2023 चुनाव: भाजपा के लिए बज रही है खतरे की घंटी?

1973

मध्यप्रदेश की राजनीति के मैदान में एक चर्चा फुटबाल की गेंद की तरह इधर-उधर ठेली जा रही है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कभी-भी पद से हटाये जा सकते हैं। यह भी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की ताजपोशी की जायेगी,इस भरोसे और दबाव के साथ कि वे फिर से मप्र में भाजपा को सत्तारूढ़ करायेंगे। कल की तो मोदी-शाह-नड्‌डा जानें, लेकिन आज का फसाना तो डीजे के साथ यही बजाया जा रहा है। इस बैंड में स्वर केवल कांग्रेस के ही नहीं है, बल्कि जुगलबंदी भाजपाई भी उतनी ही तीव्रता से कर रहे हैं। अब आप समझ सकते हैं कि जगत मामा का मंदिर-मंदिर भ्रमण और कांग्रेस नेता कमलनाथ का यह कहना कि वे दिल्ली नहीं जायेंगे,मप्र में ही रहेंगे,के बीच क्या साम्य और संबंध है?

यह फुटबाल यही तक ही नहीं रुक रही, बल्कि राजनीति के साथ जीने-मरने वाले तो खम ठोंक कर कह रहे हैं कि मामा अकेले नहीं जायेगे। वे अपने साथ भारतीय जनता पार्टी की सत्ता को भी ले जायेंगे। इसे बेहद सरल तरीके से कहा जाये तो यह कि अब हालात ये बन चुके हैं कि एक तरफ शिवराज सिंह चौहान को हटाने की अनुगूंज तेज हो रही है तो  2023 के विधानसभा चुनाव भी भाजपा के जबरदस्त खतरे की घंटी है। आखिर ऐसी बातें क्यों सड़क से सचिवालय तक सरपट भाग रही है?

2023 चुनाव: भाजपा के लिए बज रही है खतरे की घंटी?

मप्र की सत्ता में शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री के तौर पर ये चौथा कार्यकाल है। यह बात उनके ही दल में हजम नहीं हो रही। प्रतीक्षारत मुख्यमंत्रियों को दिक्कत इस बात से है कि आलाकमान ने मार्च 2020 में उन्हें मुख्यमंत्री बनाया ही क्यों ? उनका दर्द है कि जिस व्यकित् के नेतृत्व में भाजपा चुनाव हार गई हो,उसी के हाथ में सत्ता की पतवार देने की तुक नहीं थी। सत्ता की रेवड़ी वितरण की संभवत रीत भी यही है कि जिसके हाथ नहीं लगती, वह कुलबुलाता रहता है। ऐसा कोई पहली बार तो हुआ नहीं था। दावेदार तो शिवभानु सिंह सोलंकी होते हैं, विधायकों का बहुमत भी उनके साथ होता है, किंतु मुख्यमंत्री का ताज पहनाया जाता है अर्जुन सिंह को। उमा भारती की अनायास बिदाई पर दम लगाते हैं बाबूलाल गौर और मझघार में पतवार थाम लेते हैं शिवराज सिंह चौहान । उम्मीद से रहते हैं ज्योतिरादित्य. सिंधिया और बाजी मार ले जाते हैं कमलनाथ। तो राजनीति में ऐसी बड़ी-बड़ी बातें छोटे-छोटे से घटनाक्रम के जरिये होती रहती हैं। लेकिन विरोधियों को कौन और कैसे समझाये। सत्ता सुंदरी की लालसा तो शाश्वत है।


