इंदौर लेखिका संघ का जोरदार आगाज,तीस वर्ष की प्रतीकात्मकअभिव्यक्ति के लेकर खुला स्त्री का अभिनव आँगन

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इंदौर लेखिका संघ का जोरदार आगाज,तीस वर्ष की प्रतीकात्मकअभिव्यक्ति के लेकर खुला स्त्री का अभिनव आँगन

इंदौर: मध्य प्रदेश की अग्रणी,पहली साहित्यिक संस्था इंदौर लेखिका संघ का अभिनव कला सामाज सभागार में आयोजित एक समारोह में एक बार फिर जोरदार आगाज हुआ। संस्था के तीस वर्ष होने जा रहे हैं इसी महत्वपूर्ण उपलब्धि को उल्हास और उत्साह के साथ मनाया गया . समारोह की संकल्पना संस्था की संस्थापक  वरिष्ठ साहित्यकार डॉ स्वाति तिवारी द्वारा तैयार की गई , एक बार फिर 1997 की तरह इंदौर लेखिका संघ एक नयी ऊर्जा ,नये आयाम ,नयी सोच और नए रचनात्मक संकल्पों के साथ माँ सरस्वती का पूजन कर अपनी तीस साल की यात्रा को तीस रचनाओं के पाठ के साथ उत्साह पूर्वक पूर्ण करते हुए एक बार फिर गतिशील हुआ है .संस्थापक अध्यक्ष डॉ .स्वाति तिवारी की संकल्पना अनुसार   “खुला आँगन – खिले स्त्री अभिव्यक्ति के स्वर “कार्यक्रम के अंतर्गत तीस वर्षों को तीस रचनाकारों ने अपनी विविध विधाओं और विविध विषयों की  रचनाओं का पाठ करते हुए प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया .

 

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इस अवसर पर इंदौर और आसपास क्षेत्र की कई लेखिकाओं ने उत्साह से भाग लिया। इस संकल्पना का कलात्मक संयोजन सुप्रसिद्ध चित्रकार ,लेखिका श्रीमती वन्दिता श्रीवास्तव द्वारा बहुत ही कलात्मक सज्जा के साथ किया गया .कार्यक्रम  का शुभारम्भ माँ सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ .माँ सरस्वती का पूजन सभी सदस्यों के साथ वरिष्ठ सदस्य ,सुप्रसिद्ध भजन गायिका एवं लेखिका प्रभा तिवारी ,वन्दिता श्रीवास्तव ओर डॉ स्वाति तिवारी ने मातृ शक्ति की त्रिवेणी के रूप में  संयुक्त रूप से किया ,एवं दीप प्रज्ज्वलन में सबसे वरिष्ठ ,मध्य वरिष्ठ और  सबसे कम उम्र की नवोदित रचनाकार प्रभा तिवारी ,कुसुम सोगानी ,वन्दिता श्रीवास्तव ,सुषमा शुक्ला,  रानू टुवानी,और डॉ.प्राची पांडे  द्वारा ज्ञान की  दीप ज्योति अक्षय रहे इस भाव से  प्रकाश पुंज को पीढ़ी दर पीढी वरिष्ठ से कनिष्ठ को  सोंपते हुए सामूहिक रूप से किया गया .

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दीप प्रज्वलित होते ही  सुप्रसिद्ध साहित्यकार महादेवी वर्मा का स्मरण करते हुए डॉ ,स्वाति तिवारी ने दीपक की महत्ता  को दीप मन्त्र के माना  , जिसे सदस्यों ने भी शपथ की तरह दोहराते हुए संकल्पित किया कि दीपक चाहे छोटा हो या बड़ा ,सूर्य जब अपना आलोक वाही कर्तव्य  सौंप कर चुप चाप डूब जाता है तब जल उठाना ही दीपक का अस्तित्व है ,जल उठना ही उसका जानेवाले  को नमस्कार है .अध्यात्मिक मोटिवेशनल लेखिका ,गायिका सुरेखा भारती ने “मईया मोरी वीणा के तार बजा दे,ज्ञान की ज्योत जला दे” सरस्वती वंदना की  प्रस्तुति  देते हुए स्वरचित राष्ट्रीय चेतना के गीत से भारत माता की भी वंदना की .

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संस्थापक के रूप में स्वाति तिवारी ने स्वागत उद्बोधन    इंदौर लेखिका संघ की संकल्पना के साथ स्थापना और तीस वर्षों के सफर को बताते हुए नए सदस्यों इस यात्रा के पड़ाव बताये .संस्था को डॉ शिवमंगल सिंह सुमन ,डॉ विद्यानिवास मिश्र से  लेकर देश भर के शीर्षस्थ  साहित्यकारों  का आशीर्वाद और सान्निध्य मिला  है , साथ ही थीम “खुला आँगन – खिले स्त्री अभिव्यक्ति के स्वर ” की व्याख्या करते हुए स्वागत किया .

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संस्था की नवोदित सदस्य लघु उद्योग भारती से महिला उद्यमी सम्मान से नवाजी गई डॉ.प्रीति चौहान  को लेखिका संघ की और से मुख्य अतिथि प्रभा तिवारी ,एवं सारस्वत अतिथि वन्दिता श्रीवास्तव  ने सम्मानित किया गया , मिलेट्स  यानी भारत में प्रचलित मोटे अनाजों के बारे लेखन को प्रोत्साहित करने  के लिए अपने अनुभव सुनाये .

