अवैध धर्मांतरण मामले में तीन लोगों को 2-2 वर्ष की सजा

आरोपी फादर, पास्टर, सेवक को कठोर कारावास और अर्थदण्ड

403
सिंहस्थ-2004

अवैध धर्मांतरण मामले में तीन लोगों को 2-2 वर्ष की सजा

झाबुआ से कमलेश नाहर की रिपोर्ट

झाबुआ.  प्रलोभन देकर अवैध धर्मातरण किए जाने के एक मामलें में सत्र न्यायालय के सत्र न्यायाधीश लखनलाल गर्ग ने फैसला देते हुए तीन आरोपियों को दो-दो वर्ष सश्रम कारावास और 50,000-50,000 हजार के अर्थ दण्ड की सजा सुनाई है।

लोक अभियोजक मानसिंह भूरिया ने बताया की प्रकरण क्रमांक 10/2022 दिनांक 19 जुलाई 2023 को पारित निर्णय अनुसार ग्राम बिसौली निवासी जामसिंह पिता जोगडिया, क्रिश्चन अनसिंह पिता गलिया क्रिश्चन तथा मंगू पिता मेहताब क्रिश्चन को धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 ( विधेयक 2021 ) की धारा-5 के अपराध का दोषी करार देते हुए दो- दो वर्ष सश्रम कारावास एवं 50,000 रूपये का अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। श्री भूरिया ने बताया कि जबरन धर्मातरण मामलें में पहली बार न्यायालय द्वारा सजा सुनाई गई है

वर्ष 2021 का है मामला

लोक अभियोजक मानसिंह भूरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि आवेदक टेटिया पिता हुरू बारिया 26 निवासी ग्राम बिचैली द्वारा आवेदन प्रस्तुत किया गया था कि मेरे गांव में फादर जामसिंह पिता जोगड़िया डिंडोर निवासी बिसौली, मंगु पिता मेहताब भूरिया निवासी मोकमपुरा, पास्टर अनसिंह पिता गलिया निनामा निवासी ग्राम बिसौली हर रविवार को आदिवासी जाति के लोगों का धर्मांतरण करवाता है।

जामसिंह पिता जोगडिया द्वारा बनाए गए प्रार्थना घर ग्राम बिसौली में साप्ताहिक सामूहिक धर्मातरण की सभा में मुझे और श्रीमती सूरती बाई पति क़ोदरीया ग्राम बिसौली को दिनांक 26 दिसंबर 2021 को सुबह लगभग 8 बजे जामसिंह ने बुलाया और ईसाई धर्मांतरण की सभा में बिठाया। मेरे ऊपर जल छिड़काव किया गया और बाईबिल पढ़ी गई। मुझे कहा गया कि तू ईसाई बन जाओगे तो तुम्हारे पूरे परिवार को स्कूल में शिक्षा और हमारी संस्था के अस्पताल में फ्री इलाज मिलेगा। फरियादी ने कहा कि मुझे ईसाई नहीं बनना। यह कहकर फरियादी बाहर आ गया।

उक्त घटना की रिपोर्ट पर आरोपी जामसिंह, मंगू एवं अनसिंह के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना आरोपीगण के मेमोरेण्डम के आधार पर उनके पेश करने पर बाईबिल, अंकसूची, शपथ-पत्र, आरोपी अनसिंह से एक स्टील का लोटा जप्त कर पंचनामें बनाये गए। गवाहों के कथन लेखबद्ध किये गए। विवेचना में आरोपियों का अपराध धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 (विधेयक 2021) की धारा-5 आवश्यक विवेचना उपरान्त पाये जाने पर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा अभियोजन की ओर से परिक्षित साक्ष्य को विश्वसनीय व प्रमाणिक मानकर आरोपियों को कठोर कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

अभियोजन की ओर से प्रकरण का संचालन लोक अभियोजक मानसिंह भूरिया द्वारा किया गया। प्रकरण का अनुसंधान सहायक उपनिरीक्षक प्रेमसिंह परमार द्वारा किया गया।