
इंदौर निगम में ‘वंदे मातरम’ पर घमासान: हंगामे के बीच पारित हुआ 8455 करोड़ का बजट, कांग्रेस पार्षद बाहर
राष्ट्रगीत पर विवाद से गरमाया सदन; नारेबाजी के बीच कार्यवाही बाधित, विपक्ष ने बताया व्यक्तिगत इच्छा का विषय
वरिष्ठ पत्रकार के.के. झा की रिपोर्ट
इंदौर। इंदौर नगर निगम के बजट सत्र 2026-27 के दौरान बुधवार को ‘वंदे मातरम’ को लेकर हुए विवाद ने सदन की कार्यवाही को हंगामे की भेंट चढ़ा दिया। करीब 8455 करोड़ रुपए के बजट पर चर्चा के बीच कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम द्वारा राष्ट्रगीत गाने से इनकार के बाद भाजपा पार्षदों ने तीखा विरोध जताते हुए जमकर नारेबाजी की।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पार्षद अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन तक पहुंच गए। माहौल को नियंत्रित करने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने फौजिया अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। कुछ देर बाद वे स्वयं ही सदन से बाहर चली गईं।
सदन के भीतर फौजिया अलीम ने सवाल उठाया कि किस कानून में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किया गया है। वहीं बाहर मीडिया से चर्चा में उन्होंने धार्मिक आधार पर आपत्ति जताई। इस दौरान कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान के बयान ने विवाद को और तूल दे दिया।
घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा का विषय हो सकता है, हालांकि उन्होंने राष्ट्रगीत के सम्मान के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई।
लगातार शोर-शराबे के बीच प्रश्नोत्तर काल बाधित रहा, लेकिन अंततः बहुमत के आधार पर बजट पारित कर दिया गया। सभापति मुन्नालाल यादव ने ‘वंदे मातरम’ के संदर्भ में अमर्यादित भाषा के प्रयोग को गलत ठहराते हुए कार्रवाई को उचित बताया।
गौरतलब है कि एक दिन पहले भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सदन में विवाद हुआ था, जिससे बजट सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। लगातार हो रहे हंगामों के चलते शहर के विकास से जुड़े मूल मुद्दे चर्चा के केंद्र से दूर होते नजर आए।





