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Utkarsh Award : वैशाली काशीकर को ‘उत्कर्ष संस्था’ का लता मंगेशकर अवॉर्ड!

संस्था ने अब तक रफी की याद में 18 कलाकारों को सम्मानित किया

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Indore : उत्कर्ष संस्था मराठी समाज के साथ जुगलबंदी करके कई सालों से गोल्डन पीरियड के संगीत को रचती आ रही है। स्थापित कलाकारों के साथ नई आवाज़ों को भी यहां मंच मिलता आ रहा है। पिछले कई कार्यक्रमों से इनकी कोरस टीम गाने की प्रस्तुति को एक नई ऊंचाई तक ले गई।

यह संस्था मोहम्मद रफ़ी के नाम से स्थापित ‘रफ़ी अवॉर्ड’ से अब तक देश के 18 कलाकारों को नवाज़ चुकी है। संस्था ने जिस दिन लता मंगेशकर दुनिया से विदा हुई थी, उन्हें भावभीनी स्वरांजलि देते हुए ‘लता मंगेशकर अवॉर्ड’ देने को घोषणा की थी। 25 सितंबर रविवार शाम माई मंगेशकर हाल में पहला लता मंगेशकर अवॉर्ड वरिष्ठ शास्त्रीय और सुगम संगीत गायिका वैशाली काशीकर को दिया गया। रविवार को एक संगीतमय शाम में शहर की संगीत गुरु विख्यात गायिका शुभदा मराठे, प्रसिद्ध संगीतज्ञ विजय गावड़े , उस्ताद बुंदु खां, इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी एवं एमके अग्रवाल के हाथों सम्मान दिया गया।

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संगीत के इस सुमधुर कार्यक्रम
में उत्सवमूर्ति ने कुछ सुरीली ग़ज़लें सुनायी। यह संस्था अपनी प्रस्तुति को अव्वल रखती आई है और ये छायागीत का 75वां भाग था। सोनम व्यास और कोरस ने लताजी की कालजयी रचना वंदे मातरम से कार्यक्रम की शुरुआत की। उसके बाद कई सुरीली रचनाएं प्रस्तुत की गई जिनमें कलाकारों की तैयारी और मंच पर निभाव देखते ही बनता था।

उत्कर्ष संस्था की नवोदित गायिका श्रुति जोशी ने वैशाली जोशी के साथ ‘हंसता हुआ नूरानी चेहरा’ और ‘हमरे गांव कोई आएगा’ बेहतरीन अंदाज में पेश किया। वही संस्था की पुरानी गायिका गा रही स्मिता पानसे और ममता रघुवंशी ने ‘चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है’ और ‘तुमको पिया दिल दिया इतने नाज़ से’ उसी अंदाज में मंच पर सुनाया। अनुभा खड़िलकर और नूपुर पंडित ने अपलम चपलम चपलाई, औ चाँद जहां वो जाए और ‘तेरी महफिल में किस्मत आजमा कर हम भी देखेंगे’ पेश किया। अनुभा ने ‘ठाड़े रहियो’ में चलन और नूपुर ने ‘बैया ना धरो में खरज’ को ख़ूब निभाया। युगल गीत शाम ढले जमुना किनारे, माई री मै का से कहूं पीर और आंखों आंखों में पेश किए, जिन्हें बहुत पसंद किया गया जिसमें राजेंद्र गलगले ने स्वर दिया।

‘आवारा’ के ड्रीम सीक्वेंस घर आया मेरा परदेसी को नूपुर संग कोरस ने प्रस्तुत कर नियत समय पर कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ समाप्त किया। शहर के गणमान्य लोगों के साथ सुधी श्रोताओं ने सुमधुर गीत संगीत का आनंद लिया।गायक कलाकारों को भरपुर दाद दी। कार्यक्रम का संचालन मेघा खानवलकर ने किया।

संगीत संयोजन प्रकाश खानवलकर बैंजो अभिजीत गौड़ की-बोर्ड संग-संगति हेमेंद्र महावर तबला, प्रकाश घोडगांवकर ऑक्टोपैड, योगेश्वर कान्हेरे गिटार, सुधीर कोरान्ने ढोलक और अक्षय चिखलीकर की बोर्ड एवं हारमोनियम पर तो गीतों पर बांसुरी प्रवीण शर्मा और सितार के मनभावन टुकड़े विशाल विश्वकर्मा ने बजाए।