Badwani MP: कपास में कीट का प्रकोप, सूखकर मुरझाने लगे पौधे

Badwani MP: कपास में कीट का प्रकोप, सूखकर मुरझाने लगे पौधे

मीडियावाला.इन।

बारिश के बाद अब कपास में कीट का प्रकोप सूखकर मुरझाने लगे पौधे, कृषि विभाग व विशेषज्ञों की टीम ने ग्राम बोम्या रोड स्थित खेत में पहुंच किया निरीक्षण, कृषक को बचाव के लिए दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह दी 

बड़वानी- इस बार खरीफ सीजन में फसल बुआई के एक-डेढ़ माह बाद फसलों को मानसून का पानी नसीब हुआ है। इससे जमीन में नमी बढ़ी है हालांकि इस दौरान कुछ खेतों में मुख्य रुप से कपास फसलों में जड़ सडऩ और फंगस जैसी समस्याए उभरने लगी है। इससे कपास पौधे मुरझाने और सूखने लगे है। 
इसको लेकर संबंधित किसान कृषि विभाग और वैज्ञानिकों को शिकायत दर्ज कराने लगे है। ऐसी ही शिकायत को लेकर गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और कृषि अधिकारी ग्राम बोम्या रोड स्थित खेत में पहुंचे। इस दौरान कपास पौधे की जड़ में सडऩ पाई गई। इसको लेकर संबंधित कृषक को बचाव के लिए दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

 विशेषज्ञों के अनुसार बोवनी पूर्व जमीन अच्छी तरह तैयार नहीं करने से ऐसी समस्या आती है। इसमेें एक पौधा संक्रमित होता हैं तो बारिश होने पर पानी के माध्यम से अन्य पौधे भी संक्रमित होने लगते है। रोग से जड़ पीली पड़ जाती हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जगदीशचंद्र गुप्ता ने बताया कि आज एक किसान के खेत में निरीक्षण किया। इसमें सडऩ संबंधित रोग लगा पाया गया। यह रोग फसल को सूखा देता है। इससे फसल की जड़ पीली पड़ जाती है। इसके बचाव के लिए निर्धारित दवाइयों का घोल बनाकर ऐसा छिड़काव करें कि पौधे की जड़ तक पहुंच सके। उससे अन्य फसल को बचाव होगा।

 उल्लेखनीय है कि जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन में कुल दो लाख 38 हजार 550 हेक्टेयर में बोवनी प्रस्तावित है। इसके विरुद्ध अब तक 97 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। इसमें प्रमुख रुप से कपास की करीब 75 हजार हेक्टेयर में बोवनी होना है।

देखिए वीडियो क्या कह रहे है- डॉ जगदीश गुप्ता (कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक)

0 comments      

Add Comment