Friday, November 22, 2019

Blog

हेमंत पाल

तीन दशक से ज्यादा समय से पत्रकारिता में संलग्न। नवभारत, नईदुनिया (इंदौर, भोपाल) और जनसत्ता (मुंबई) में कार्य किया। नईदुनिया में लम्बे समय तक चुनाव डेस्क प्रभारी। राजनीतिक और फिल्म और टीवी पत्रकारिता में परीचित नाम। देशभर के अखबारों और पत्रिकाओं में लेखन। राजनीतिक और फिल्म स्तंभकार। फिलहाल 'सुबह सवेरे' के इंदौर संस्करण में स्थानीय संपादक।


संपर्क : 9755499919

भाजपा को झाबुआ की हार से कुछ सीखना चाहिए!

मीडियावाला.इन। भारतीय जनता पार्टी के साथ सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि उसे चुनावी हार बर्दाश्त नहीं होती! पार्टी के नेताओं में इतना ज्यादा आत्मविश्वास घर कर गया है, कि उन्हें चुनाव की रणनीति बनाते...

झाबुआ में भाजपा को बाहरी नेताओं की 'मनमानी' ने हरवाया!

झाबुआ में भाजपा को बाहरी नेताओं की 'मनमानी' ने हरवाया!

मीडियावाला.इन। अपनी राजनीतिक जागरूकता और बड़े उलटफेर के कारण झाबुआ हमेशा चर्चा में रहा है। इस बार भी यहाँ वही सब हुआ! झाबुआ उपचुनाव का  नतीजा अप्रत्याशित नहीं रहा। वही हुआ जिसका अनुमान लगाया गया था। वास्तव में ये...

मिलावटी सामान से भरा बाजार, पकड़-धकड़ का पाखंड!

मिलावटी सामान से भरा बाजार, पकड़-धकड़ का पाखंड!

मीडियावाला.इन।                                                 खाद्य विभाग और प्रशासन को नकली मिठाई और मावा त्यौहार के नजदीक आते ही दिखाई देता है! ऐसा साल में दो या तीन बार ही होता है! लेकिन, त्यौहार के बाद सारी सख्ती नदारद हो जाती है! सरकार किसी...

झाबुआ उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए 'अहम्' का मुद्दा!

झाबुआ उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए 'अहम्' का मुद्दा!

मीडियावाला.इन।   झाबुआ में चुनाव प्रचार थम गया! उपचुनाव के लिए दोनों प्रमुख प्रतिद्वंदी पार्टियों की सारी कवायद पूरी कर ली! बाकी जो प्रबंधन बचा है, वो आज रात पूरा हो जाएगा! कांग्रेस और भाजपा दोनों ने चुनाव जीतने...

गोपाल भार्गव के चुनावी भाषण के निहितार्थ समझिए!

गोपाल भार्गव के चुनावी भाषण के निहितार्थ समझिए!

मीडियावाला.इन। भाजपा के कुछ नेताओं ने कमलनाथ सरकार गिराने का शिगूफा छोड़कर ख़बरों में छाए रहने का अचूक फार्मूला ढूंढ लिया है! वे जानते हैं कि राजनीति के मंच से बोली गई, ये लाइनों के सुर्खियां बनने में देर...

कीर्तिमान बनना था पौधरोपण का, बन गया घोटाले का!

कीर्तिमान बनना था पौधरोपण का, बन गया घोटाले का!

मीडियावाला.इन।शिवराजसिंह की भाजपा सरकार ने मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के किनारों पर पौधारोपण करके विश्व कीर्तिमान बनाने का दावा किया गया था। 2 जुलाई 2017 को एक दिन में 7 करोड़ 10 लाख से ज्यादा पौधे लगाकर 'गिनीस बुक ऑफ़...

अनुशासन की बागड़ लांघते कांग्रेस के मंत्री!

अनुशासन की बागड़ लांघते कांग्रेस के मंत्री!

मीडियावाला.इन।  राजनीति में वैसे तो अनुशासन का कोई मतलब नहीं होता! ये सिर्फ कहने की बात होती है। अब वो समय भी नहीं बचा, जब राजनीति में अनुशासन को गंभीरता से लिया जाता हो! ये बात आजकल कांग्रेस...

'मधु' की चाह में लार टपकाती राजनीति और नौकरशाही!

'मधु' की चाह में लार टपकाती राजनीति और नौकरशाही!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश की राजनीति और नौकरशाही आजकल जिस्मानी लालच की पीड़ा भोग रही है! ये जानते हुए कि ये घृणित लालच वक़्त आने पर ब्याज समेत वसूली करता है, फिर भी लोग इसके मोहपाश से मुक्त नहीं होते! होना...

उम्मीदवार के नाम से तय होगी झाबुआ में जीत!

उम्मीदवार के नाम से तय होगी झाबुआ में जीत!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य में कभी ऐसे राजनीतिक हालात नहीं बने कि दोनों प्रमुख पार्टियों को एक-एक सीट के लाले पड़े हों! सरकार बनाने वाली कांग्रेस भी बहुमत के किनारे पर है! ऐसे में झाबुआ सीट के लिए...

गुटबाजी की गर्मी से दोफाड़ होती कांग्रेस !