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शिवराज सिंह चौहान के शपथ ग्रहण के दिन से कोई समय ऐसा नहीं बीता जब उनके जाने,हटाये जाने की चर्चा न चलती रही हो। वे बने रहे, यह सबसे बड़ा सच है। अब लेकिन परिस्थितियां करवट लेती नजर आ रही हैं। तूफान आने के अपने संकेत होते हैं। समझ जायें तो ठीक, वरना थपेड़े तय करते हैं हश्र। तो कुछ तूफान बला के आक्रामक होते हैं,तब आपकी सावधानी भी काम नहीं आती। तो क्या अभी ऐसा ही कुछ है? इस तूफान के तीन संकेत केवल प्रतीकात्मक नहीं,बल्कि आक्रामक है। पहला, पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का इंदौर में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर अपने बेटे के साथ मिलने जाना,अन्न-जल ग्रहण करना । ये दोनों क्रिकेट की राजनीत की वजह से परस्पर धुर विरोधी रहे, किंतु अब एक ही दल के होने के कारण सामान्य सौजन्य संभव है। यह घटना लेकिन सामान्य नहीं है। इससे पहले भी सिंधिया उनके घऱ् गये थे, किंतु तब कैलाशजी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में व्यस्त होने की वजह से शहर में नहीं थे। तो दूसरी बार सिंधिया फिर आये। दूसरा संकेत, कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है और दल के भीतर ही गांधी परिवार के प्रति बढ़ रही नाराजी की वजह से वे किसी विश्वस्त को यह जिम्मेदारी सौंपना चाहते हैं। कमलनाथ भी इसमें एक प्रमुख नाम था। उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कह दिया कि वे मप्र नहीं छोड़ रहे। तब अशोक गहलोत का नाम चला। तीसरा संकेत, शिवराज सिंह चौहान का अचानक मंदिर-मंदिर भ्रमण पर निकलना,जबकि श्रावण माह बीत चुका। तब वे विंध्यवासिनी,दतिया के पीतांबरा पीठ वगैरह होकर आये। इसके पीछे शिवराज अपने वरिष्ठ नेता विष्णुप्रसाद शुक्ला के निधन पर 27 अगस्त को इंदौर आगमन के बावजूद उनके घऱ् नहीं गये, क्योंकि कुछ अनुष्ठानों में किसी की मृत्यु पर शोक में शामिल नहीं हो सकते। हालांकि यह वजह सामने आती उसके पहले उनकी काफी चर्चा-आलोचना हो चुकी थी।

ये तीनों संकेत महज संयोग नहीं हैं। जानकार इसमें कुछ अनहोनी सूंघ रहे हैं। कांग्रेस में तो यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, लेकिन भाजपा के भीतर तेज हलचल बताती है कि शीर्ष स्तर पर सब अनुकूल नहीं है। इन चर्चाओँ के कारण कांग्रेस को काफी बल मिला है। पिछले कुछ समय से उनके आक्रमण की धार लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस के ही कुछ जिम्मेदार और गंभीर माने जाने वाले नताओं का तो यहां तक कहना है कि कमलनाथ ने दिल्ली जाना अस्वीकार किया है और उसे आलाकमान ने स्वीकार भी कर लिया है तो इसलिये कि वे यह जंचा चुके हैं कि उनका मप्र की राजनीति में इस समय बने रहना ज्यादा जरूरी है। कमलनाथ ने संभवत ऊपर यह भरोसा दिलाया है कि वे एक बार मप्र के मुख्यमंत्री बनकर दिखायेंगे। जिसके लिये उनके पास पर्याप्त मौके हैं और उनके तरकश में ऐसे अमोघ दिव्यास्त्र भी हैं, जिनके सामने शिवराज सिंह चौहान होँ या ज्योतिरादित्य सिंधिया या अन्य कोई भी, टिकने वाला नहीं है। याद रहे, कांग्रेस और गांधी परिवार में कमलनाथ की प्रतिष्ठा किसी भी अन्य नेता की बनिस्बत बेहद अधिक है।

2023 चुनाव: भाजपा के लिए बज रही है खतरे की घंटी?

ऐसा बताया जा रहा है कि शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा करने वाली अनेक दास्तानें कमलनाथ के पास संग्रहित हैं। चुनाव के पहले वे ऐसा धमाका करेंगे कि मप्र में भाजपा सरकार की दीवारें भरभराकर गिर पड़ेगी और इस कंपन से दिल्ली भी अछूती नहीं रहेगी। बताते हैं कि शिवराज सिंह चौहान से बुरी तरह नाराज चल रहे कुछ नौकरशाहों और भाजपा के ही कुछ अतिशय महत्वाकांक्षी व प्रतीक्षारत मुख्यमंत्री प्रत्याशियों ने कमलनाथ के पास कुछ ऐसा बारूदी अस्ला पहुंचा दिया है, जिसका विस्फोट दूर तक गूंजेगा। मप्र में यह आम धारणा है कि मुख्यमंत्री से भाजपा के वरिष्ठ मंत्री,नेता और अनेक प्रमुख अधिकारी नाराज हैं। इन दोनों ही पक्षों की समुचित सुनवाई और उनके मनवांछित काम न होने से उन्होंने ऐसे दस्तावेज कमलनाथ तक पहुंचा दिये हैं, जो मौजूदा नेतृत्वकर्ताओं को तो मुश्किल में डालेंगे ही, आगामी चुनाव में भी वे मुद्दे भाजपा का भरपूर रास्ता रोकेंगे।

