Saturday, October 20, 2018
सपाक्स पार्टी ने अपना ध्वज (झंडा) भी जारी कर दिया

सपाक्स पार्टी ने अपना ध्वज (झंडा) भी जारी कर दिया

मीडियावाला.इन।सपाक्स संगठन ने ढाई साल में सपाक्स कर्मचारी संघ से लेकर सपाक्स पार्टी तक का सफर तय किया है। पदोन्न्ति में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के ठीक पहले 10 फरवरी 2016 को सपाक्स संस्था (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक अधिकारी-कर्मचारी संस्था) का उदय हुआ। सरकार के खिलाफ समाज को खड़ा करने के लिए 21 नवंबर 2016 को सपाक्स समाज संस्था (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था) का जन्म हुआ और अब सपाक्स पार्टी का उदय हुआ है।डॉ. त्रिवेदी ने बताया कि पार्टी का संविधान बन चुका है और चुनाव आयोग उसका परीक्षण कर रहा है। उन्होंने बताया कि आयोग में पार्टी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। वे कहते हैं हम आरक्षण या किसी जाति विशेष के विरोधी नहीं हैं। हम उन सरकारों के खिलाफ हैं, जो वोट बैंक की राजनीति के चलते समाज में वैमनस्यता फैला रही हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के तौर पर हम सभी समाजों को साथ लेकर चलेंगे और प्रदेश में समरसता कायम करने के लिए वोट मांगेंगे। सेवानिवृत्त आईएएस अफसर वीणा घाणेकर ने पार्टी में आस्था जताते हुए भूमि सुधार आयोग के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। वे सपाक्स पार्टी में उपाध्यक्ष बनाई गई हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त आईपीएस अफसर विजय वाते, सेवानिवृत्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. केएल साहू को पार्टी में उपाध्यक्ष बनाया गया है। इंजीनियर पीएस परिहार को पार्टी का संयोजक चुना गया है।महा सचिव संगठन के लिए श्री सुरेश तिवारी सेवानिवृत संचालक जनसंपर्क को बनाया गया  है 

प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद असंतुष्टों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं पार्टी में अपराधियों की कोई जगह नहीं होगी।  उद्देश्यों के  साथ पार्टी प्रदेश को नया नेतृत्व देगी . सपाक्स समाज संस्था (सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक कल्याण समाज संस्था) ने मंगलवार को 'सपाक्स पार्टी" की विधिवत घोषणा कर दी। पार्टी ने अपना ध्वज (झंडा) भी जारी कर दिया और प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों से उम्मीदवार उतारने का एलान भी किया है। पार्टी ने साफ कहा कि प्रत्याशी स्थानीय जनता की अनुशंसा पर चुने जाएंगे और पार्टी को रिफ्यूजी कैंप नहीं बनाने दिया जाएगा।

 

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