Monday, September 23, 2019
गुरूवार को चुनाव : राज्य सभा का उपसभापति कौन होगा बीके हरिप्रसाद या हरिवंश, यह निर्णय छोटे दल करेंगे

गुरूवार को चुनाव : राज्य सभा का उपसभापति कौन होगा बीके हरिप्रसाद या हरिवंश, यह निर्णय छोटे दल करेंगे

राज्य सभा में उपसभापति के चुनाव 1992 के बाद कभी नहीं हुए।  आमतौर पर बैठकर मिलजुल कर चर्चा कर ली जाती और एक सर्वमान्य उम्मीदवार खड़ा कर दिया जाता।  इस बार भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्य सभा के सभापति तथा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ऐसी ही अपील की थी,  लेकिन बुधवार को एनडीए की तरफ से जेडीयू के हरिवंश सिंह और यूपीए की ओर से  कांग्रेस के बीके हरिप्रसाद ने नामांकन पत्र दाखिल करा दिया। गुरूवार को उपसभापति का चुनाव है और न एनडीए के पास साफ़  बहुमत है और न यूपीए के पास। दोनों जोड़तोड़ में जुटे हैं। दोनों को लगता है कि 2019 के आम चुनाव के लिए यह एक शक्ति-प्रदर्शन होगा। 

बेशक, यह शक्ति परीक्षण ही होगा। एनडीए के लिए शायद थोड़ा कम, लेकिन यूपीए के कुछ अधिक। अधिक इसलिए कि इसे विपक्ष  की एकता के रूप  में देखा जा रहा है। पहले विपक्ष के प्रत्याशी के रूप में एनसीपी की वंदना चव्हाण का नाम चल रहा था, लेकिन आखिरी दिन कांग्रेस ने अपने पत्ते खोले हैं। कांग्रेस इस चुनाव में एनसीपी  करके यह सन्देश दे सकती थी कि उसके लिए विपक्ष की एकता कांग्रेस के प्रत्याशी से ज़्यादा जरूरी है।

 

कांग्रेस ने 6 अगस्त को लोक लेखा समिति के एक सदस्य के चुनाव के वक़्त कुछ ऐसा ही सन्देश दिया था, जब उस चुनाव में टीडीपी के सीएम रमेश को कांग्रेस के अलावा टीएमसी, एनसीपी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और अन्य दलों ने वोट देकर विजय दिलवाई थी।   245 सदस्यों वाली राज्यसभा में 1 पद खाली है।  कुल 244 सदस्यों  की राज्य सभा में  बहुमत के लिए 123  वोट की जरूरत है। एनडीए के पास 89 सदस्य हैं  यूपीए के पास 57।  ऐसी दशा में  इस चुनाव में सफलता की कुंजी उन छोटे दलों के पास है, जो किसी भी महागठबंधन में शामिल नहीं हैं।ऐसे नमन अपना कुनबा संभालने के साथ ही दूसरों के गढ़ में सेंधमारी का काम भी जोरों  से हो रहा है।  

संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत दिनों  एक बयान दिया था ''विपक्ष का एजेंडा मोदी है जबकि बीजेपी का एजेंडा इंडिया है। '' वास्तविकता यह है कि जब से बीजेपी सत्ता में आई है, तब से भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के मुख्य एजेंडा किसी भी तरह से चुनाव जीतना ही रहा है।  लोकतंत्र में यह कोई ग़लत लक्ष्य भी नहीं है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस इस तरफ वैसा ध्यान  नहीं दे रही, जैसी बीजेपी दे रही है।   चाहे वह चुनाव राष्ट्रपति का हो या ग्राम पंचायत के सरपंच का। 

राज्यसभा उपसभापति चुनाव गुरुवार को सुबह 11 बजे होना है।  एनडीए और यूपीए के बीच इस पद को लेकर कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है।  दोनों पक्ष बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर हैं ।  ऐसे में राज्य सभा के सभापति पद पर जीत तय करने में इन छोटी क्षेत्रीय पार्टियों की अहम भूमिका होगी, जो फिलहाल किसी भी गठबंधन के साथ नहीं हैं ।

एनडीए अपना कुनबा संभालने के साथ-साथ विपक्ष में सेंध लगाने में जुटी है।  वहीं यूपीए विपक्ष के सभी दलों को साधने की कवायद में जुटा है।  जीत के लिए एआईएडीएमके, बीजू जनता दल, टीआरएस, आम आदमी पार्टी और पीडीपी के साथ-साथ निर्दलीय सांसदों की भूमिका  महत्वपूर्ण होगी।  दोनों ही पक्ष इन दलों से समर्थन पाने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। एआईएडीएमके के 13, बीजू जनता दल के 9, इंडियन नेशनल लोकदल के 1, पीडीपी के 2, टीआरएस के 6, वाआईएसआर कांग्रेस 2 और आम आदमी पार्टी के 3 सदस्य हैं। 

अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बीजेडी और टीआरएस सदन से अनुपस्थित रहे थे।  उपसभापति की वोट देते समय 9  अगस्त को सदन में गैरहाजिर रहकर भी कुछ छोटे दल निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।  इस चुनाव में नतीजे की चाभी उन छोटे दलों के पास ही है। 

 

 

 

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।