
Third Death Anniversary of Journalist Dilipsingh Thakur:बेहद सहज ,सरल, विनम्र व्यक्तित्व -एक याद, जो हमेशा मुस्कुराती रहेगी
अनुराग तागड़े

इंदौर :आज जब स्वर्गीय दिलीपसिंह ठाकुर की तीसरी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करता हूँ, तो मन में अनेक स्मृतियाँ एक साथ उमड़ पड़ती हैं। कुछ लोग जीवन में ऐसे मिलते हैं जिनकी सादगी, उनका अपनापन और उनका व्यवहार जीवन भर याद रह जाता है। दिलीपसिंह जी ऐसे ही दुर्लभ व्यक्तित्व थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में रहते हुए भी उनमें कभी कोई अहंकार नहीं था। वे हमेशा बेहद सरल, विनम्र और जमीन से जुड़े हुए इंसान रहे। उनसे जब भी मुलाकात होती, उनके चेहरे पर वही सहज मुस्कान रहती, जैसे जीवन की हर परिस्थिति को वे सकारात्मकता के साथ स्वीकार करते हों।
नईदुनिया में आपके साथ बिताया हुआ समय आज भी बहुत याद आता है। नगर की खबरों को कवर करने का आपका तरीका, खबर के पीछे की सच्चाई तक पहुँचने की आपकी समझ और रिपोर्टिंग की बारीकियाँ ये सब आपने हम सबको सिखाया। आपके साथ काम करने वाले पत्रकार आज भी अक्सर कहते हैं कि दिलीपसिंह जी से हमने पत्रकारिता की सादगी और जिम्मेदारी दोनों सीखी थीं।
नईदुनिया के बाद के दौर में भी आपने परिस्थितियों का सामना बेहद सहजता और धैर्य के साथ किया। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहे, लेकिन आपने कभी अपने स्वभाव की विनम्रता और सकारात्मकता को कम नहीं होने दिया। उस समय भी आपसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। दिलीप जी अक्सर कहा करते थे परिस्थितियाँ बदलें, फिर भी इंसान का संतुलन और मुस्कान बनी रहनी चाहिए।
आपकी रामभक्ति भी अद्भुत थी। प्रभु श्रीराम के प्रति आपकी आस्था और श्रद्धा आपके व्यक्तित्व में एक विशेष शांति और स्थिरता का भाव भर देती थी। शायद यही कारण था कि आप हर परिस्थिति में संयमित और संतुलित दिखाई देते थे।
आज यह संतोष भी है कि आपकी बेटी दीप्ति पूरे समर्पण के साथ घर और परिवार की जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं। वे न केवल घर को संभाल रही हैं, बल्कि परिवार के सभी रिश्तों को भी उसी स्नेह और सम्मान के साथ निभा रही हैं। अपनी मां और दादी की देखभाल करते हुए जिस तरह से वे परिवार को संभाल रही हैं, वह आपके संस्कारों और आपके जीवन मूल्यों की ही सुंदर झलक है।
दिलीपसिंह जी का स्वभाव ही ऐसा था कि लोग उनसे अपने दिल की बात कहने में सहजता महसूस करते थे। वे हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते थे। किसी को कोई परेशानी हो तो वे चुपचाप आगे बढ़कर सहयोग करने वालों में से थे। यही कारण था कि उन्हें जानने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से पसंद करता था। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब उनकी कमी और भी गहराई से महसूस होती है। लेकिन उनकी मुस्कान, उनकी सादगी, उनकी सीख और उनका अपनापन आज भी हमारी यादों में जीवित है और हमेशा रहेगा।
दिलीप जी, आप भले ही इस दुनिया से दूर चले गए हों, लेकिन आपने अपने व्यवहार और अपने प्रेम से जो स्थान लोगों के दिलों में बनाया है, वह हमेशा बना रहेगा।
आपकी पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।





