Monday, October 22, 2018
श्राद्ध पक्ष अपने पुरखों के प्रति श्रद्धा तक सीमित नहीं 

श्राद्ध पक्ष अपने पुरखों के प्रति श्रद्धा तक सीमित नहीं 

हाल ही में हिन्दू धर्म का श्राद्ध पक्ष समाप्त हुआ।  प्रत्येक धर्म-पंथ में ऐसे अवसर, प्रसंग, पररंपराएं होती हैं , जब आप अपने परिवार के उन पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद कर सकते हैं, जो परलोक सिधार चुके हैं। ऐसा ही एक मौका है हिंदू धर्मावलंबियों के लिये श्राद्ध पक्ष का। आम तौर पर यही माना जाता है कि इन 15 दिनों में विक्रम संवत् या पंचांग तिथि कैलेंडर के मान से हम अपने दिवंगत पूर्वज का आह्वान कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा जाहिर करते हैं। बेशक, ऐसा काफी हद तक है भी, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है, बल्कि इससे आगे बढक़र यह एक ऐसी परंपरा या विधि है, जिसमें आप अपने प्रत्येक चिर-परिचित, नजदीक-दूर के रिश्तेदार के अलावा विभिन्न स्तर पर अपने आत्मीयजन, मित्र-परचित तो ठीक नितांत अजबनी और अपरिचित लेकिन आपके दिल-दिमाग में जिसकी स्मृति और नेह-आदर भाव दर्ज है, उसे भी याद कर सकते हैं। 

देश-दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की तरह मैं भी अपने स्मृतिकाल से श्राद्ध करता आ रहा हूं। पहले दादाजी के सान्निध्य में, फिर पिताजी के और अब परिवार का बड़ा पुरुष सदस्य होने के नाते। इस बार से पहले कभी उन श्लोकों पर ध्यान नहीं दिया, जो इस दौरान उच्चारित किये जाते हैं। इस बार  श्राद्ध होने तक जो गौर किया, वह अद्भुत है। यह भी कि इससे पहले जिन भी पंडितजी ने श्राद्ध क्रिया संपन्न कराई, उन्होंने कभी वे मंत्रोच्चार किये भी नहीं।

सबसे पहले तर्पण किया जाता है पिता का, यदि उनका देहांत हो चुका हो तो । यहीं एक बात और मालूम चली कि यदि पिता जीवित हैं तो उनका बेटा अपने दादाजी का तर्पण नहीं कर सकता। याने श्राद्ध विधि बेटा ही करेगा। ज्यादातर इस तथ्य से अवगत न होने के कारण अनेक परिवारों में बेटों की अनिच्छा के बावजूद उन्हें अपने पुरखों के तर्पण के लिये पंडितों के साथ बैठा दिया जाता है और जाहिर है कि वे केवल रस्मी तौर पर इसे करते हैं। बहरहाल।

तो पिता के बाद मां को याद किया जाता है। फिर दादाजी, परदादा, दादी, परदादी, भाई, बहन, ताऊजी, काका ,बुआ का तर्पण करते हैं। इसके बाद क्रम शुरू होता है ससुर व सास का। इस क्रम में सास-ससुर के ऊपर के पुरखे याद नहीं किये जाते। फिर सिलसिला शुरू होता है ननिहाल पक्ष का। याने नाना, परनाना, मामा, मौसी उनके ऊपर और इसी तरह से नानी, परनानी आदि। यहां तक तो ठीक है कि ये परिवार की शाखा का श्राद्ध ही है। जबकि शास्त्रों में इसके आगे का विधान भी है, जिसे विद्वान कर्मकांडी पंडित पूरी विधि से करवाते हैं। जैसे आपके गुरु, मित्र, रिश्तेदारी से हटकर आत्मीयजन, कोई विद्वान और ऐसा व्यक्ति भी जिसे आप जानते थे या किसी भी स्तर पर जुड़े रहे हों या आपका संपर्क न भी हो तो जो लोक जीवन में लोकप्रिय छवि के धनी, भले मानुस रहे हों और उनके प्रति आपकी श्रद्धा रही हो, आपका आकर्षण रहा हो, आपके मन में आदर भाव रहा तो उन्हें भी इस मौके पर आप श्रद्धापूर्वक याद कर उनका भी तर्पण कर सकते हैं, पंडितजी करवाते हैं। मसलन, देश के लिये शहीद हुए जवानों का, महापुरुषों का, मानवीय मूल्यों के लिये अपना बलिदान दने वालों का, ापके शिक्षकों का भी आप तर्पण कर सकते हैं और मैंने मनपूर्वक ऐसा किया भी । मैंने भी अपने ऐसे अनेक आत्मीयजन खोये हैं, जिनके जीवन का मुझ पर गहरा प्रभाव रहा और ऐसी अनेक चर्चित शख्सियतें मेरे मानस पटल पर दर्ज हैं जिन्हें कभी देखा-सुना-मिला नहीं या जो मेरे जन्म से भी पहले ही इस संसार से विदा हो चुके थे। उन्हें भी याद कर , उनका तर्पण कर , उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर मुझे आत्मिक संतुष्टि मिली।

तर्पण के बाद प्रसाद के ग्रास निकले जाते हैं , वह भी हिन्दू धर्म में जीवदया के उच्च स्तरीय भाव  को दर्शाता है।  जैसे एक -एक ग्रास कौवे , गाय , कुत्ते , किट-पतंगे , चींटी व अतिथि का निकाला जाता है। कौवे को तो बाकायदा आव्हान कर बुलाया जाता है और उसके बहाने पुरखों से प्रार्थना की जाती है कि वे भोजन ग्रहण करें व हमें भी इज़ाजत दें।   

इस बारे मेें भागवत कथा वाचक और कर्मकांडी पंडित बृजेश भारद्वाज बताते हैं कि सीधी बात है कि हिंदू धर्म में जिस उदारता की बात की जाती है, सर्वधर्म समभाव का अहसास रखा जाता है, विशाल हृदय वाला माना जाता है, उसका प्रतिबिंब श्राद्ध प्रक्रिया में साफ नजर आता है। शर्त यही है कि आप खुद शॉर्ट कट से तर्पण विधि को संपन्न कर पंडितजी से जल्द फारिग होने की मानसिकता न रखते हों। 

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रमण रावल

संपादक - वीकेंड पोस्ट 

स्थानीय संपादक - पीपुल्स समाचार,इंदौर                               

संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                            

प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

शहर संपादक - नईदुनिया, इंदौर

समाचार संपादक - दैनिक भास्कर, इंदौर 

कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर  

उप संपादक - नवभारत, इंदौर

साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर                                                            


1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया । 


शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन


उल्लेखनीय-

० १९९० में एक दैनिक अखबार के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985

० म.प्र., छत्तीसगढ़ व राजस्थान के विधानसभा चुनाव 2013 के तमाम विश्लेषण सटीक रहे, जिनमें सीटों का भी उल्लेख था।

० 2014 के लोकसभा चुनाव में म.प्र. की सीटों का विश्लेषण शत-प्रतिशत व देश में भाजपा की 260 व गठबंधन की 300 सीटों का सटीक आकलन। साथ ही 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का प्रकाशन भी किया, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 


सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकाारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।


विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।


मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।


किताबें- इंदौर के सितारे (2014), इंदौर के सितारे भाग-2(2015) , इंदौर के सितारे भाग-3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) सहित 7 किताबें प्रकाशित ।


भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी


रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार 


संप्रति- भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण, दबंग दुनिया, आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में नियमित लेखन।