‘घूसखोर पंडित’ फिल्म का नाम बदलेगा, विवाद के बाद मेकर्स का फैसला

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‘घूसखोर पंडित’ फिल्म का नाम बदलेगा, विवाद के बाद मेकर्स का फैसला

New Delhi: ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज से पहले ही विवादों में घिरी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों, देशभर में उठे विरोध और कानूनी चुनौती के बीच अब फिल्म के मेकर्स ने अपने कदम पीछे खींचते हुए टाइटल बदलने का फैसला किया है। इस पूरे मामले में नेटफ्लिक्स ने दिल्ली हाईकोर्ट को औपचारिक रूप से अवगत कराया कि फिल्म के नाम को लेकर उपजे विवाद को गंभीरता से लिया गया है और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से शीर्षक में बदलाव किया जा रहा है। अदालत में दी गई इस जानकारी के बाद यह साफ हो गया है कि फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ अब नए नाम के साथ दर्शकों के सामने आएगी

● क्यों भड़का विवाद और कोर्ट तक मामला पहुंचा

फिल्म के मूल शीर्षक ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर कई सामाजिक समूहों तथा समुदायों ने आपत्ति जताई थी। आलोचकों का कहना था कि ‘पंडित’ शब्द, जो पारंपरिक रूप से ब्राह्मण समुदाय या धार्मिक विद्वानों के लिए उपयोग होता है, को “घूसखोर” जैसे नकारात्मक शब्द के साथ जोड़ना अपमानजनक और संवेदनशील दृष्टिकोण से अनुचित है। इसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया आई और विरोध तेज़ हुआ। कई लोग इसे किसी समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए तेज़ी से आलोचना करने लगे।

● प्रदर्शन और कानूनी कार्रवाई

विवाद इतना व्यापक हुआ कि विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन हुए और कुछ स्थानों पर शिकायतें और एफआईआर भी दर्ज करवाई गईं। विरोधियों ने फिल्म की रिलीज़ और स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसमें शीर्षक को “अपमानजनक” और “सामुदायिक भावना को आहत करने वाला” बताया गया था।

● नेटफ्लिक्स और मेकर्स का रुख

नेटफ्लिक्स ने अदालत को बताया कि फिल्म के मेकर्स ने जनता की भावनाओं और विवाद को समझते हुए एक “सजग निर्णय” लिया है कि फिल्म का शीर्षक बदला जाएगा। इसके साथ ही नेटफ्लिक्स ने सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से अब तक जारी किए गए सभी प्रमोशनल मैटीरियल—including टीज़र वीडियो—हटा दिए हैं। निर्देशक नीरज पांडे ने यह स्पष्ट किया कि फिल्म एक कल्पनिक पुलिस ड्रामा है और शब्द ‘पंडत’ का उपयोग केवल एक काल्पनिक किरदार के नाम के रूप में किया गया था, किसी भी समुदाय, धर्म या जाति पर टिप्पणी के उद्देश्य से नहीं।

● दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेटफ्लिक्स की तरफ़ से शीर्षक बदलने की जानकारी को स्वीकार कर लिया और याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने कहा कि अब शीर्षक बदलने के नए निर्णय के मद्देनज़र याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत को हल मान लिया है और प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।

● अब आगे क्या होगा

हालांकि शीर्षक बदलने का निर्णय विवाद को शांत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, फ़ेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज जैसे इंडस्ट्री संगठनों ने कहा है कि शीर्षक बदलना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार फिल्म का कंटेंट और कथ्य कैसे सामाजिक भावना को प्रभावित करेगा, यह समझने के लिए कुछ समुदाय प्रतिनिधियों को फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग भी देनी चाहिए। अगर इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं होती है तो इंडस्ट्री सहयोग की स्थिति पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

● निर्माता-निर्देशक का बयान

निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे और मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय के प्रति नकारात्मक संदेश देना नहीं था। दोनों ने कहा कि फिल्म की कहानी पात्र के व्यक्तिगत निर्णयों और उसकी यात्रा से जुड़ी है न कि किसी समुदाय के बारे में कटुतापूर्ण सामाजिक संदेश देने वाली।

● परिवर्तन और रिलीज़ पर असर

नेटफ्लिक्स ने कोर्ट को बताया कि टाइटल बदलने की प्रक्रिया के कारण फिल्म की रिलीज़ रणनीति एवं प्रचार समयरेखा में कुछ संशोधन हो सकता है, लेकिन कंटेंट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। नया नाम तय होने के बाद ही रिलीज की आधिकारिक घोषणा की जाएगी, और फिल्म उसी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम की जाएगी।

● और अंत में•••

‘घूसखोर पंडित’ विवाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है जहाँ मेकर्स और प्लेटफॉर्म ने जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नाम बदलने का निर्णय लिया है। विवाद ने यह साबित किया है कि OTT कंटेंट के शीर्षक, प्रचार और सामाजिक दिलचस्पी वाले विषय आज दर्शकों और समुदायों के लिए कितने संवेदनशील हो सकते हैं। अब फिल्म का नया नाम क्या होगा और दर्शकों को किस रूप में पेश किया जाएगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।