When Judge Got Angry at IPS : जज से जिरह करना IPS अफसर को महंगा पड़ा, 2 घंटे कोर्ट में हिरासत में खड़ा रहना पड़ा!

जज के सामने पेश होने के दौरान कुर्सी पर बैठ गए और जज के सामने अपनी बात पर अड़े!

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When Judge Got Angry at IPS

When Judge Got Angry at IPS : जज से जिरह करना IPS अफसर को महंगा पड़ा, 2 घंटे कोर्ट में हिरासत में खड़ा रहना पड़ा!

Jaipur : सेशन कोर्ट परिसर में एक अजीब घटनाक्रम हुआ। एक जज ने एक आईपीएस अफसर को जमकर फटकार लगा दी। इतना ही नहीं जज ने आईपीएस को हिरासत में लेने के निर्देश दे दिए। जज ने चालानी गार्ड बुलाकर आईपीएस को हिरासत तक में सौंप दिया। करीब दो घंटे तक आईपीएस अफसर चालानी गार्डों की हिरासत में रहे। लंच के बाद जब आईपीएस अफसर ने अपनी गलती स्वीकार की, तो कोर्ट ने उन्हें माफ कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम को कोर्ट परिसर में मौजूद दर्जनों वकीलों और अन्य लोगों ने देखा। एक आईपीएस अफसर को पुलिस हिरासत में लिए जाने पर खूब चर्चाएं हुई।

When Judge Got Angry at IPS : जज से जिरह करना IPS अफसर को महंगा पड़ा, 2 घंटे कोर्ट में हिरासत में खड़ा रहना पड़ा!

यह मामला जयपुर महानगर (प्रथम) कोर्ट का है। हनुमानगढ़ के एसपी अरशद अली को कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था। ऐसे में वे कोर्ट में हाजरी देने के लिए हनुमानगढ से जयपुर आए थे। जज के सामने पेश होने के दौरान वे कुर्सी पर बैठ गए। जज कल्पना पारीक ने उनसे सवाल किए, तो एसपी ने बैठे बैठे ही जवाब दिए। सवाल जवाब के दौरान एसपी अरशद अली ने जज द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यहां बुलाने के बजाय वीसी के जरिए ही पेश हो सकता था।

एसपी के रवैये से जज कल्पना पारीक नाराज हो गई। उन्होंने एसपी को हिदायत दी, तो भी एसपी अपनी बात को सही बताने पर अड़े रहे। ऐसे में जज को गुस्सा आ गया और उन्होंने चालानी गार्ड बुलाकर एसपी को हिरासत में लेने के आदेश दे दिए। दरअसल जज पिछले एक साल से एसपी को बयान दर्ज कराने के लिए तलब कर रही थी। लेकिन, एसपी बयान दर्ज कराने नहीं आ रहे थे। ऐसे में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करके तलब किया गया था।


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पुलिस हिरासत में 2 घंटे खड़े रहे

आईपीएस अशरद अली करीब दो घंटे तक पुलिस जवानों की हिरासत में खड़े रहे। कोर्ट परिसर में जज के चैंबर के बाहर उन्हें खड़ा रहना पड़ा। करीब दो घंटे तक लोग वहां से गुजरते रहे और एसपी को चालानी गार्डों से घिरा हुआ देखकर चौंकते रहे। इस दौरान लंच हो गया। लंच का समय पूरा होने पर कोर्ट में जज तक संदेश पहुंचाया कि एसपी अपनी बात कहना चाहते हैं। इसके बाद जज ने एसपी को कोर्ट में बुलाया और बोलने की अनुमति दी। इस दौरान एसपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें खेद है कि उन्होंने कोर्ट के आदेश मानने के बजाय अपनी बात पर अड़े रहे। भविष्य में ऐसा व्यवहार नहीं करने का आश्वासन दिया। इसके बाद जज ने उनके प्रति नरमी बरती और सरकारी एडवोकेट से बयान दर्ज करने के आदेश दिए।

तबीयत खराब होने का हवाला दिया तो कुर्सी मिली

जज के चेंबर में सरकारी वकील को बयान दर्ज करने के दौरान एसपी अरशद अली ने कहा कि उनकी तबीयत थोड़ी खराब है। उन्हें थकान और घबराहट सी हो रही है। एसपी ने कुर्सी पर बैठने की अनुमति मांगी तो जज कल्पना पारीक ने कुर्सी पर बैठने की अनुमति दे दी। इसके बाद एसपी ने कुर्सी पर बैठकर अपने बयान दर्ज कराए। करीब आधे घंटे तक उन्होंने अपने बयान एडवोकेट के समक्ष दर्ज कराए।

प्रकरण एसपी की ओर से दर्ज कराया गया था

हनुमानगढ एसपी अरशद अली जब एसओजी में एडिशनल एसपी थे। तब उन्होंने एक प्रकरण दर्ज कराया था। उन दिनों एसओजी की ओर से की गई कार्रवाई में प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन के अवैध व्यापार का खुलासा किया गया था। एसओजी की ओर से आरोपी सतीश, बद्री प्रसाद, रमाकांत, जुगल किशोर, शिवहरि, सुनील और मुन्ना कुमार के खिलाफ चालान भी पेश किया था। चूंकि इस मामले में आईपीएस अरशद अली परिवादी थे। ऐसे में उनके बयान होना जरूरी थे। कोर्ट ने वर्ष 2019 में उन्हें बयान देने के लिए बुलाया लेकिन वे नहीं आए। करीब एक साल पहले कोर्ट ने एसपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए लेकिन पुलिसकर्मियों ने तामिल भी नहीं करवाया। अब उनके बयान दर्ज किए गए हैं।