Monday, October 14, 2019
मध्‍यप्रदेश में अंगद के पैर जैसे जमे IPS अफसर, नेता-अफसर आए गए, ये नहीं गए

मध्‍यप्रदेश में अंगद के पैर जैसे जमे IPS अफसर, नेता-अफसर आए गए, ये नहीं गए

मीडियावाला.इन।

रवींद्र कैलासिया, भोपाल। भारतीय पुलिस सेवा के आधा दर्जन से ज्यादा अधिकारियों पर सरकारें या विभाग प्रमुख के बदलने का कोई असर नहीं होता। नेता-अफसर आते-जाते रहे मगर इनकी कुर्सी सही सलामत रही। मैदानी या प्रमुख पदों पर बैठे अधिकारी अंगद के पैर के जैसे कुर्सी पकड़े बैठे हैं। इनमें योजना शाखा देख रहे पवन जैन, इंटेलीजेंस एडीजी संजीव शमी व परिवहन आयुक्त शैलेंद्र श्रीवास्तव, उपायुक्त वीके सूर्यवंशी के नाम प्रमुख हैं।

शैलेंद्र श्रीवास्तव: 1986 बैच के अधिकारी हैं। वे 18 दिसंबर 2014 से परिवहन आयुक्त हैं। सवा चार साल से परिवहन आयुक्त पद पर कायम श्रीवास्तव खेल संचालक के तौर पर भी साढ़े तीन साल से ज्यादा समय रहे। 2005 से लेकर 2011 तक भाजपा शासनकाल में लगातार आईजी की मैदानी पदस्थापनाएं भी मिलीं।

पवन जैन: 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। योजना शाखा में वे पांच जनवरी 2011 को आईजी के तौर पर पदस्थ किए गए थे। इसके बाद से यहीं एडीजी की पदोन्न्ति पाई। करीब आठ साल से जैन योजना शाखा में हैं। दिग्विजय सरकार के जाने के बाद उमा भारती सरकार में मुख्यमंत्री सचिवालय में अतिरिक्त सचिव के रूप में पहुंचे थे और वहां छह महीने काम किया।

संजीव शमी: 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। विशेष शाखा में उनकी सेवा करीब साढ़े सात साल की है, जिसमें सात महीने एआईजी के रूप में रहे। वे आईजी के रूप में प्रमोशन पाकर इंटेलीजेंस शाखा में 2012 में पहुंचे और तब से ही वहां पदस्थ हैं। लगातार साढ़े छह साल से ज्यादा समय इंटेलीजेंस में रहते हुए उन्होंने वहीं एडीजी के रूप में पदोन्न्ति हासिल की है।

वीके सूर्यवंशी: राज्य पुलिस सेवा से आए सूर्यवंशी 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे 18 सितंबर 2014 से परिवहन उपायुक्त हैं। करीब साढ़े चार साल से परिवहन उपायुक्त रहने के साथ सूर्यवंशी को आईपीएस अवार्ड होने के बाद भाजपा सरकार के 15 साल के कार्यकाल में केवल 16 महीने मैदानी पदस्थापना से दूर रखा गया।

मकरंद देउस्कर: 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे 18 मई 2015 को जबलपुर रेंज डीआईजी से पदोन्न्ति पाने के बाद से इंटेलीजेंस शाखा में आईजी बनाए गए थे। साढ़े तीन साल से ज्यादा समय होने के पहले भाजपा सरकार ने बड़वानी में उन्हें पहले जिले की कमान सौंपी थी और इसके बाद वे डीआईजी रेंज जबलपुर बनाए जाने तक लगातार मैदानी पदस्थापना में ही रहे।[  नईदुनिया से साभार] 

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