आतिफ अकील का यह पब्लिसिटी स्टंट भी अच्छा है… गाय को कम से कम राज्य पशु ही घोषित कर दे सरकार…

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आतिफ अकील का यह पब्लिसिटी स्टंट भी अच्छा है… गाय को कम से कम राज्य पशु ही घोषित कर दे सरकार…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

मध्यप्रदेश की विधान सभा में बजट सत्र के दूसरे दिन अशासकीय संकल्प के माध्यम से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। यह कोई नई बात इसलिए नहीं है क्योंकि उनके पिता तत्कालीन विधायक आरिफ अकील भी 2017 में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग अशासकीय संकल्प के जरिए ही कर चुके हैं। और पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए पुत्र आतिफ अकील ने भी संकल्प के जरिए सदन में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर अपने पिता को ही भावभीनी श्रद्धांजलि दी है। हाल ही में गोवंश को काटे जाने को लेकर राजधानी भोपाल में स्लॉटर हाउस को सील किया गया था। साथ ही, जिम्मेदारों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई थी। ऐसे में आतिफ अकील ने सही समय पर सरकार के सामने अशासकीय संकल्प पेश कर अपनी बुद्धिमत्ता का ही परिचय दिया है। आगे क्या होगा यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन भाजपा ने आतिफ अकील की इस मांग पर पलटवार करते हुए इसे पब्लिसिटी स्टंट कहा है। तो यह माना जाना चाहिए कि भले ही गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मुस्लिम विधायक आतिफ अकील की मांग पब्लिसिटी स्टंट ही हो लेकिन यह स्टंट भी बहुत मनमोहक है। और मध्य प्रदेश के गोरक्षक मुख्यमंत्री को गाय को कम से कम राज्य पशु घोषित करने की दिशा में तो कदम आगे बढ़ा ही देना चाहिए।

विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के मुस्लिम विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। सदन की कार्यवाही की शुरूआत से विपक्ष ने इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी के मामले को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दोषी अफसरों पर एक्शन और मंत्री के इस्तीफे की मांग की। इस बीच राजधानी भोपाल की उत्तर सीट से कांग्रेस के मुस्लिम विधायक आतिफ अकील का बड़ा बयान सामने आया। उन्होंने गाय को राष्ट्र पशु घोषित करने की मांग की। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि, गाय को लेकर अशासकीय संकल्प विधानसभा में लगाया है। हिंदू धर्म गाय को माता मानता है। ऐसे में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए। यही नहीं, गाय की मौत पर विधि विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार भी होना चाहिए। आतिफ ने ये भी कहा कि, चमड़े का व्यापार भी बंद होना चाहिए। उन्होंने बताया कि, साल 2017 में उनके पिता ने भी संकल्प के जरिए ही यही मामला सदन में लगाया था। उस समय भी बीजेपी की सरकार थी और बहुमत के कारण संकल्प पारित नहीं हो सका था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि, भाजपा की कथनी और करनी में बहुत अंतर है। वहीं, कांग्रेस विधायक आतिफ अकील की मांग पर बीजेपी ने पलटवार किया है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि, आतिफ अकील मस्जिद जाएं और मुस्लिम समुदाय से अपील करें कि गायों को ना कांटे और ना खाएं। आतिफ अकील सिर्फ पब्लिसिटी के लिए ये मांग ना करें। उन्होंने भरोसा जताया कि गायों को मध्य प्रदेश में बिल्कुल भी कटने नहीं दिया जाएगा।

तो मध्य प्रदेश विधानसभा में आवारा कुत्तों पर बहस ने नई मिसाल कायम की है। एक तरफ जहां मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को “कुत्ता प्रभारी मंत्री” कहकर विपक्ष ने तंज कसा और उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि ‘सारे कुत्तों से निपटना पड़ता है।’ भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने कहा कि जब सरकार 80 करोड़ लोगों को राशन दे रही है तो कुत्तों की क्या जरूरत, उनकी नस्ल खत्म कर दें। भार्गव सदन के बाहर भी अडिग रहे और बोले कि कुत्तों के काटने से मौतें हो रही हैं तो उनकी आवश्यकता क्या है? दरअसल विधानसभा में पहला मुद्दा ही भोपाल में कुत्तों के बढ़ते हमलों पर था। जहां 2025 में 150 से अधिक मामले दर्ज हुए थे। हालांकि इसी सत्र में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 35 मौतें और छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से 26 बच्चों की मौत पर चर्चा नहीं होने से विपक्ष नाराज है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा कि आवारा कुत्ते महत्वपूर्ण हैं लेकिन 35 परिवारों का दर्द नहीं। उमंग सिंघार ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी त्रासदी पर चर्चा से परहेज किया जा रहा है। यदि आवारा कुत्तों के मुद्दे पर बहस हो सकती है, तो 35 लोगों की मौत पर चर्चा से बचना सरकार की असंवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

तो निश्चित तौर से एक मुस्लिम विधायक द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग एक पब्लिसिटी स्टंट है। क्योंकि केंद्र में भाजपा सरकार, राज्य में भाजपा सरकार और गाय का मुद्दा भी भाजपा का ही है। ऐसे में सरकार को गाय को लेकर बड़ा फैसला करना ही चाहिए। ताकि विपक्ष यह कहने की स्थिति में न रहे कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी गोरक्षक गोपालक और कृष्ण के वंशज हैं, तो कम से कम मध्य प्रदेश में तो गाय को राज्य पशु घोषित कर

वह अपनी प्राथमिकता बता ही सकते हैं। इस दृष्टि से और सकारात्मक नजरिए से हमें यह मानना ही पड़ेगा कि आतिफ अकील का यह पब्लिसिटी स्टंट भी अच्छा है…सरकार गाय को मध्यप्रदेश में राज्य पशु घोषित कर देश को नई दिशा दे सकती है…।

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।