गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS बनने की राह फिर खुलेगी, सीएस ने बुलाई जानकारी

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Shortage of IAS Officers

गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS बनने की राह फिर खुलेगी, सीएस ने बुलाई जानकारी

भोपाल. मध्यप्रदेश में लंबे समय से बंद पड़ी गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से IAS चयन की राह फिर खुलने के आसार है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक से इसके लिए भी प्रक्रिया शुरु करने और प्रस्ताव बुलाने को कहा है। लगभग ग्यारह साल बाद यह प्रक्रिया फिर शुरु होगी।

गौरतलब है कि गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस चयन की प्रक्रिया में वर्ष 2015 में चार अधिकारियों को आईएएस बनाया गया था। इसमें महानिरीक्षक पंजीयन एवं मुद्रांक कार्यालय से श्रीकांत पांडेय, वित्त विभाग से संजय गुप्ता, तकनीकी शिक्षा से शमीमुद्दीन और वित्त एवं लेखा से मंजू शर्मा को आईएएस बनाया गया था। इन अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा का 2007 बैच आवंटित किया गया था।

IAS बनने के बाद इन अफसरों ने जिलों में कलेक्टरी भी की और संजय गुप्ता तो उज्जैन कमिश्नर, श्रमायुक्त जैसे पदों पर भी पहुंचकर रिटायर हुए।

प्रदेश के सरकारी विभागों में बेहतर काम करने वाले अफसरों का चयन इसमें किया जाता है। प्रमोशन से IAS बनाए जाने के लिए स्वीकृत पदों में से पंद्रह प्रतिशत पद अन्य विभागों के श्रेष्ठ अधिकारियों को आईएएस बनाए जाने के लिए स्वीकृत रहते है। विभागों में पदस्थ अधिकारियों को आईएएस बनाए जाने के लिए नियम बने हुए है। इनकी पांच से दस साल की सीआर देखी जाती है। यह सीआर ए प्लस होंना चाहिए। इसके अलावा इनका पूरा अकादमिक रिकार्ड भी देखा जाता है। मुख्य सचिव या अपर मुख्य सचिव स्तर पर बनी समिति विभागों से आए अधिकारियों के नामों की स्क्रूटनिंग करती है। इसके बाद यूपीएससी से समय लिया जाता है और एक पद के विरुद्ध पांच अधिकारियों को आमंत्रित किया जाता है। इनके इंटरव्यू यूपीएससी अध्यक्ष या सदस्य लेते है। इंटरव्यू बोर्ड में मुख्य सचिव और जीएडी कार्मिक के प्रमुख सचिव भी शामिल रहते है। लंबे समय से यह प्रक्रिया बंद थी अब यह पुन: शुरु होने वाली है।

राप्रसे करता रहा है विरोध

गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए स्वीकृत पदों पर यदि डीपीसी और चयन नहीं होता है तो ये पद राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस अवार्ड किए जाने में जोड़े जाते है। इसलिए राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हमेशा गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस चयन की प्रक्रिया का विरोध करते आए है। ताकि उनके संवर्ग से ज्यादा प्रमोशन संभव हो सके। लेकिन मुख्य सचिव अनुराग जैन का मानना है कि अन्य विभागों में भी श्रेष्ठ कार्य प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित करना और उनकी विषय विशेषज्ञता का लाभ लेना जरुरी है इसीलिए इस प्रक्रिया को पुन: प्रारंभ करवाया जा रहा है।