
चारों ओर दीवारें, भीतर विवाद: आनंदपुर ट्रस्ट की जमीन को लेकर क्यों उठ रहे हैं गंभीर सवाल?
Ashoknagar: जहां तक नजर जाती है, वहां तक ऊंची बाउंड्रीवॉल और उसके ऊपर तारों की फेंसिंग। यह दृश्य किसी किले या औद्योगिक परिसर का नहीं, बल्कि अशोकनगर जिले में स्थित आनंदपुर ट्रस्ट परिसर का है। यह दीवारें केवल एक आश्रम को नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों की जमीन को भी अपने भीतर समेटे हुए प्रतीत होती हैं। इसी को लेकर अब आनंदपुर ट्रस्ट एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है।
▪️ग्रामीणों और किसानों के दावे
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रस्ट ने 30 से अधिक गांवों की जमीन को अपनी बाउंड्रीवॉल के भीतर शामिल कर लिया है। इनमें निजी कृषि भूमि के साथ-साथ श्मशान, चरनोई भूमि, नाले और तालाब जैसी सामुदायिक जमीनें भी शामिल होने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन खेतों पर वे पीढ़ियों से खेती करते आए, अब उन्हीं जमीनों पर वे मजदूरी करने को मजबूर हो गए हैं।

जमडेरा गांव के प्रेमसिंह आदिवासी का दावा है कि उनकी 18 बीघा पैतृक जमीन में से कुछ हिस्सा ट्रस्ट के घेरे में चला गया। ईसागढ़ क्षेत्र के दिनेश गुर्जर और अशोक अहिरवार जैसे लोगों का कहना है कि सीमांकन के बावजूद वर्षों से उनकी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
▪️ट्रस्ट का पक्ष
आनंदपुर ट्रस्ट प्रबंधन इन आरोपों को खारिज करता है। ट्रस्ट से जुड़े महात्मा शब्द सागरानंद का कहना है कि ट्रस्ट के पास लगभग 9000 बीघा से अधिक भूमि का वैध राजस्व रिकॉर्ड मौजूद है। उनका दावा है कि यह जमीन वर्षों से राजस्व विभाग में दर्ज है और किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं किया गया है। ट्रस्ट के अनुसार परिसर के भीतर स्थित सभी संरचनाएं और गतिविधियां कानूनी जमीन पर ही संचालित हैं।
▪️राजस्व रिकॉर्ड क्या कहते हैं
राजस्व विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पूर्व में हुई लगान गणना और जांच के दौरान ट्रस्ट के नाम लगभग 2000 हेक्टेयर से अधिक भूमि दर्ज पाई गई थी, जिसे बीघा में लगभग 9500 से 9750 बताया गया। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वास्तविक घेराबंदी इससे कहीं अधिक क्षेत्र में फैली हुई है, और इसी अंतर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
▪️प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता
यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा। प्रशासनिक स्तर पर भी यह विषय संवेदनशील माना जा रहा है। कुछ मामलों में श्मशान भूमि को मुक्त कराए जाने की कार्रवाई भी सामने आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हर भूमि विवाद समान नहीं है और प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच आवश्यक है।
▪️आश्रम के भीतर पूरा तंत्र
आनंदपुर आश्रम परिसर के भीतर ग्राम पंचायत, पोलिंग बूथ, पोस्ट ऑफिस, बस स्टैंड, अस्पताल, एंबुलेंस और भारी मशीनें मौजूद हैं। एक समय में यहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और सुरक्षा के लिए निजी बाउंसरों की तैनाती की भी चर्चा होती है। यह सब मिलकर इस परिसर को सामान्य आश्रम से अलग और प्रभावशाली बनाता है।
▪️और अंत में
आनंदपुर ट्रस्ट को लेकर उठ रहे सवाल फिलहाल आरोप और दावों के स्तर पर हैं, जिनका अंतिम सत्य प्रशासनिक और न्यायिक जांच के बाद ही सामने आ सकता है। एक ओर जहां ग्रामीण अपनी जमीन और अधिकारों को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट अपने वैध दस्तावेजों का हवाला दे रहा है। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन और सार्वजनिक जांच के माध्यम से तथ्यों को स्पष्ट किया जाए, ताकि भ्रम, तनाव और अविश्वास की स्थिति समाप्त हो सके।





