
दुनिया को अशांत करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं ट्रंप…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले ने एक बार फिर ट्रंप की तानाशाही का उदाहरण पेश किया है। अमेरिका ने न केवल हमला किया है बल्कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाने की बात भी सामने आ रही है।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेज़ुएला की राजधानी काराकास पर अमेरिका ने हमला कर वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को ‘पकड़ लिया है।’ अमेरिका ने कहा है कि निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी के ख़िलाफ़ क़ानूनी मामला चलेगा।अमेरिका की अटॉर्नी जनरल ने बताया है कि न्यूयॉर्क के सदर्न डिस्ट्रिक्ट में मादुरो और उनकी पत्नी के ख़िलाफ़ क़ानूनी मामला चलाया जाएगा। यह पूरी तस्वीर यही बयां कर रही है कि अमेरिका पूरी दुनिया को अशांत करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो चुका है।
वेनेज़ुएला के क़रीबी देश रूस ने कहा है कि अगर यह बात सही साबित हुई तो यह किसी भी देश की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का गंभीर उल्लंघन होगा। वहीं चीन ने कहा है कि एक संप्रभु देश के ख़िलाफ़ अमेरिका के खुलेआम बल प्रयोग और उसके राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ कार्रवाई से वह बहुत हैरान है और इसकी कड़ी निंदा करता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन हमलों में ब्रिटेन की कोई भूमिका नहीं है जबकि अर्जेंटीना ने अमेरिकी कार्रवाई का स्वागत किया है।
इन हमलों के बाद वेनेज़ुएला के रक्षा मंत्री ने पूरे देश में तुरंत मिलिट्री फोर्स तैनात करने की घोषणा की है।
वेनेज़ुएला ने अमेरिकी हमले पर चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है।वेनेज़ुएला के विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान किया जाना चाहिए। वेनेज़ुएला के पड़ोसी देश कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस हमले पर गहरी चिंता जताई है।
उन्होंने लोगों की सुरक्षा के लिए सीमा पर सेना तैनात करने और वेनेज़ुएला के लोगों के कोलंबिया में घुसने की संभावना के मद्देनज़र तैयारी करने का आदेश दिया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वेनेज़ुएला के हालात पर चिंता जताई है।
एक बयान में यूएन ने कहा कि हाल ही में बढ़े तनाव से यूएन के महासचिव बहुत चिंतित हैं, जो आज वेनेज़ुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के साथ ख़त्म हुआ है और इससे क्षेत्र के लिए संभावित चिंताजनक नतीजे हो सकते हैं। यूएन ने कहा, “वेनेजुएला की स्थिति से अलग, ये घटनाएँ एक ख़तरनाक मिसाल कायम करती हैं। महासचिव सभी से अंतरराष्ट्रीय कानून, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है, उनका पूरी तरह से सम्मान करने के महत्व पर ज़ोर देते रहे हैं। उन्हें इस बात की गहरी चिंता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान नहीं किया गया है.”
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा ने अमेरिकी कार्रवाई को एक ”बेहद ख़तरनाक” उदाहरण बताया है।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डा सिल्वा ने चेतावनी दी कि “वेनेज़ुएला के इलाक़े में बमबारी और उसके राष्ट्रपति को पकड़ना एक ऐसी हद पार करना है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता” और “ये हरकतें वेनेज़ुएला की संप्रभुता पर एक बहुत गंभीर हमला है।” उन्होंने इस घटना को “पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक और बेहद ख़तरनाक मिसाल” बताया।
राष्ट्रपति ने आगे कहा, “अंतरराष्ट्रीय क़ानून का खुलेआम उल्लंघन करते हुए देशों पर हमला करना हिंसा, अराजकता और अस्थिरता वाली दुनिया की ओर बढ़ने का पहला क़दम है।”
उन्होंने कहा, “अमेरिका की यह कार्रवाई लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों की राजनीति में दखलअंदाज़ी के सबसे बुरे दौर की याद दिलाती है और इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए ख़तरा है।”
आक्रमण के उद्देश्यों में पवित्रता होती तब निश्चित ही अमेरिका को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा होता। लेकिन अमेरिका के इस विवाद का केंद्र बीते तीन दशकों से ‘तेल’ रहा है। दरअसल, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है, जो कि इस दक्षिण अमेरिकी देश को जबरदस्त तौर पर समृद्ध करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा वेनेजुएला में सोना और गैस के भी भंडार हैं। 1990 के दशक और इससे पहले तक वेनेजुएला की खुली अर्थव्यवस्था में अमेरिका की कंपनियां भी सम्मिलित रही थीं।
दोनों देशों के बीच विवाद की पहली चिंगारी 1999 में भड़की जब वेनेजुएला में वामपंथी राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज की सरकार सत्ता में आई। शावेज ने वेनेजुएला में गरीबी को मुद्दा बनाकर चुनाव जीता और देश के तेल को अपने लोगों की भलाई में लगाने का वादा कर पूरे देश के तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसका असर यह हुआ कि वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका घट गई। इस बीच वेनेजुएला की वाम सरकार ने क्यूबा, रूस और चीन के साथ ईरान से करीबी बढ़ा ली, जो सीधे तौर पर अमेरिका की शक्ति को चुनौती देने के कदम के तौर पर देखा जाने लगा। दोनों देशों के रिश्ते तब और खराब हो गए, जब ह्यूगो शावेज के खिलाफ 2002 में तख्तापलट की असफल कोशिश हुई। वेनेजुएला सरकार ने इसके पीछे तब अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद से दोनों देशों की दूरियां लगातार बढ़ती चली गईं। 2013 में ह्यूगो शावेज की मौत के बाद निकोलस मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति बने। तबसे लेकर अब तक वेनेजुएला की विदेश नीति अमेरिका के प्रति जैसी की तैसी ही बनी हुई है। हालांकि, अमेरिका लगातार वेनेजुएला पर अपने तेल सेक्टर को खोलने का दबाव बनाने के लिए तरह-तरह के प्रतिबंध लगाता रहा है। इससे वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है
पर अब वेनेजुएला की समृद्धि पर सवारी करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जिस तरह अंतर्राष्ट्रीय नियम कानूनों को ताक पर रखकर अपनी धाक जमाने का दुष्प्रयास किया है वह वास्तव में निंदनीय है। इससे साबित हो गया है कि निहित स्वार्थों के चलते पूरी दुनिया को अशांत करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी हद तक जा सकते हैं… यह सभी के लिए बहुत बुरा ही है।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





