
मादल की थाप से जागेगी घाटी,आस्था और आदिवासी संस्कृति का संगम-गंगा महादेव से भगोरिया का आगाज़
गोपाल खंडेलवाल की रिपोर्ट
अमझेरा: धार मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन पांडवकालीन गंगा महादेव शिवालय की पहाड़ियों से रविवार को आदिवासी लोकपर्व भगोरिया उत्सव का पारंपरिक शुभारंभ होगा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां एक दिवसीय मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।
परंपरा के अनुसार, भगोरिया पर्व की शुरुआत गंगा महादेव शिवालय से ही होती है। जिले के विभिन्न गांवों से आदिवासी समाज के मादल दल रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे यहां पहुंचेंगे। जैसे ही घाटी में मादल (डोल) की थाप गूंजेगी, पूरा क्षेत्र आदिवासी संस्कृति, उल्लास और उत्साह से सराबोर हो उठेगा।
*पांडवकाल से जुड़ी है शिवालय की मान्यता*
मान्यता है कि पांडवों ने अमका-झमका तीर्थ अमझेरा की यात्रा से पूर्व गंगा महादेव की पहाड़ी के नीचे स्थित गुफा में विश्राम कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की थी। आज भी यहां पहाड़ों के नीचे गुफा में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जहां से पहाड़ियों से झरने का जल प्रवाहित होता है। सैकड़ों वर्ष पुराने वृक्षों से घिरा यह परिसर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
*जनसहयोग से बदला मंदिर का स्वरूप*
ग्राम पंचायत सुल्तानपुर, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और दानदाताओं के सहयोग से विगत वर्षों में शिवालय का जीर्णोद्धार किया गया है। पिछले तीन वर्षों में मंदिर परिसर का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है, जिससे यहां श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।

शिवरात्रि पर एक दिवसीय मेला, भक्ति में रंगी घाटी
रविवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर गंगा महादेव शिवालय पर एक दिवसीय मेला आयोजित होगा। दिनभर दर्शन-पूजन, भजन-कीर्तन और आदिवासी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। आयोजकों के अनुसार, शिवरात्रि और भगोरिया का यह संगम क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत करता है।
अमझेरा के बाबा वैजनाथ महादेव पर होगा विशेष अभिषेक
रुद्राभिषेक, रामायण पाठ से सजेगा शिवरात्रि महोत्सव
श्रीकृष्ण–रुक्मणि हरण स्थल अमका झमका तीर्थ स्थित वैजनाथ महादेव गुफा में भी रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। यहां बाबा वैजनाथ महादेव का आकर्षक श्रृंगार कर रुद्राभिषेक किया जाएगा। साथ ही रामायण पाठ और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा।

*आदिवासी संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम*
गंगा महादेव से शुरू होने वाला भगोरिया उत्सव और शिवरात्रि का यह संयोग न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आदिवासी लोकसंस्कृति की जीवंत परंपराओं को भी सहेजने का माध्यम है। मादल की थाप, पारंपरिक नृत्य और शिवभक्ति—तीनों मिलकर क्षेत्र को उत्सवमय बना देंगे।





