Monday, December 10, 2018
माण्डू , बेस्ट हेरिटेज सिटी अव इंडिया

माण्डू , बेस्ट हेरिटेज सिटी अव इंडिया

इन दिनों मध्यप्रदेश में सफ़ाई में आगे रहने की होड़ लगी हुई है , इंदौर और भोपाल पूरे देश में सबसे साफ़ सुथरे शहरों की गिनती में पहले और दूसरे नम्बर पर आए हैं , तो हाल ही में महाकालेश्वर मंदिर को सबसे साफ़ रहने वाले धर्मस्थल के रूप में पुरस्कृत किया गया है , मुझे ये जान के सुखद आश्चर्य हुआ की माण्डू को अहमदाबाद के साथ UNESCO ने बेस्ट वर्ल्ड हेरिटेज सिटी घोषित किया है | धार जिले के अंतर्गत आने वाले इस पर्यटन स्थल की शोभा ही निराली है | कहते हैं कि भूमि दुर्ग के रूप में ये एशिया का सबसे बड़ा फ़ोर्ट है जो लगभग 23 कि मी की परिधि में फैला हुआ है | हमारे साथ जो गाइड इस सफ़र के दौरान थे श्री विश्वनाथ तिवारी उन्हें भी बेस्ट गाइड का अवार्ड मिल चुका है | परमार शासकों के समय माण्डू का विकास हुआ , कहते हैं जहाज़ महल का निचला हिस्सा तो उस समय ही बन गया था , राजा भोज और उनके सिंहासन की कहानियाँ किसने ना सुनी होंगी ये माण्डू उन्ही परमार शासकों के दौरान विकसित हुआ , इसकी कई इमारतें जैसे दीवाने ख़ास की दीवारों पर आज भी फूल और पत्तियों की आकृतियाँ मिलती हैं | दीवाने ख़ास को जिसकी यह विशेषता है की , अंदर कैसी भी आवाज़ हो बाहर सुनाई नहीं देगी उसे देखकर ही महसूस होता है की बाद में अफ़ग़ानी कला की शक्ल देने के लिए बाहरी दीवार मेहराब के रूप में अलग से बनायी गयी होगी | परमार काल के बाद माण्डू गौरी और ख़िलजी सुलतानों की रियासत रहा है जो वास्तव में थे तो दिल्ली सल्तनत के गवर्नर पर कालांतर में ख़ुद शासक बन बैठे इनमे से कुछ जो कलाप्रेमी और संगीत के मर्मज्ञ थे , उनसे ही मांडू का विस्तार हुआ , मुझे ये यक़ीन करने में बड़ी दिक़्क़त हुई की कभी माण्डू में नौ लाख लोग रहा करते थे , पर जब तिवारी जी ने बताया की तूजके जहांगीरी और फ़रिश्ता की डायरी में इसका ज़िक्र है तब मुझे यक़ीन करना पड़ा | माण्डू में पुरातत्व की विरासत बड़ी सम्हाल कर रखी गयी हैं ASI इसके लिए बधाई की पात्र है और तिवारी जी जैसे निवासी भी जिन्हें मैं देख रहा था की हमें ये सब विवरण बताते बताते जब कभी रास्ते में गुटका या चिप्स का ख़ाली पेकेट देखते चुपचाप उठा कर जेब में रख लेते |

 

               

 

माण्डू में अनेक इमारतें हैं जो आज भी देख कर आप पुरातन काल में उसकी भव्यता की कल्पना कर सकते हो | माण्डू में वास्तु कला का अद्भुत प्रयोग आप देख सकते हो | पानी के प्रबंध , रौशनी और हवा का वेंटीलेशन के रूप में उपयोग को देख कर आप चमत्कृत रह जाते हो | जहाज़ महल जिसकी आकृति ऐसी है की आपको लगेगा आप किसी जहाज़ पर खड़े हो या अशर्फ़ी महल जो वास्तव में कभी पुस्तकालय था और बाद में नवाब की बेगमों का वज़न घटाने के लिए प्रयोग किया जाता था ( कहते हैं जो बेगम सफलता पूर्वक सारी सीढ़ियाँ चढ़ जाती उसे अशर्फ़ी मिला करती थी ) , दीवाने ख़ास , हिंडोला महल जैसी अनेक इमारतें है जो वास्तु कला का अद्भुत नमूना हैं और फिर बाज बहादुर का महल और रानी रुपमती का महल भी है जिनके प्रेम के क़िस्से पर बॉलीवुड ने फ़िल्म भी बनाई है | मेरी पुरानी पदस्थापना के क़िले राजगढ़ के सारंगपुर में रुपमती की क़ब्र आज भी है | सच कहें तो आज माण्डू आने वाले पर्यटक बाक़ी चीज़ों के बाद रुपमती और बाज़ बहादुर के क़िस्से और उनके प्रेम की दास्ताँ ज़रूर सुनना चाहते हैं और गाइड कल्पना का तड़का लगा लगा के जो कुछ भी सम्भव हो अवश्य सुना देते हैं | बाज़ बहादुर प्रसिद्ध गायक और संगीतकार था जिसे रागों का बड़ा ज्ञान था और राग दीपक गाने में वो उस्ताद था , अपने शासन काल में उसे रुपमती का पता चला जो बड़े मधुर कंठ की मालिक और बड़ी

 

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आनंद कुमार शर्मा

आनन्द शर्मा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं, वर्तमान में आयुक्त अनुसूचित जाति विकास मध्य प्रदेश शासन के पद पर पदस्थ और कविता, फ़िल्म समीक्षा, यात्रा वृतांत आदि अनेक विधाओं में फ़ेसबुकीय लेखन| विशेष तौर पर मीडिया वाला के लिए ताज़ा फ़िल्म समीक्षा