ट्विशा शर्मा: भोपाल पुलिस की जांच में कई खामियां?

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ट्विशा शर्मा: भोपाल पुलिस की जांच में कई खामियां?

भोपाल : ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में भोपाल पुलिस की जांच में कई खामियां और सबूतों के रख रखाव में कथित लापरवाही सामने आ रही है। इसके चलते सबूतों को समेटने में सीबीआई को खासी मशक्कत करना पड़ सकती है।

ट्विशा की मौत के 14 दिन बाद सीबीआई ने औपचारिक रूप से इस मामले को अपने हाथों में लिया है। इस मामले में ट्विशा के परिवार ने शुरूआत से ही पुलिस पर लापरवाही बरतने और महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ होने की आशंका जताई थी।

पोस्टमार्टम में देरी और गायब बेल्ट का रहस्य
सूत्रों के मुताबिक, जांच में सबसे बड़ी लापरवाही फांसी के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर सामने आई है। बताया जा रहा है कि ट्विशा की मौत में जिस जिम्नास्टिक बेल्ट का इस्तेमाल किया था, उसे पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को सौंपा ही नहीं गया। यह महत्वपूर्ण बेल्ट पोस्टमार्टम के दो दिन बाद डॉक्टरों को उपलब्ध कराई गई, जिसे अब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है। इस देरी के कारण एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने अभी तक अपनी दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी नहीं की है, जिससे मौत के सटीक समय और कारणों का पता लगाने में फिलहाल रुकावट आ रही है।

क्राइम सीन को नहीं किया सील
बताया जाता है कि पुलिस ने उस घटनास्थल को सील ही नहीं किया जहां ट्विशा का शव मिला था। घटना के तुरंत बाद सबूत जुटाने के बजाय लापरवाही बरती गई, जिससे घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों को नष्ट करने या उनसे छेड़छाड़ करने का घर में रहने वाले सदस्यों को मौका मिलने की आशंका बनी रही।

मौत के बाद पुलिस को जानकारी देने में हुई देरी की भी सीबीआई जांच करेगी। वहीं ट्विशा के परिवार का आरोप है कि ट्विशा की मौत के ठीक बाद पति समर्थ सिंह अस्पताल से सीधे घर लौट आए थे। आशंका है कि इस दौरान घटनास्थल से अहम सबूतों को गायब किया। मुख्य संदिग्ध समर्थ सिंह की 7 दिनों की पुलिस रिमांड मिलने के बावजूद, एसआईटी शुरूआती तीन दिनों में उससे कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी उगलवाने में नाकाम रही।

सीबीआई की जांच इस दिशा में आगे बढ़ेगी
ट्विशा की मौत का असली कारण क्या है? मौत से ठीक पहले के आखिरी घंटों में क्या हुआ था और क्या रिटायर्ड जज गिरिबाला जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही थी? परिवार के भीतर चल रहे विवादों की असली वजह क्या थी और क्या दहेज व वित्तीय लेनदेन के आरोपों में सच्चाई है?