
रविवारीय गपशप: पटवारी का ट्रांसफर और एसडीएम की पोस्टिंग!
आनंद शर्मा
सरकारी नौकरी में तबादले होना आम बात है , और इस स्थानांतरण की प्रक्रिया में कई बार दिलचस्प साथी मिल जाते हैं जो न केवल आपके अच्छे दोस्त बनते हैं , बल्कि उनकी यादों के तार ताउम्र आपके साथ जुड़े रहते हैं । जब मैं नरसिंहपुर से सीहोर पदस्थ हुआ तो वहाँ मुझे पीसी प्रसाद मिले जो मुझसे नौकरी में एक बैच जूनियर थे तथा बड़े मनमौजी तबीयत के आदमी थे । जल्द ही हम अच्छे दोस्त बन गए । प्रसाद उन दिनों इछावर अनुविभाग के एसडीएम हुआ करते थे । एक दिन किसी ने उन्हें शिकायत की कि बीच बाज़ार में कोई शख़्स धार्मिक स्थल बनाने के नाम पर सरकारी जगह में कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है । रविवार की छुट्टी का दिन था , और प्रसाद सीहोर जिला मुख्यालय में रहा करते थे । वे तत्काल अपनी जीप उठा कर निकले और इछावर पहुँच कर उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को तलब किया । राजस्व निरीक्षक और पटवारी तो पहुँच गए पर तहसीलदार गायब थे । अतिक्रमण तत्काल हटाना आवश्यक था सो उन्होंने थाने के नवजवान इंचार्ज सब इंस्पेक्टर की मदद ली , और अतिक्रमण हटा दिया गया । प्रसाद साहब तहसीलदार पर भारी नाराज थे , क्योंकि अतिक्रमण हटाना उनका मूल दायित्व था और वे मुख्यालय से बिना बताए गायब थे । उन दिनों शासन के पत्राचार वायरलेस सिस्टम से हुआ करते थे । प्रसाद साहब ने सीधे चीफ सेक्रेटरी को वायरलेस किया और लिखा कि तहसीलदार ने बड़ी लापरवाही की है इसलिए उसे सस्पेंड किया जाए और पुलिस के सब इंस्पेक्टर में बड़ी तत्परता दिखाई है सो उसे आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन दिया जाए । वायरलेस सीधे नहीं जाता था , प्रॉपर चेनल से ही पहुँचता था , सो जब सीहोर से भोपाल प्रसारित करने के लिए आया तो इंचार्ज हवलदार उसे एसपी साहब को दिखाने ले आया , एसपी साहब ने कलेक्टर को बताया कि आपका एसडीएम सीधे चीफ सेक्रेटरी को वायरलेस भेज रहा है । टीएल बैठक में कलेक्टर साहब बड़े अप्रसन्न हुए पर अपर कलेक्टर सीमा शर्मा मैडम समझ गईं कि भावुकता में आकर प्रसाद से भूल हो गई है सो उन्होंने कलेक्टर साहब को शांत किया और प्रसाद को अलग से बुला कर समझाया कि शासन तक बात पहुँचाने के लिए उचित माध्यम का होना जरूरी है ।
प्रसाद साहब भावुक अधिकारी थे , वे अपने अनुविभाग के एक-दो पटवारियों से नाराज़ थे क्योंकि उन पटवारियों के बारे में उन्हें नियम विरुद्ध काम करने की शिकायतें मिलती रहती थीं । प्रसाद मुझसे अपनी परेशानियां खुल कर बताते थे , सो इस बारे में भी उन्होंने कई बार मुझसे कहा कि ये एकदो बंदे ऐसे हैं कि इनके विरुद्ध कोई भी कार्यवाही करो ये झट राजनीतिक दबाव डलवा कर बच लेते हैं और फिर लोगों को परेशान करने लगते हैं । प्रसाद मैंने सुझाव दिया कि आप कलेक्टर से कह कर उनका ट्रांसफर करवा दो । अगली टीएल की बैठक में प्रसाद ने कलेक्टर से इस विषय पर अपना अनुरोध किया तो मैंने भी समर्थन कर दिया । कलेक्टर साहब ने भू अभिलेख विभाग के ओआईसी को निर्देशित किया और अगले सप्ताह ही दोनों पटवारी इछावर से नसरुल्लागंज तहसील के लिए स्थानांतरित हो गए । उन दिनों सीहोर से नसरुल्लागंज जाना पनिशमेंट पोस्टिंग हुआ करती थी , क्योंकि ये तहसील सीहोर से बड़ी दूर थी । प्रसाद साहब बड़े प्रसन्न हुए और हमने टी ब्रेक में उनसे इस सफलता पर स्पेशल नाश्ता भी ले लिया । इस घटना के बाद आने वाले सप्ताह में सोमवार को जब टी ब्रेक में प्रसाद साहब आए तो बड़े अनमने से थे । मैंने कहा क्यों बड़े अपसेट लग रहे हो क्या बात है ? प्रसाद साहब कहने लगे क्या बतायें आज ही डिप्टी कलेक्टरों के मध्य कार्य विभाजन का आदेश जारी हुआ और मुझे इछावर से हटा कर बुधनी का एसडीएम बना दिया गया है । मैंने कहा तो क्या हुआ यार बुधनी तो अच्छा सब डिवीजन है । प्रसाद बोले यार नसरुल्लागंज तहसील बुधनी सबडिवीजन में ही तो आती है ।





