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रविवारीय गपशप: फिल्मी सितारों के प्रति ये दीवानगी

जब सनी देओल और करिश्मा के साथ हमारी फोटो खींची गई

रविवारीय गपशप: फिल्मी सितारों के प्रति ये दीवानगी

आनंद शर्मा

फिल्मी सितारों का भला कौन दीवाना न होगा , सेल्यूलाइड के चमकदार पर्दे पर बनी सितारों की इमेज़ की दीवानगी हर जमाने में ऐसी ही रही है , शायद इसीलिये हमारे देश में बहुत से राजनीतिक दल इन सितारों को अपनी पार्टी से चुनाव में खड़ा कर उनकी लोकप्रियता अपनी पार्टी के लिए भुनाते हैं । लेकिन अभी हाल के चुनावों में तमिलनाडु के परिणाम ने सभी राजनीतिक रणनीतिकारों को चौंका दिया , जब एक फिल्मी अभिनेता ने देश की दोनों प्रमुख पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस और अपने प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रीय क्षत्रपों की पार्टी को पीछे छोड़ते हुए ना केवल सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं बल्कि ख़ुद मुख्यमंत्री भी बन गये । मुझे याद है अपने कॉलेज के दिनों में जबलपुर में जब कभी एम्पायर टॉकीज़ में प्रेमनाथ के आने की ख़बर उड़ती तो हम जैसे कई छात्र उनकी एक झलक पाने के लिये बेकरार रहते थे ।

उज्जैन जिले की खाचरोद तहसील में जब मैं एसडीएम हुआ करता था , तब नागदा के बिरला मंदिर में सनी देओल की फ़िल्म अजय की शूटिंग हुई थी । एसडीएम होने के नाते क़ानून व्यवस्था सम्हालने अपने एसडीओपी श्री रघुवंशी के साथ मुझे नागदा जाना पड़ता था । नागदा में तो जैसे सनी देओल , करिश्मा कपूर की झलक पाने जनता दीवानी हो उठी थी । बड़ी मुश्किल से ढेरों पुलिस बल लगा के हमने व्यवस्था बनाई , और जब शूटिंग बिना बाधा के संपन्न हो गई , तब शूटिंग सम्हाल रहे प्रबंधकों ने हमसे कहा , आपका हम कैसे धन्यवाद करें ? एसडीओपी रघुवंशी जी ने तपाक से कहा सनी देओल और करिश्मा के साथ हमारी फोटो खिंचवा दीजिये । बस फिर क्या था , फोटो खिंचवाई हुई और अब भी पुराने एल्बम के किसी हिस्से में वो सुरक्षित रखी है ।

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लेकिन ये दीवानगी केवल हमारी नहीं बल्कि हमारी धर्मपत्नियों की भी थी ये तब पता लगा जब उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता गोविंदा पधारे । उन दिनों मैं मंदिर में प्रशासक का काम भी देखता था । मंदिर में गर्भगृह के लिये रुद्र यंत्र की पुनर्स्थापना का कार्य चल रहा था ।

एक दिन मंदिर के पुजारी श्री रमन त्रिवेदी मेरे पास आए और बोले कि हिंदी फ़िल्मों के मशहूर अभिनेता गोविंदा भी मंदिर में रुद्र यंत्र के लिए चाँदी दान करना चाहते हैं और अगले सप्ताह उनके उज्जैन आने का कार्यक्रम बन रहा है । गोविंदा की लोकप्रियता को देखते हुए मैंने पुलिस के भी आवश्यक इंतिज़ामात कर लिए।

निर्धारित दिन मैंने मंदिर जाने के पहले अपनी पत्नी को बताया कि आज मंदिर में गोविंदा आने वाला है । मेरी पत्नी ने जो गोविंदा की बड़ी फैन थी , यह सुनते ही मेरे साथी सी.एस.पी. महेंद्र सिंह सिकरवार की पत्नी जो उनकी अच्छी सहेली थी, को फ़ोन किया और मंदिर आने का कार्यक्रम बना लिया । मैंने मंदिर में उन दोनों को प्रशासक के कार्यालय में बिठा दिया और कहा कि गोविंदा जब यहाँ आयेंगे तब आप लोग मिल लेना , इसके बाद मैं इंतजाम में लग गया । गोविंदा आए तो मैंने उन्हें मुख्य द्वार पर साथ लिया और मंदिर के अंदर तक ले गया। जब गोविंदा गर्भगृह में चले गए तो पुजारी रमण त्रिवेदी को मैंने कहा आप गोविंदा को पूजा हो जाने के बाद चाँदी दान की प्रक्रिया सम्पन करने मंदिर के कार्यालय में ले आना और मैं अपने कार्यालय आ गया । मंदिर कार्यालय पहुँचा तो देखा दोनों ही मैडम वहाँ नहीं थीं । कर्मचारियों से पूछा तो पता लगा कि गोविंदा के आने की खबर सुन कर वे दोनों मंदिर की तरफ़ ही गईं हैं । मैंने सोचा इतनी भीड़ में वे कहीं फँस ना जायें तो तुरत वापस मंदिर की ओर भागा ।

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नंदी हाल में घुसते ही मैंने सामने देखा तो पाया मेरी पत्नी जी और महेंद्र भाई वाली भाभी जी , दोनों श्रीमतियाँ गोविंदा के अगल बगल खड़ी उसके साथ फोटो खिंचा रहीं हैं । जनता के साथ उनकी दीवानगी देख मुझे भी हँसी आ गई। इसके बाद मैं गोविंदा को लेकर ऑफिस आया जहाँ उसने रुद्र यंत्र में लगने वाली चाँदी के लिए पचास हज़ार रुपयों का दान दिया और फिर हम सबने वहाँ एक बार फिर गोविंदा के साथ फ़ोटो खिंचवाई ।