
आदमी थूक कर चाट चुका है: चार दिन में यू-टर्न लेने वाले GST डिप्टी कमिश्नर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का करारा तंज
Ayodhya: अयोध्या में पदस्थ GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का त्यागपत्र देना और महज चार दिन के भीतर उसे वापस ले लेना अब महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह मामला सार्वजनिक बहस और तीखी राजनीतिक-धार्मिक टिप्पणियों का केंद्र बन गया है। रोते हुए वीडियो के जरिए नैतिकता और आत्मसम्मान की दुहाई देने वाले अधिकारी के इस यू-टर्न पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सीधा और कठोर तंज कसते हुए कहा- “आदमी थूक कर चाट चुका है।”
● क्या था पूरा मामला
अयोध्या में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एक विवाद को लेकर खुद को आहत बताया। इसके बाद उन्होंने कैमरे के सामने रोते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो में अधिकारी ने भावनात्मक लहजे में यह कहा कि वह मौजूदा परिस्थितियों में पद पर बने रहना उचित नहीं समझते और त्यागपत्र देने का फैसला कर चुके हैं। इस वीडियो को आत्मसम्मान और वैचारिक विरोध के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया गया।
● त्यागपत्र के बाद बदली कहानी
त्यागपत्र की घोषणा के बाद न तो अधिकारी ने किसी संवैधानिक प्रक्रिया का सहारा लिया और न ही यह स्पष्ट किया कि यदि सरकार त्यागपत्र स्वीकार नहीं करती है तो वह आगे क्या कदम उठाएंगे। न अदालत जाने की बात सामने आई और न किसी प्रशासनिक या कानूनी संघर्ष की घोषणा हुई। इसी बीच सोशल मीडिया पर चर्चा रही कि अधिकारी के सगे भाई द्वारा उन पर गंभीर आरोप लगाए गए।
● चार दिन में यू-टर्न
त्यागपत्र देने के महज चार दिन के भीतर GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया। इसके साथ ही वह दोबारा अपने पद पर बने रहे। यानी जिस भावनात्मक पीड़ा, नैतिक आक्रोश और आत्मसम्मान की बात सार्वजनिक मंच से कही गई थी, वह फैसला स्थायी नहीं रह सका।
● शंकराचार्य का सीधा और तीखा हमला
इसी पलटी हुई भूमिका पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा-
“44 बरेली मजिस्ट्रेट के इस्तीफा देने के बाद जो त्यागपत्र दिलवाया गया था, वह वापस हो चुका है। आदमी थूक कर चाट चुका है।”
यह बयान उस प्रवृत्ति पर सीधा प्रहार है जिसमें भावनात्मक वीडियो बनाकर सहानुभूति बटोरी जाती है, लेकिन फैसले की कीमत चुकाने की हिम्मत नहीं दिखाई जाती।
● उठते सीधे और असहज सवाल
अगर त्यागपत्र आत्मसम्मान का निर्णय था तो वह अंतिम क्यों नहीं रहा।
अगर सरकार ने त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया था तो अदालत का रास्ता क्यों नहीं चुना गया।
रोते हुए वीडियो क्या वास्तव में दुखी मन से बनाया गया था या चाटुकारिता/ सत्ता पक्ष की सहानुभूति हासिल करने का माध्यम।
● अंत में••••
अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का यह मामला अब नैतिक साहस का उदाहरण नहीं रह गया है। यह प्रकरण उस नौटंकी की मिसाल बन गया है, जहां कैमरे के सामने भावनाएं दिखाई जाती हैं, लेकिन निर्णय के समय हिम्मत जवाब दे जाती है। इसी कारण स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का तंज केवल कटाक्ष नहीं, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम का सार बनकर सामने आया है।





