
हनुमान जी को साक्षी मानकर पूर्व पार्षद रानी बेगम ने की घर वापसी, शीला यादव बनकर पुनः अपनाया हिंदू धर्म
छतरपुर: वार्ड क्रमांक 11 की पूर्व पार्षद रानी बेगम ने साधु-संतों की मौजूदगी में विधि-विधान से पुनः हिंदू धर्म अपनाते हुए घर वापसी की। इस अवसर पर हनुमान जी को साक्षी मानकर हवन-पूजन किया गया और गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण संपन्न कराया गया। घर वापसी के बाद उन्होंने अपना मूल नाम शीला यादव पुनः धारण किया।
शीला यादव मूल रूप से छतरपुर जिले के ग्राम कुर्रा, थाना ईसानगर की निवासी हैं। जो वर्तमान वार्ड नंबर 12 में रह रही है। उन्होंने बताया कि उनका बचपन का नाम शीला यादव था और उनके पिता का नाम चिंटोले यादव है। वर्ष 1995 में साबिर काजी के साथ निकाह कर इस्लाम धर्म अपनाया और करीब 21 वर्षों तक वैवाहिक जीवन व्यतीत किया। हालांकि, वहां की परंपराओं और जीवनशैली को स्वीकार न कर पाने के कारण वर्ष 2018 में उन्होंने तलाक लेकर हिंदू धर्म पुनः अपना लिया था, लेकिन धार्मिक विधि से घर वापसी नहीं हो सकी थी।
शीला यादव का कहना है कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा घर वापसी और हिंदू राष्ट्र को लेकर चलाए जा रहे अभियान से वे प्रेरित हुईं। उन्होंने कहा कि भारतीय और हिंदू होने के नाते हिंदू धर्म ही उनकी आत्मा से जुड़ा है।
उन्होंने बताया कि नाम परिवर्तन को लेकर समाचार पत्रों में इश्तिहार प्रकाशित कराया, आधार कार्ड में नाम अपडेट कराया, लेकिन प्रशासनिक दस्तावेजों में रानी बेगम से शीला यादव नाम दर्ज कराने के लिए वे पिछले एक वर्ष से कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं।
अंततः छतरपुर के साधु संतों औऱ सनातन धर्म सेवा समिति से संपर्क किया जहां आज गुरुवार को अनगढ़ टोरिया में साधु-संतों की उपस्थिति में विधिवत घर वापसी कराई गई। साधु-संतों ने प्रशासन से मांग की है कि शीला यादव के सभी शासकीय दस्तावेजों में नाम व धर्म परिवर्तन को विधिवत दर्ज किया जाए, ताकि उन्हें पहचान और अधिकार मिलने में कोई बाधा न हो।
●शीला यादव बोलीं, जैसे पुनर्जन्म हुआ हो..
शीला यादव बतातीं हैं कि मैनें यादव कुल में जन्म लिया था। मैं यादव परिवार में पली बढ़ी। मैंनें 1995 में भटकर शहर के ही साबिर काजी से शादी (कोर्ट मैरिज और निकाह) की इस्लाम कुबूल किया और 20-25 साल तक मैं साबिर काजी के साथ मुस्लिम रीतिरिवाज के साथ रही, अब मुझे रास नहीं आ रहा था अच्छा नहीं लगा (घुटन महसूस हुई) तो मैंने हिन्दू धर्म में आने के प्रयास किये जिसके लिए बाकायादा कलेक्ट्रेट में कलेक्टर को आवेदन दिया। जहां मुझे एक साल हो गया चक्कर काटते-काटते। वहां कुछ नहीं हुआ और निराशा ही हाथ लगी तो मैनें अपने धर्म के लोगों से संपर्क किया और इन लोगों ने विधि, विधान से पूजन, पाठ, हवन कर घर वापसी की है। अब से मैं अपने धर्म और समाज में जीना मरना चाहती हूँ।
रानी बताती हैं कि इन बीच मैंने रानी बेगम बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा और पार्षद रही, लोगों की जनसेवा की, पर जो सुकून अपने धर्म में था और है वो कहीं नहीं हैं। मैं मजबूरी में घुट-घुट कर जीती रही। 1 साल पहले मैंने धर्म परिवर्तन के लिये कलेक्टर के यहां भी आवेदन दिया था लेकिन पिछले 1 साल से मैं कलेक्टर के चक्कर काट रही हूं मेरी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई, जिसके चलते अब परेशान होकर मैंने इस तरह घर वापसी की है। जहां अब आज गुरुवार को मैनें हिंदू धर्म, संगठन, सनातनी लोगों के सहयोग से फिर से सनातन धर्म में वापसी हो गई है। जिससे मैं अपने धर्म, समाज, परिवार में लौटकर बहुत खुश हूँ कि जैसे मैनें पुनर्जन्म लिया हो।
●पंडित सौरभ तिवारी बोले..
मामले में पंडित सौरभ तिवारी बताते हैं कि आज एक महिला शीला यादव की घर वापसी हुई है, जहां अनगढ़ टोरिया मंदिर में साधु संतों और कर्मकांडी ब्राह्मणों की बैठक के दौरान ही पूजन, पाठ, हवन, कर पंच द्रव्य सेवन कराकर उन्हें रानी बेगम से शीला यादव बनाया गया है। उन्होंने आज वापसी की है और अब से वे शीला यादव जानी जायेंगी। उनकी विधिवत सनातन में वापसी हुई है।





