नारी की शक्ति की यह वंदना सराहनीय है…

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नारी की शक्ति की यह वंदना सराहनीय है…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को राजनीतिक इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। यह प्रावधान लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब सरकार का फोकस इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। इसी सिलसिले में 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े पहलुओं पर चर्चा और आगे की रणनीति तय की जाएगी। माना जा रहा है कि ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ इस संसदीय चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा। वास्तव में यह मोदी सरकार के समय हो रही ऐतिहासिक पहल है। अच्छी बात यह है कि विपक्ष भी इस पहल में बराबरी से साथ दे रहा है। ऐसे में देश की आधी आबादी को मिलने वाला एक तिहाई नेतृत्व न केवल देश को सशक्त और समृद्ध करेगा, बल्कि हर राजनीतिक दल को सशक्त और समृद्ध करने में निर्णायक साबित होगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात से सहमत हुआ जा सकता है कि नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ नया इतिहास रचने जा रहा है। यह 21वीं सदी के भारत का अति महत्वपूर्ण निर्णय साबित होने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अप्रैल 2026 को राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि देश की विकास यात्रा के इन अहम पड़ावों के बीच भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक निर्णय लेने जा रहा है। ये निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है। नारी शक्ति वंदन को समर्पित है। यह सम्मेलन देश में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने और विकास की मुख्यधारा में महिलाओं की भागीदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। मोदी ने कहा, ‘2014 में हमारे देश में करोड़ों महिलाएं ऐसी थी, जिन्होंने कभी बैंक का दरवाजा भी नहीं देखा था। हमने जनधन योजना शुरू की, तो देश की 32 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के बैंक खाते खुले। आज हमारी बेटियां नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं। मुद्रा योजना में 60% से ज्यादा लोन महिलाओं ने लिए हैं। देश की स्टार्टअप क्रांति को भी महिलाएं लीड कर रही हैं। आज 42% से ज्यादा रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला डायरेक्टर है। वास्तव में, यह आंकड़े

देश की समृद्ध होती महिलाओं की सफल दास्तां सामने रख रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि 2023 में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया था, तब भी सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसे पास कराया था। तब एक सुर में ये बात भी उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू हो जाना चाहिए। और मोदी ने खुद स्वीकार किया कि खासकर, हमारे विपक्ष के सभी साथियों ने मुखर होकर इस बात पर जोर डाला था कि 2029 में ये लागू हो जाना चाहिए। और अब जब यह चर्चा 2026 में ही हो रही है, तब

यह भारत के जिम्मेदार लोकतंत्र की सुखद तस्वीर को सामने रख रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें लोकतंत्र के दोनों पहिए, सत्ता पक्ष और विपक्ष बराबर के साझेदार हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह स्वीकारोक्ति गर्वित कर रही है कि ‘लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा था। इस विमर्श को करीब 4 दशक बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं। हर दल ने इस विचार को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाया है।’

और यह खुशी की बात है कि ‘राज्यों की विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय 16, 17, 18 अप्रैल है। 2023 में नई संसद में नारीशक्ति वंदन अधिनियम के रूप में प्रथम कदम उठाया गया था। वह समय से लागू हो सके, महिलाओं की भागीदारी हमारे लोकतंत्र को मजबूती दे, इसके लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की तीन दिवसीय विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है। इसके साथ ही हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। एक ऐसा नया इतिहास, जो अतीत की संकल्पनाओं को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। भारतीय लोकतंत्र का यह भाव वास्तव में ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव को चरितार्थ कर रहा है। और नारी की शक्ति की यह लोकतांत्रिक वंदना वास्तव में सराहनीय है… यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तब तक जिंदा रखेगी, जब तक भारत में लोकतंत्र का अस्तित्व रहेगा।

 

 

 

लेखक के बारे में –

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।

वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य

कर चुके हैं।