
Teekamgarh Collector’s Initiative: भीषण गर्मी में राहत का सस्ता और असरदार मॉडल: ‘जन शीतल आश्रय’
टीकमगढ़। जब तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है, तब घरों और कार्यालयों में रह रहे लोग तो किसी तरह राहत पा लेते हैं, लेकिन अस्पताल, तहसील, नगर पालिका या बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों पर इंतज़ार कर रहे लोगों के लिए यह गर्मी बेहद कठिन हो जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए टीकमगढ़ के कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने एक अभिनव और कम लागत वाला समाधान शुरू किया है— ‘जन शीतल आश्रय’।

कलेक्टर ने बताया कि इस पहल के तहत सार्वजनिक प्रतीक्षालयों और आश्रयों को पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीके से ठंडा रखने की व्यवस्था की गई है। आश्रयों के खुले हिस्सों को खस की टटिया (चटाई) से ढका गया है, जिन पर लगातार पानी का छिड़काव या मिस्ट सिस्टम चलाया जाता है। खस की टटिया में पानी पड़ते ही प्राकृतिक वाष्पीकरण (evaporative cooling) की प्रक्रिया शुरू होती है, जिससे आसपास का तापमान कुछ डिग्री तक कम हो जाता है और वातावरण में ठंडक महसूस होती है।

इस मॉडल की खास बात इसकी कम लागत और आसान संचालन है। इसमें महंगे एसी या बिजली की अधिक खपत की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि स्थानीय संसाधनों और सरल तकनीक के माध्यम से प्रभावी ठंडक प्रदान की जाती है।
पहल की शुरुआत जिला चिकित्सालय और नगर पालिका की दीन दयाल रसोई से की जा रही है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते हैं और लंबे समय तक प्रतीक्षा करते हैं। आने वाले समय में इसे अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी विस्तारित करने की योजना है।

‘जन शीतल आश्रय’ न केवल गर्मी से राहत देने का एक व्यावहारिक उपाय है, बल्कि यह पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जरूरतों का एक संतुलित उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। स्थानीय प्रशासन की यह पहल आमजन के लिए राहत की ठंडी बयार लेकर आई है।





