
Tiger found dead in Jaisinghnagar, Shahdol: पोस्टमार्टम में सभी अंग सुरक्षित, जांच जारी
Shahdol: जिले के Jaisinghnagar वन परिक्षेत्र अंतर्गत एक नर बाघ की मृत्यु का मामला सामने आने के बाद वन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दिया। घटना राजस्व भूमि पर स्थित ग्राम करपा बीट, बनचाचर क्षेत्र की है, जहां बाघ का शव मिलने की सूचना मिलते ही विभागीय अमले ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए भारत सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा निर्देशों के अनुसार तत्काल कार्यवाही प्रारंभ की। बाघ की मौत को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं के बीच विभाग ने हर स्तर पर प्रक्रिया का पालन करते हुए पारदर्शी जांच शुरू की है।

● घटना स्थल सील, डॉग स्क्वाड से की गई गहन छानबीन
वन विभाग को बाघ की मृत्यु की सूचना मिलते ही सबसे पहले घटना स्थल को सुरक्षित किया गया। किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्य नष्ट होने की आशंका को देखते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की गई। इसके बाद डॉग स्क्वाड की सहायता से घटना स्थल और आसपास के इलाके की बारीकी से छानबीन की गई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत प्राकृतिक है या किसी मानवीय हस्तक्षेप का परिणाम।
● विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम, अंग सुरक्षित पाए गए
NTCA Protocol के तहत बाघ का पोस्टमार्टम वन्यजीव विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा किया गया। पोस्टमार्टम टीम में BTR से डॉ. राजेश तोमर और STR से डॉ. अभय सिंगर शामिल रहे। चिकित्सकीय परीक्षण में बाघ के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं, जिससे फिलहाल शिकार या अंग तस्करी जैसी किसी आशंका से इनकार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है।

● वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शवदाह की प्रक्रिया पूरी
निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार बाघ के शव का अंतिम संस्कार भस्मीकरण पद्धति से किया गया। यह पूरी प्रक्रिया मुख्य वन संरक्षक वृत्त शहडोल महेन्द्र प्रताप सिंह, वनमण्डलाधिकारी उत्तर शहडोल तरूणा वर्मा , तहसीलदार सुषमा धुर्वे, ग्राम पंचायत पसोड के सरपंच कृष्णकुमार सिंह, NTCA प्रतिनिधि डॉ. ज्ञानेन्द्र प्रजापति सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में संपन्न हुई। पूरी कार्यवाही की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई है।
● प्रकरण दर्ज, हर पहलू से जांच जारी
वन विभाग ने इस मामले में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है और अग्रिम जांच जारी है। क्षेत्र संचालक BTR अनुपम सहाय (भा.व.से.) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार मामले की निगरानी कर रहे हैं। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि बाघ की गतिविधि हाल के दिनों में जंगल से बाहर तो नहीं थी और क्या किसी प्रकार के अवैध विद्युत तार, जाल या अन्य मानवीय कारण इस घटना से जुड़े हो सकते हैं।
● संवेदनशील क्षेत्र में बाघ संरक्षण पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर बाघ संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे को सामने लाती है। राजस्व भूमि पर बाघ की मौजूदगी यह संकेत देती है कि उसका मूवमेंट जंगल से बाहर तक रहा होगा। ऐसे मामलों में विभाग के लिए चुनौती यह होती है कि बाघों की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में संभावित जोखिम को भी कैसे नियंत्रित किया जाए।
वन विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अवैध गतिविधि पाई जाती है, तो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।





