मध्यप्रदेश आदर्श स्वास्थ्य मानकों को प्राप्त कर ले… उम्मीद यही है…

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मध्यप्रदेश आदर्श स्वास्थ्य मानकों को प्राप्त कर ले… उम्मीद यही है…

कौशल किशोर चतुर्वेदी
स्वास्थ्य सेवाओं पर 26 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश विधान सभा में चर्चा हुई। कांग्रेस ने अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया। इसके अलावा दवाओं की कालाबाजारी, बड़ी बीमारियों का इलाज अस्पतालों में नहीं होने की बात भी सदन में उठी। बिना ड्राइवर के एम्बुलेंस का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा भी सदस्यों ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान आकर्षित कराया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जल्द ही सीएम केयर योजना शुरू हो रही है। इसमें सभी बड़ी बीमारियों का इलाज प्रदेश में होगा। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग राजेन्द्र शुक्ल ने विधानसभा लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग की अनुदान मांगों पर सदन के सदस्यों की चर्चा उपरांत वक्तव्य में कहा कि सभी सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रयास है कि मध्यप्रदेश आदर्श स्वास्थ्य मानकों को प्राप्त करे। इसके लिए प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सकों और विशेषज्ञों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए नवीन मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। विगत 2 वर्षों में प्रदेश में लगभग 1000 एमबीबीएस एवं 1 हजार पीजी सीटों की वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र के सशक्तीकरण के लिए निजी सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। धार, कटनी, बैतूल और पन्ना में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए एलओए जारी किए जा चुके हैं। कुल 13 जिलों में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना प्रगतिरत है। शीघ्र ही हर लोकसभा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज संचालित होंगे। इससे आगामी समय में पर्याप्त चिकित्सक और विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे।अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण के साथ चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। विगत 2 वर्षों में प्रदेश में 4 हजार चिकित्सक एवं विशेषज्ञ की भर्ती हुई है। सीएम केयर योजना में सभी मेडिकल कॉलेज में उच्च स्तरीय तृतीयक सेवाओं हार्ट, किडनी, लिवर और अन्य महत्वपूर्ण ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित ट्रॉमा सेंटर सशक्तीकरण के प्रावधान किए जा रहे हैं। अंगदान और देहदान प्रोत्साहन से प्रदेश में अंगदान के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है। योजना के क्रियान्वयन से अब तक 1700 नागरिकों ने अंगदान की सहमति दी है। मध्यप्रदेश सरकार प्रिवेंटिव, क्यूरेटिव और जेरियाट्रिक तीनों क्षेत्रों में फोकस के साथ कार्य कर रही है। निरोगी काया अभियान, स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान, स्वस्थ यकृत मिशन, टीबी मुक्त भारत अभियान, सिकल सेल उन्मूलन मिशन इन सभी अभियानों मध्यप्रदेश देश के अग्रणी रहा है। उन्होंने समस्त जनप्रतिनिधियों से स्वास्थ्य क्षेत्र की सेवाओं और अभियानों से अधिक से अधिक नागरिकों को लाभान्वित करने के लिए जनप्रतिनिधियों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
प्रदेश में विगत वर्षों में शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र में मैदानी कार्यकर्ताओं आशा और एएनएम की सक्रिय भागीदारी से हर गर्भवती महिला का पंजीयन सुनिश्चित कर नियमित एएनसी जांच की जा रही है जिससे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। अभी भी इस क्षेत्र में जागरूकता आवश्यक है। परिजन को जागरूक और संवेदनशील बनाना होगा जिससे हाई रिस्क प्रेगनेंसी का समय से चिन्हांकन और उपयुक्त उपचार का सुव्यवस्थित प्रबंधन किया जा सके।वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में सरकार द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। वृद्धजनों के लिए जिला चिकित्सालयों में 10 बिस्तरीय जेरियाट्रिक वार्ड / बेड चिन्हित किये गये है। जनवरी 2026 से होप कार्यक्रम के तहत निःशक्त एवं चलने-फिरने में असमर्थ वृद्धजनों को घर पर नर्सिंग देखभाल दी जा रही है। प्रशिक्षित नर्सिंग अधिकारी व आशा कार्यकर्ता भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा व उज्जैन में 2923 वृद्धजन पंजीकृत कर चुके हैं। आयुष्मान वय वंदना अंतर्गत 14.85 लाख कार्ड बनाए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल के वक्तव्य उपरांत विधानसभा ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की 22 हजार 362 करोड़ 57 लाख रुपए की अनुदान मांगों को पारित किया।
मध्यप्रदेश के हर नागरिक की यही उम्मीद है कि स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो जाएं। सरकार और मंत्री के दावों को झुठलाया नहीं जा सकता, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में आदर्श स्थिति लाने की बात फिलहाल प्रदेश के आम आदमी को भी हजम नहीं हो सकती। सिस्टम में व्याप्त गड़बड़ियां कहीं न कहीं सरकार के दावों को धुंधला करती नजर आती हैं। और
गड़बड़ियां सुधर जाएं और व्याप्त संसाधन पूरी तरह से आम नागरिक के स्वास्थ्य पर पूरी तरह से फोकस कर सकें तो आदर्श व्यवस्थाओं की कल्पना सच साबित हो सकती है। उम्मीद यही करते हैं कि एक दिन मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं आदर्श मानकों को स्थापित कर आम नागरिक को हतप्रभ कर देंगी।…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश‌ संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।