
थाने से जमानत के प्रावधान का असर: 3 साल में घटे हजारों बंदी
भोपाल: प्रदेश की जेलों में बंदियों की संख्या पिछले तीन वर्षों में लगातार घट रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 से 2025 के बीच जेलों में निरुद्ध बंदियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे उन कानूनी प्रावधानों का असर मान रहे हैं, जिनमें सात साल तक की सजा वाले अपराधों में थाने स्तर पर ही जमानत देने की व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के चलते ही प्रदेश में पिछले तीन साल की तुलना में सवा दो हजार से ज्यादा बंदियों की कमी जेल में आई है।
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जेल विभाग के आंकड़ों के अनुसार 31 दिसंबर 2023 को प्रदेश की जेलों में कुल 45 हजार543 बंदी निरुद्ध थे। यह संख्या 31 दिसंबर 2024 को घटकर 45 हजार 092 रह गई। वहीं 31 दिसंबर 2025 तक आते-आते यह आंकड़ा और कम होकर 43 हजार 211 पर पहुंच गया। यानी तीन वर्षो में 2 हजार 332 बंदियों की कमी दर्ज की गई है। इसी के साथ जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों का दबाव भी घटता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023 में जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों का प्रतिशत 52.45 था। यह वर्ष 2024 में घटकर 47.15 प्रतिशत और वर्ष 2025 में 39.46 प्रतिशत रह गया। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि जेलों में भीड़ का संकट धीरे-धीरे कम हो रहा है।
31 हजार की है क्षमता
प्रदेश में वर्तमान में कुल 133 जेलें संचालित हैं, जिनमें केंद्रीय , जिला, खुली और उप जेल शामिल हैं। इन जेलों की कुल स्वीकृत आवास क्षमता 30 हजार 984 बंदियों की है, जबकि 31 दिसंबर 2025 की स्थिति में इनमें 43,211 बंदी निरुद्ध पाए गए। यानी क्षमता से करीब 12 हजार अधिक बंदी अभी भी जेलों में हैं, हालांकि पहले की तुलना में दबाव कम हुआ है।
*किस जेल में कितनी क्षमता*
प्रदेश की 11 केंद्रीय जेलों की कुल क्षमता 15 हजार 176 बंदियों की है, जबकि इनमें 23 हजार 349 बंदी हैं। इसी तरह 41 जिला जेलों की क्षमता 10 हजार 169 है, लेकिन इनमें 13 हजार 742 बंदी रखे गए हैं। 8 खुली जेलों की क्षमता 138 है, जिनमें 118 बंदी निरुद्ध हैं। वहीं प्रदेश की 73 उप जेलों में कुल 5 हजार 501 बंदियों की क्षमता के मुकाबले 6 हजार 002 बंदी हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ श्रेणियों में भीड़ अब भी बनी हुई है, लेकिन कुल दबाव में गिरावट दर्ज की गई है।
*बदलाव का यह कारण*
कानूनी जानकारों के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण आपराधिक प्रक्रिया में किया गया वह प्रावधान है, जिसमें सात साल तक की सजा वाले अपराधों में थाने स्तर से जमानत देने की व्यवस्था लागू की गई है। इससे ऐसे मामलों में आरोपियों को सीधे जेल भेजने के बजाय थाने से ही जमानत मिलना संभव हुआ है। पहले इन मामलों में बड़ी संख्या में आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिलने तक जेल भेज दिया जाता था, जिससे जेलों में भीड़ लगातार बढ़ती जा रही थी। नए प्रावधान के बाद कई मामलों में गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को थाने से ही राहत मिलने लगी है।





