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इसके बाद इन्होंने 5 एकड़ में ट्रेंच विधि से गन्ना लगाया। उन्होने जैविक खेती की, इसमें उन्होने जीवामृत, गोबर खाद, केंचुआ खाद के वेस्ट डीकम्पोजर का उपयोग किया। फसल अवशेषों की खाद का भी उपयोग किया। अच्छा उत्पादन हुआ। इस किसान ने अब गन्ने की खेती से रोजगार व आय का नया साधन बना लिया।
इन्होने गन्ने से बनने वाले गुड़ को कई फ्लेवर्स में बनाकर गुड़ बाईटस के रुप में बेचना प्रारंभ किया। यह जल्द ही लोकप्रिय हो गया है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले गन्ने को खेत पर साफ कर ट्रेक्टर ट्राली से गन्ना क्रेशर में ले जाया जाता है। जहां से रस निकालने के बाद उसे तीन बार फिल्टर से छानकर भट्टियों में पलटाया जाता है।
गुड़ का मैल साफ करने के लिए भिन्डी की जड़ व तने के रस का उपयोग किया जाता है। गुड़ पकने के बाद लकड़ी के चाक में निकालकर थोड़ा ठंडा होने पर इसमें तिल, मूंगफली, केसर, चाकलेट, सोंठ, अजवाइन, खोपरा, इलायची, ड्रायफ्रूट, आदि मिलाया जाता है और इसे स्टेनलेस स्टील के एक बाय एक इंच के क्यूब में जमाया जाता है।
यह बहुत ही औषधीय एवं पौष्टिक गुणों से भरपूर बनता है। इन गुड़ बाईटस के छोटे पीस का वजन लगभग 20 से 25 ग्राम एवं बड़े पीस का वजन लगभग 400 से 500 ग्राम होता है। सामान्यतः बाजार में गुड़ 40 से 50 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकता है। किसान जगदीश का यह परिवर्धित गुड़ 300 रूपए प्रति किलो तक घर से ही बिक जाता है। जगदीश चौधरी ने रोजगार व आय में वृद्धि के नए अवसर प्राप्त किए जिससे इन्होने अच्छा लाभ कमाकर अपनी आय में वृद्धि की।