोधन में कहा कि आज के भौतिक वातावरण में जीवन मूल्य निरंतर गिर रहे हैं जिसका प्रभाव विभिन्न व्यवसाओं के साथ विधिक सेवा से जुड़े लोगों पर भी पड़ रहा है।इसी लिए शायद इस सम्मेलन में न्यायविद तथा विधिवेत्ताओं के लिए आयोजित सम्मेलन में मूल्यनिष्ठ न्याय हेतु आध्यात्मिक सशक्तिकरण लिया गया।
डॉ सिह ने कहा कि जबकि न्याय का आधार ही नैतिक मूल्य होते हैं लेकिन शांत मन,शांत चित्त और संयम से ही मूल्य आधारित न्याय हो सकता है इसके लिए आंतरिक रूप से सशक्त होना जरूरी है।आज हम बाहरी या शारीरिक मजबूती के लिए एक्सरसाइज,जिम,योग आदि करते है परंतु ब्यस्त दिनचर्या एवं आपा धापी में हमारी आंतरिक चेतना उपेक्षित रहती है।

स्वयं राजयोग मैडिटेशन करने वाले डॉ अवधेश प्रताप सिंह ने व्यवहारिक उदाहरण के साथ कहा कि बाहरी साधनों से नहीं बल्कि अध्यात्म द्वारा ही व्यक्ति की आंतरिक चेतना का सशक्तिकरण हो सकता है।अध्यात्म का आशय अपने मूल स्वरूप आत्मा का परमात्मा से संबंध जोड़कर शक्ति प्राप्त करना होता है जिससे मन बुद्धि व जीवन में संतुलन आता है।यही गीता का सहज राजयोग है।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति बिश्वरूप चौधरी कोलकाता उच्च न्यायालय,न्यायमूर्ति बी डी राठी, इंदौर उपाध्यक्ष ज्यूरिस्ट विंग, दिल्ली उड़ीसा सहित विभिन्न प्रदेशों से आये जिला न्यायाधीशगण,विधिवेत्ता, राजयोगी भाई बहिन तथा अभिभाषक बड़ी संख्या में उपस्थित थे ।





