Tuesday, August 20, 2019
स्वयं नाव चला कर नदी पार करके स्कूल जाती हैं यह शिक्षिका

स्वयं नाव चला कर नदी पार करके स्कूल जाती हैं यह शिक्षिका

मीडियावाला.इन।

दमोह -नारी एक ऐसी शक्ति का नाम है जो बलिदान और प्रतिज्ञा की मिसाल है। अगर वह घर की बागडोर थाम ले तो उसे स्वर्ग बना देती है उसी तरह अगर वह तलवार उठा ले तो अच्छे-अच्छे योग्य को भी मार गिराती है। वर्तमान युग की महिलाएं हर क्षेत्र में संघर्ष कर रहे हैं। खुद अपने दम पर मेहनत करके कुछ कर दिखाने का जज्बा रखती हैं।

आइए आपको बताते हैं एक ऐसी महिला के बारे में जिन्होंने अपनी प्रतिभा और दृढ़ निश्चय से अपने लक्ष्य मार्ग के बीच में पड़ने वाली 100 मीटर चौड़ी व्यारमा नदी को स्वयं ही नाव के द्वारा पार करके समय पर विद्यालय पहुंचती हैं। हम आपको बता दें कि नदी को पार करना उनका रोज का कार्य है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज की नारी पुरषों की अपेक्षा कई गुना आगे है। 

देखिए वीडियो

इस संबंध में जब प्राथमिक शिक्षिका शकुन ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैं ग्राम धमारा की रहने वाली हूं एवं मेरी पोस्टिंग प्राथमिक शाला दिनारी में है, जोकि मेरे ग्राम से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन उसी रास्ते व्यारमा नदी बीच में पढ़ती है। नदी के इस किनारे से उस किनारे तक आने जाने के लिए लकड़ी की नाव डली है, जिस पर बैठकर स्वयं के द्वारा चला कर इस पर आते हैं, ताकि समय पर स्कूल पहुंच सकें।  शिक्षिका शकुन ठाकुर ने यह भी बताया कि स्कूल पहुंचने के लिए दूसरा मार्ग भी है, लेकिन उसकी दूरी करीब 18 किलोमीटर है जिस पर कोई यातायात के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं। अगर स्कूल  समय से पहुंचना है तो नाव चलाकर ही जाना पड़ता है

शिक्षिका ने बताया कि पहले बैठने में ही बहुत डर लगता था कि नाव पलटना जाए।इस के डर से कुछ समय में दिनारी किराए के मकान में रहने लगी लेकिन मेरे पति ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने कहा कि चलो मैं आपको नाव चलाना सिखा देता हूं, उनके कहने पर मैं रोज नाव से नदी पार करती हूं,

गर्मियों के समय में नदी में बहाव कम रहता है जिसके कारण नाव खेने में दिक्कत नहीं जाती, लेकिन बारिश की समय में बहुत तेज धार होने के कारण नाव को चलाना थोड़ा कठिन हो जाता है लेकिन इन्हीं कठिनाइयों को पार करते हुए नौका भी पार लग जाती है, इस कारनामे को देखकर जन शिक्षक भी हैरान है कि एक महिला जो पुरुषों से कहीं अधिक ज्यादा कार्य करती है, और समय पर स्कूल पहुंचकर बच्चों को पढ़ाना एवम पुनः शाम को नाव चला कर घर पहुंचना बहुत काबली तारीफ का विषय है

 

0 comments      

Add Comment