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लेकिन ये दीवानगी केवल हमारी नहीं बल्कि हमारी धर्मपत्नियों की भी थी ये तब पता लगा जब उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता गोविंदा पधारे । उन दिनों मैं मंदिर में प्रशासक का काम भी देखता था । मंदिर में गर्भगृह के लिये रुद्र यंत्र की पुनर्स्थापना का कार्य चल रहा था ।
एक दिन मंदिर के पुजारी श्री रमन त्रिवेदी मेरे पास आए और बोले कि हिंदी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता गोविंदा भी मंदिर में रुद्र यंत्र के लिए चाँदी दान करना चाहते हैं और अगले सप्ताह उनके उज्जैन आने का कार्यक्रम बन रहा है । गोविंदा की लोकप्रियता को देखते हुए मैंने पुलिस के भी आवश्यक इंतिज़ामात कर लिए।
निर्धारित दिन मैंने मंदिर जाने के पहले अपनी पत्नी को बताया कि आज मंदिर में गोविंदा आने वाला है । मेरी पत्नी ने जो गोविंदा की बड़ी फैन थी , यह सुनते ही मेरे साथी सी.एस.पी. महेंद्र सिंह सिकरवार की पत्नी जो उनकी अच्छी सहेली थी, को फ़ोन किया और मंदिर आने का कार्यक्रम बना लिया । मैंने मंदिर में उन दोनों को प्रशासक के कार्यालय में बिठा दिया और कहा कि गोविंदा जब यहाँ आयेंगे तब आप लोग मिल लेना , इसके बाद मैं इंतजाम में लग गया । गोविंदा आए तो मैंने उन्हें मुख्य द्वार पर साथ लिया और मंदिर के अंदर तक ले गया। जब गोविंदा गर्भगृह में चले गए तो पुजारी रमण त्रिवेदी को मैंने कहा आप गोविंदा को पूजा हो जाने के बाद चाँदी दान की प्रक्रिया सम्पन करने मंदिर के कार्यालय में ले आना और मैं अपने कार्यालय आ गया । मंदिर कार्यालय पहुँचा तो देखा दोनों ही मैडम वहाँ नहीं थीं । कर्मचारियों से पूछा तो पता लगा कि गोविंदा के आने की खबर सुन कर वे दोनों मंदिर की तरफ़ ही गईं हैं । मैंने सोचा इतनी भीड़ में वे कहीं फँस ना जायें तो तुरत वापस मंदिर की ओर भागा ।

नंदी हाल में घुसते ही मैंने सामने देखा तो पाया मेरी पत्नी जी और महेंद्र भाई वाली भाभी जी , दोनों श्रीमतियाँ गोविंदा के अगल बगल खड़ी उसके साथ फोटो खिंचा रहीं हैं । जनता के साथ उनकी दीवानगी देख मुझे भी हँसी आ गई। इसके बाद मैं गोविंदा को लेकर ऑफिस आया जहाँ उसने रुद्र यंत्र में लगने वाली चाँदी के लिए पचास हज़ार रुपयों का दान दिया और फिर हम सबने वहाँ एक बार फिर गोविंदा के साथ फ़ोटो खिंचवाई ।