वरिष्ठ लेखिका ,पूर्व में आकशवाणी उद्घोषिका रही कुसुम सोगानी ने लेखिका संघ के साथ से क्या हुआ और क्या होगा इस पर अपनी लिखी पैरोडी ‘लेखन को लेखिकाओं का साथ मिल जाय तो बात बन जाय ‘की गाकर मंच की खूब तालिया बटोरी .शिक्षिका लेखिका शीला बडोदिया ने युद्ध की अमानवीय विभीषिका, विजय की होड़ में मानवता को केंद्र में रख कर  मानव इतिहास के सबसे गहन और पीड़ादायक अध्यायों में से युद्ध की भयावहता और हिंसा पर कविता का पाठ किया ,शीला चंदन ने कहा आगाज जिसका होता है ,अंजाम भी  होगा ,तपा लिया जिसने खुद को संघर्षों की आग में वही कुंदन होगा .

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मुख्य अतिथि  प्रभा तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा “हम सब जानते  हैं कि लेखिका संघ की यह तीस साल की यात्रा कोई समतल धरातल पर गाडी दौडाने जैसी सरल नहीं थी ,यहाँ अनुकूल मौसम के बाद  तूफ़ान ज्यादा आये ,इस अवरोधों ने संस्था को  बहुत क्षति पंहुचाई ,कई बार लगा कि संस्था अब रुक जायेगी , संस्था को तोड़ने के भी प्रयास बार बार हुए लेकिन यह डॉ तिवारी की ही जीजीविषा और उनकी कार्यप्रणाली  ही थी जो संजीवनी बन कर हर बार संस्था को तूफानों से निकाल लायी ,यही उनकी क्षमताओं की उनके धैर्य की परीक्षा थी पर वे इस कसौटी पर हर बार खरी उतरी और संस्था  कभी बंद नहीं हो सकी आज तक निरन्तरता बनाए हुए है ये पंक्तियाँ में इंदौर लेखिका संघ की संस्थापक को समर्पित करती हूँ –

वह पथिक क्या पथिक कुशलता क्या
जिस पथ में कोई शूल न हो
नाविक की धैर्य परीक्षा क्या
यदि धाराएं प्रतिकूल न हो

वरिष्ठ कवियत्री सुषमा शुक्ला ने ‘वीर शहीदों अमर सपूतों ‘पर ओजस्वी वाणी में शहीदों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये.आशा शर्मा ने नारी के संघर्षों को उकेरा ,सुषमा व्यास राजनिधि ने अचार की रेसिपी को अन्तराष्ट्रीय बन जाने पर किस्सा सुनाया .डॉ.ज्योति सिंह ने माँ नर्मदा पर अपनी कविता ‘बूढी माई’ प्रस्तुत की .नवोदित लेखिका पीयूशा शुक्ला ने  पुत्री की महत्ता पर अपनी रचना  “कुल दीपिका  का ‘सस्वर पाठ किया . वरिष्ठ  लेखिका अनीता  पाठक ,  निर्मला मूंदड़ा ,डॉ आशा शर्मा ,डॉ प्रतीक्षा शर्मा .सरिता काला ,ज्योति सिंगोल ,डॉ.निशि मंज्वानी डॉ.प्राची शर्मा पांडे ,नीलम सिंह सूर्यवंशी,कीर्ति कापसे, मधु,  इत्यादि में नारी जीवन की अलग अलग झलकियों को अपनी  रचनाओं के केंद्र में रखते हुए प्रस्तुति दी .वन्दिता श्रीवास्तव ने भारत में कोकाकोला के प्रवेश पर एक रूपक”जब कोकाकोला आया”  प्रस्तुत किया .डॉ रंजना शर्मा ने बेटी को दो संस्कारों की खान बताया .

 

 

मनीषा खेडेकर ने एक  मार्मिक गजल सुनाई ,इस अवसर पर कार्यक्रम का समापन सपना उपाध्याय ने माउथ ऑर्गन पर याद किया दिल ने गीत प्रस्तुत करते हुए  समापन की सुमधुर ध्वनि  के साथ सम्पूर्ण कार्यक्रम को सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिवंश राय  बच्चन की मधुशाला की पंक्तियों  की लय और ताल  में बांधते हुए रील प्रस्तुत की .और आभार व्यक्त  किया .collage 18

कार्यक्रम में शुभारम्भ के पूर्व सभी सदस्यों को माँ सरस्वती के ललितकला आँगन में कला के सूत्रों से जुड़े रहने के सन्देश के साथ कलात्मक कला सूत्र बांधते हुए .बैसाख का हल्दी कुमकुम भी किया गया .कार्य्रक्रम में एक विशेष  उलेखनीय रहा इसका संचालन .डॉ स्वाति तिवारी ने संचालन को शुरू करते हुए समस्त सदस्यों को क्रमश सूत्रधार बनाते हुए स्व संचालित पद्धति से सम्पन्न हुआ .