Vijayadashmi: रावण मुक्त हो देश, दुनिया और समाज…

Vijayadashmi

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आज राम के इस देश में दशहरा का पर्व है। इसे विजयादशमी भी कहते हैं। दीपावली से बीस दिन पहले आज की दशमी तिथि को ही अच्छाई के प्रतीक राम ने बुराई के पुलिंदा रावण को मारकर यह संदेश दिया था कि आसुरी शक्तियों का बुरा अंत और पराजय होना तय है। और अच्छे, मर्यादा में रहने वाले लोग कितना ही कष्ट क्यों न सह लें लेकिन आखिर में उनकी विजय को कोई रोक नहीं सकता।

कहा जाता है कि आज का दिन अपने अंदर की बुराईयों को राख कर अच्छाईयों को विस्तार देने का संकल्प लेने का दिन है।

करोड़ों लोग हर साल रावण दहन के दिन ऐसा सोचते भी हैं कि इस साल तो अपने अंदर के रावण को जलाकर खाक कर दूंगा और विजयादशमी(Vijayadashmi) के बाद वाली एकादशी के दिन अगर किसी ने भूल से भी अंदर झांक लिया तो बस राम ही राम दिखेंगे लेकिन काश ऐसा हो पाता…।

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आखिर साल निकलने के बाद फिर विजयादशमी (Vijayadashmi)आती है और फिर रावण के बड़े बड़े पुतले जलने लगते हैं, कोई भी बुराई न बच सके सो कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाने में भी कोई कंजूसी नहीं की जाती लेकिन घोर कलियुग है … पैसा कौड़ी भी खर्च हो जाता है और हाथ में है कि कुछ भी नहीं आता। लोग फिर विजयादशमी को उत्सव की तरह मनाते हैं और फिर खुद को हारा हुआ ही पाते हैं।

बच्चों को सीख देने की परंपरा है लेकिन नई पीढ़ी तो जिंदगी को मनोरंजन मानकर ही जिए जा रही है सो नई पीढ़ी तो यह देखकर ही संतोष कर लेती है कि सबसे सुंदर आतिशबाजी कहां की थी और सबसे लंबा रावण, कुंभकरण और मेघनाद का पुतला किस दशहरा मैदान का था। बाकी सब ठीक ठाक।

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पहले तो लोग राम राम कहकर एक दूसरे को अभिवादन के साथ बार-बार राम को याद भी कर लेते थे लेकिन अब तो यह राम राम भी पुरानी पीढी तक सिमट गई है, नई पीढी तो गुड मॉर्निंग कहकर ही सुकून पाती है।

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खैर राम का दिन है सो दो बातें जरूरी हैं। राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। और वहां अब भव्य मंदिर बन रहा है। जो राम को भगवान के रूप में पूजने वाले करोड़ों हिंदुओं के लिए प्रसन्नता का विषय है।

तो बुन्देलखंड की अयोध्या माने जाने वाली ओरछा में राम राजा सरकार का प्राचीन मंदिर है। यहां भगवान राम की मूर्ति को 16वीं शताब्दी में ओरछा की रानी अयोध्या से लेकर आईं थीं। तब से यहां राम को ही राजा मान लिया गया।

मंदिर में पुलिस चौकी स्थापित कर चार बार सलामी देने की परंपरा शुरू हो गई। साथ ही ओरछा में प्रवेश के साथ ही सभी वीआईपी प्रोटोकॉल को शून्य कर दिया गया। ओरछा को राम का दूसरा घर माना जाता है।

मान्यता है कि यहां राम साक्षात स्वरुप में विराजे हैं। अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है तो ओरछा को भी जल्द भव्य स्वरूप मिलेगा, सरकार ने यह तैयारी कर ली है।

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यही प्रार्थना है कि भगवान राम ऐसी कृपा करें कि 21वीं सदी के 21वें साल में सबके अंदर के रावण यानि बुराईयां जलकर खाक हो जाएं।

आसुरी शक्तियों के प्रतीक आतंकवादी पूरी तरह से नष्ट हो जाएं और आतंक का सफाया हो। कोरोना राक्षस का अंत हो। महंगाई की मार से लोगों को निजात मिल सके।

सभी को रोजगार मिले। सबके भीतर से अहंकार का खात्मा हो। समाज अपराधमुक्त हों। बेटियों का सम्मान उत्तरोत्तर बढ़ता रहे। भ्रष्ट आचरण से निजात मिले।

प्रेम, सौहार्द और सदभाव का प्रभाव समाज में दिन दूना और रात चौगुना बढ़ता रहे। सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों, सभी सुंदरता से परिपूर्ण हों, दुःख किसी के भी हिस्से में न बचे।

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एक और बात कि मध्यप्रदेश में लोकतंत्र का उत्सव विजय पर्व के बाद तेजी पकड़ने वाला है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की सभाओं के कार्यक्रम जारी हो चुके हैं।

दूसरे स्टार प्रचारकों के कार्यक्रम भी रहेंगे। मध्यप्रदेश के आकाश में उड़नखटोले बिना वैमनस्यता के बड़ी संख्या में मंडराते नजर आएंगे। मतदाता के मन हिचकोले खाते रहेंगे।

भाजपा आज विजय संकल्प दिवस मनाएगी। यही कामना है कि राजनीति पूरी तरह से वैमनस्यता से मुक्त हो और लोकतंत्र का उत्सव सभी तरह की बुराईयों से मुक्त हो सके।

khusal kishore chturvedi
कौशल किशोर चतुर्वेदी

कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के जाने-माने पत्रकार हैं। इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में लंबा अनुभव है। फिलहाल एसीएन भारत के स्टेट हेड हैं। इससे पहले स्वराज एक्सप्रेस (नेशनल चैनल) में विशेष संवाददाता, ईटीवी में संवाददाता,न्यूज 360 में पॉलिटिकल एडीटर, पत्रिका में राजनैतिक संवाददाता, दैनिक भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ, एलएन स्टार में विशेष संवाददाता के बतौर कार्य कर चुके हैं। इनके अलावा भी नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित विभिन्न समाचार पत्रों-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन किया है।