
Book Review: सांसद शंकर लालवानी की नजर से मोदी के 100 मंत्र
रमण रावल
यदि राजनीति विज्ञान के किसी छात्र,नये-नवेले राजनीतिक कार्यकर्ता,राजनीतिक विश्लेषक-आलोचक, विदेश में बसे भारतीय या भारत की राजनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दस वर्षीय कार्यकाल के बारे में दिलचस्पी रखने वाले व उनकी रीति-नीति को जानने वाले किसी भी देशी-विदेशी व्यक्ति को सार रूप में जो साहित्य सहायक साबित हो सकता है, वह है इंदौर के भाजपा सासंद शंकर लालवानी की पुस्तक- 100 मोदी मंत्र।

यह पुस्तक इस मायने में सहज ग्राह्य है कि इसमें न तो भारी भरकम शब्दावली है, न ही गैर जरूरी विस्तार है। सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी के सासंद होकर भी लालवानी ने मोदी सरकार के केवल उन कार्यक्रमों को इसमें शामिल किया है, जो सीधे जन कल्याण से जुड़े हैं और जिनके नतीजे भी सामने आ चुके हैं। सीधे तौर पर कहें तो ये घोषणाओं का वो पुलिंदा नहीं है, जो सरकारें आम तौर पर करती रहती हैं। कौन-सी योजना किस उद्देश्य के साथ लाई गई है और किस तरह से उन पर क्रियान्वयन हुआ और वे लोकोपयोगी साबित हुई,इस पर साफ शब्दों में चर्चा की गई है।
पुस्तक में 2014 से 2023 तक की योजनाओं का उल्लेख है। चूंकि अप्रैल 2024 से चरणबद्ध रूप से लोकसभा चुनाव प्रारंभ हो चुके थे, इसलिये उस वर्ष का जिक्र गैर जरूरी रहता। एक उल्लेखनीय बात यह है कि लालवानी ने प्रत्येक वर्ष की 10-10 योजनाओं का इसमें उल्लेख किया है, जिससे यह काफी प्रभावी भी बन पड़ी है। यदि वे एक वर्ष की 100-100 योजनाओं का भी उल्लेख करते तो उन्हें कोई रोकता तो नहीं, लेकिन तब इस पुस्तक की पठनीयता नहीं रह जाती याने उन्होंने लोक रुचि का भी ध्यान रखा।
वर्षवार उल्लेख करने से यह पत्रकारिता और शोधार्थियों के लिये भी उपयोगी हो जाती है। इससे यह समझ में आता है कि कैसे क्रमिक तौर से मोदीजी ने अपनी कल्पनाओं और भारतीय जनता पार्टी के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अमली जामा पहनाया। इस पुस्तक को प्रभात प्रकाशन ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही प्रकाशित किया है,जिससे इसका पाठक वर्ग विस्तृत हो सकता है। शीघ्र ही यह कुछ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी आ रही है।
शंकर लालवानी की मोदीजी पर लिखी एक अन्य पुस्तक भी इसी वर्ष आने वाली है। आशा की जा सकती है कि वह मोदीजी की कार्य प्रणाली को समझने में मददगार होगी।





