
MP की अफसरशाही पर सबसे बड़ा सवाल : FIR दब रही-बिना पैसे काम नहीं
CS ने सिस्टम के भीतर की सच्चाई उजागर की
▪️राजेश जयंत▪️
BHOPAL: मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर अब तक का सबसे सीधा, स्पष्ट और कठोर सवाल उस वक्त उठा, जब कलेक्टर और एसपी की राज्य स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव अनुराग जैन ने खुद सिस्टम के भीतर जमी कमजोरियों को सार्वजनिक मंच पर रख दिया। सुशासन की समीक्षा बैठक में जो बातें सामने आईं, उन्होंने न केवल प्रशासनिक दावों की पोल खोली, बल्कि सरकार से लेकर जिला स्तर तक की कार्यप्रणाली को भी आईना दिखा दिया।
● “प्रदेश में लोगों की शिकायतों को अटेंड ही नहीं किया जा रहा”
मुख्य सचिव ने बिना किसी लागलपेट के साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश में जनता की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं हो रहा है। कलेक्टर, एसपी, कमिश्नर और सचिव स्तर तक लाखों शिकायतें लंबित पड़ी हैं, जो सीधे तौर पर सिस्टम की सुस्ती और उदासीनता को दर्शाती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि शिकायत निवारण की पूरी व्यवस्था केवल फाइलों और पोर्टलों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर उसका असर बेहद कमजोर है।
● शिकायतें दबाने का खेल, FIR तक नहीं हो रहीं दर्ज
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान यह बेहद गंभीर तथ्य भी सामने आया कि कई जिलों में शिकायतों पर FIR तक दर्ज नहीं की जा रही है। अनेक मामलों में शिकायतें ऊपर तक पहुंचने से पहले ही स्थानीय स्तर पर दबा दी जाती हैं या ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं। मुख्य सचिव ने इसे प्रशासनिक सिस्टम की सबसे खतरनाक विफलता करार देते हुए कहा कि यह स्थिति सीधे जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
● जनता के मुद्दों पर व्यापक और गहन समीक्षा
मुख्य सचिव ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि केवल शिकायतों का आंकड़ों में निराकरण ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि समुदाय के संवेदनशील वर्गों से जुड़े मामलों, जैसे एससी-एसटी अत्याचार प्रकरण, हिट एंड रन मामलों में मुआवजा वितरण और पीड़ितों को समय पर राहत देने में भी प्रशासन अपेक्षित स्तर पर नहीं उतर पाया है। इन सभी मामलों को अब प्राथमिकता के आधार पर गंभीरता से लेने के निर्देश दिए गए।

● भ्रष्टाचार पर सबसे तीखा बयान, जो जनता वर्षों से कहती रही
बैठक के दौरान जब भ्रष्टाचार और पैसे के लेन-देन का मुद्दा उठा, तो मुख्य सचिव ने वह बात खुलकर कही, जो आम जनता वर्षों से कहती आ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तक यह शिकायतें पहुंच रही हैं कि कुछ कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं कर रहे। इसके साथ ही उन्होंने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। जो भी अधिकारी पैसे लेकर काम कर रहा है, उसके लिए सिस्टम में कोई जगह नहीं है और उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
● इंदौर का मामला, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पुलिस कमिश्नर नदारद
बैठक के दौरान इंदौर जिले का उदाहरण सामने आने पर माहौल और गंभीर हो गया। शिकायत निपटारे को लेकर सवाल उठाए जाने के समय पुलिस कमिश्नर वीडियो स्क्रीन पर मौजूद नहीं थे। जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला। इस लापरवाही पर मुख्य सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट संकेत दिया कि समीक्षा बैठकों से दूरी और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति अब नहीं चलेगी।
● साफ संदेश, सिस्टम में भ्रष्टाचार और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं
मुख्य सचिव अनुराग जैन के शब्दों में यह बिल्कुल साफ था कि यदि कोई अधिकारी जनता की सेवा के बजाय निजी लाभ के लिए अपने पद और अधिकारों का उपयोग कर रहा है, तो उसके लिए प्रशासनिक सिस्टम में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि सुशासन केवल योजनाओं और भाषणों से नहीं आता, बल्कि ईमानदार, संवेदनशील और जवाबदेह अमल से ही संभव होता है।
● सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी की घंटी
यह बैठक केवल एक औपचारिक समीक्षा नहीं, बल्कि पूरी अफसरशाही के लिए एक कड़ा संदेश और चेतावनी मानी जा रही है। शिकायतों की अनदेखी, FIR से बचने की प्रवृत्ति और भ्रष्टाचार को लेकर लग रहे आरोप अब दबाए नहीं जाएंगे। बात ऊपर तक पहुंच चुकी है और संकेत साफ हैं कि आने वाले समय में कार्रवाई भी दिखाई दे सकती है।