गुटबाजी की गर्मी से दोफाड़ होती कांग्रेस !

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब लगा था कि पार्टी के तीनों क्षत्रप सामंजस्य से पाँच साल सरकार चला लेंगे! शुरू में ऐसा लगा भी, पर धीरे-धीरे सामंजस्य का शिखर दरकने लगा! क्षत्रप खुद तो दिल की...

उमंग के इस राजनीतिक दुस्साहस के निहितार्थ को समझिए!

उमंग के इस राजनीतिक दुस्साहस के निहितार्थ को समझिए!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश में धार जिले की धारदार राजनीति हमेशा चौंकाती रही है! न सिर्फ कांग्रेस में, बल्कि भाजपा में भी इस जिले से कई मुखर नेता निकले! लेकिन, किसी ने भी अपनी पार्टी का नुकसान करने और राजनीतिक बदतमीजी...

अध्यक्ष के लिए सिंधिया का नाम आने पर किसके पेट में दर्द उठा?

अध्यक्ष के लिए सिंधिया का नाम आने पर किसके पेट में दर्द उठा?

मीडियावाला.इन।  इन दिनों मध्यप्रदेश की कांग्रेस में घमासान मचा है। प्रदेश में पार्टी के नए मुखिया का नाम तय होना है, जो आसान नहीं लग रहा! प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है! ऐसी स्थिति में एक सर्वमान्य...

पुलिस की रेवड़ में काली भेड़ों को ढूंढने की जरुरत!

मीडियावाला.इन। आम आदमी के जहन में बरसों से पुलिस को लेकर एक ख़ास छवि रही है। लोग मानते हैं कि पुलिस सभ्य लोगों की मदद के लिए नहीं होती! क्योंकि, सभ्य लोग पुलिस से डरते...

अब वही उद्योगपति आएगा, जो निवेश साथ लाएगा!

अब वही उद्योगपति आएगा, जो निवेश साथ लाएगा!

मीडियावाला.इन। शिवराज-सरकार के कार्यकाल में पाँच इन्वेस्टर्स समिट हुए! लेकिन, सब बेनतीजा रहे! इन समिट में लाखों करोड़ के एमओयू पर दस्तखत हुए, पर कोई भी निवेश जमीन पर नहीं उतरा! क्योंकि, इन इंवेस्टर्स समिट के प्रति सरकार गंभीर...

कभी नहीं देखा होगा आत्मविश्वास का ये अंदाज!

कभी नहीं देखा होगा आत्मविश्वास का ये अंदाज!

मीडियावाला.इन। कमलनाथ की अपनी एक राजनीतिक शैली है, जो अमूमन राजनीतिकों में बहुत कम देखी जाती है! वे कम बोलते हैं, बेवजह बयानबाजी नहीं करते! कभी किसी ने उन्हें खुलकर ठहाके लगाते नहीं देखा! उनके...

बड़बोले भाजपा नेताओं को सत्ता पाने की इतनी बेताबी क्यों?

बड़बोले भाजपा नेताओं को सत्ता पाने की इतनी बेताबी क्यों?

मीडियावाला.इन। 'जिस दिन बॉस इशारा करेंगे, कमलनाथ सरकार गिरा देंगे!' इस तरह के बड़बोले बयानबाज भाजपा नेताओं की अब बोलती बंद है! उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनके दड़बे में सैंध कैसे लग गई! जिन लोगों...

सिनेमा के परदे पर हर दौर में छाया पुनर्जन्म!

सिनेमा के परदे पर हर दौर में छाया पुनर्जन्म!

मीडियावाला.इन। हिंदी सिनेमा का इतिहास बताता है कि समय, काल और परिस्थिति के साथ-साथ दर्शकों की पसंद भी बदलती रही! जब फ़िल्में बनना शुरू हुई,तो धार्मिक फ़िल्में ही ज्यादा बनी! धर्मग्रंथों के छोटे-छोटे प्रसंगों को आधार...

दुखी जनता को 'आनंद' देने के सरकारी प्रपंच!

दुखी जनता को 'आनंद' देने के सरकारी प्रपंच!

मीडियावाला.इन। मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार अपनी पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के कुछ बोझ बेवजह ढो रही है! उन्हीं में से एक है 'आनंद संस्थान!' भूटान की नक़ल से बने इस ख़ुशी के फॉर्मूले को प्रदेश की शिवराज सरकार ने अपनाया...

भाजपा में आचरण की ये गंदगी कहाँ से आई?

भाजपा में आचरण की ये गंदगी कहाँ से आई?

मीडियावाला.इन। राजनीति में शुचिता, संस्कार और मर्यादा की सबसे ज्यादा बात भाजपा ही ज्यादा करती रही है। ये जानते हुए भी कि ये संभव नहीं है! देशभर में ऐसी कई घटनाएं हुई जिनसे सामने आया कि भाजपा के...

मध्यप्रदेश के विकास के छद्म आभामंडल का सच!

मीडियावाला.इन।  मध्यप्रदेश के विकास के दावे छद्म और झूठे हैं। दिखाने के लिए विकास के नाम पर सड़कें, पुल और पुलिया दिखाई जाती है! जबकि, किसी राज्य का वास्तविक विकास प्रति व्यक्ति आय, गरीबी का अनुपात, ऊर्जा की...