     इस तरह से शिवराज सरकार के लिय मौजूदा समय और भाजपा के लिये अगले विधानसभा चुनाव खतरे की घंटी है। भाजपा आत्म सुरक्षा और प्रहार के क्या उपाय करती है व कमलनाथ का उत्साह, आत्म विश्वास और चुनाव के मद्देनजर उनकी रणनीति क्या गुल खिलाती है, देखना दिलचस्प होगा।

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रमण रावल

 

संपादक - वीकेंड पोस्ट

स्थानीय संपादक - पीपुल्स समाचार,इंदौर                               

संपादक - चौथासंसार, इंदौर

प्रधान संपादक - भास्कर टीवी(बीटीवी), इंदौर

शहर संपादक - नईदुनिया, इंदौर

समाचार संपादक - दैनिक भास्कर, इंदौर

कार्यकारी संपादक  - चौथा संसार, इंदौर

उप संपादक - नवभारत, इंदौर

साहित्य संपादक - चौथासंसार, इंदौर                                                             

समाचार संपादक - प्रभातकिरण, इंदौर      

                                                 

1979 से 1981 तक साप्ताहिक अखबार युग प्रभात,स्पूतनिक और दैनिक अखबार इंदौर समाचार में उप संपादक और नगर प्रतिनिधि के दायित्व का निर्वाह किया ।

शिक्षा - वाणिज्य स्नातक (1976), विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन

उल्लेखनीय-

० 1990 में  दैनिक नवभारत के लिये इंदौर के 50 से अधिक उद्योगपतियों , कारोबारियों से साक्षात्कार लेकर उनके उत्थान की दास्तान का प्रकाशन । इंदौर के इतिहास में पहली बार कॉर्पोरेट प्रोफाइल दिया गया।

० अनेक विख्यात हस्तियों का साक्षात्कार-बाबा आमटे,अटल बिहारी वाजपेयी,चंद्रशेखर,चौधरी चरणसिंह,संत लोंगोवाल,हरिवंश राय बच्चन,गुलाम अली,श्रीराम लागू,सदाशिवराव अमरापुरकर,सुनील दत्त,जगदगुरु शंकाराचार्य,दिग्विजयसिंह,कैलाश जोशी,वीरेंद्र कुमार सखलेचा,सुब्रमण्यम स्वामी, लोकमान्य टिळक के प्रपोत्र दीपक टिळक।

० 1984 के आम चुनाव का कवरेज करने उ.प्र. का दौरा,जहां अमेठी,रायबरेली,इलाहाबाद के राजनीतिक समीकरण का जायजा लिया।

० अमिताभ बच्चन से साक्षात्कार, 1985।

० 2011 से नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना वाले अनेक लेखों का विभिन्न अखबारों में प्रकाशन, जिसके संकलन की किताब मोदी युग का विमोचन जुलाई 2014 में किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी किताब भेंट की गयी। 2019 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के एक माह के भीतर किताब युग-युग मोदी का प्रकाशन 23 जून 2019 को।

सम्मान- मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग द्वारा स्थापित राहुल बारपुते आंचलिक पत्रकारिता सम्मान-2016 से सम्मानित।

विशेष-  भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा 18 से 20 अगस्त तक मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन में सरकारी प्रतिनिधिमंडल में बतौर सदस्य शरीक।

मनोनयन- म.प्र. शासन के जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय पत्रकार अधिमान्यता समिति के दो बार सदस्य मनोनीत।

किताबें-इंदौर के सितारे(2014),इंदौर के सितारे भाग-2(2015),इंदौर के सितारे भाग 3(2018), मोदी युग(2014), अंगदान(2016) , युग-युग मोदी(2019) सहित 8 किताबें प्रकाशित ।

भाषा-हिंदी,मराठी,गुजराती,सामान्य अंग्रेजी।

रुचि-मानवीय,सामाजिक,राजनीतिक मुद्दों पर लेखन,साक्षात्कार ।

संप्रति- 2014 से बतौर स्वतंत्र पत्रकार भास्कर, नईदुनिया,प्रभातकिरण,अग्निबाण, चौथा संसार,दबंग दुनिया,पीपुल्स समाचार,आचरण , लोकमत समाचार , राज एक्सप्रेस, वेबदुनिया , मीडियावाला डॉट इन  आदि में लेखन।