
श्रद्धालुओं को अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ से क्यों दूर किया जा रहा है?— जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह गुर्जर
वीआईपी नाम पर भक्तों को वंचित किया गया – मंदिर प्रबन्धन समिति गठित की जाय
मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर। अद्वितीय अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर के नए स्वरूप के निर्माण नाम पर इस समय जो व्यवस्थाएं बनाई गई है, उस आधार पर जो बताया गया था कि 6 फरवरी तक भगवान का गर्भगृह दर्शनार्थियों के लिए खोल देना चाहिए था लेकिन इस समय 17 फ़रवरी हालात यह है कि पशुपतिनाथ लोक के नाम पर मंदिर के जीर्णोद्धार का जो कार्य किया जा रहा है वो बहुत ढीला, दोष पूर्णता से भरा हुआ और विलम्ब का शिकार हुआ पड़ा है।
दूर दूर से आनेवाले भोले के भक्तों को निराश होकर भगवान के दर्शन दूर से ही करके वापस लौटना पड़ रहा है लेकिन वो जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारी जिन्हें इस ओर ध्यान देना चाहिए था आंखें मूंदकर बैठे हैं जिसमें प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जिला कलेक्टर अदिति गर्ग, मंदिर प्रबंधक, राहुल रूनवाल नगरपालिका अध्यक्ष रमा देवी गुर्जर, क्षेत्रीय लोकसभा सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर समेत सभी शामिल हैं लेकिन ये सब चुप क्यों है ये समझ के परे है यह कहा है जिला पंचायत सदस्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीपक सिंह गुर्जर ने।
श्री गुर्जर ने कहा कि महाशिवरात्रि जैसे पावन दिन भी संपूर्ण अंचल से पधारे हजारों भक्त भगवान के दर्शन से दूर रहे। क्या कारण रहा कि भगवान के वहां भी वीआईपी दर्जे के साथ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मंदसौर आते हैं तो उन्हें अभिषेक करने के लिए गर्भ ग्रह तक ले जाया जाता है ओर उनके साथ अन्य लोग जनप्रतिनिधियों की भीड़ गर्भगृह में घुस जाती है पर आमजन भक्त ओर श्रद्धालुओं को दर्शन पूजन बाहर से कराए जाते हैं?
श्री गुर्जर का सवाल ये है कि क्या अब मंदसौर में भी उज्जैन की तर्ज पर भगवान के दर्शन के लिए अलग से वीआईपी व्यवस्था शुरू कर दी गई है यदि ऐसा है तो यह घोर निंदनीय है।

श्री गुर्जर ने बताया कि वह खुद महा शिवरात्रि के दिन भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन को पहुंचे तो इस व्यवस्था से लगभग सभी हजारों भक्तजन दुखी दिखे और नाराजगी जाहिर की कि इतने महत्वपूर्ण पावन दिन भी यदि गर्भ ग्रह से भगवान के दर्शन नहीं हो पा रहे तो फिर किस बात के लिए इतनी व्यवस्थाओं के नाम पर जनता के करोड़ों रुपए बर्बाद किया जा रहा है। शहर और अंचल में आम भक्त इस व्यवस्था से नाराज होते दिखे भगवान के दर्शन दूर से करके चले गए। कई प्रश्न इस बात पर उठते दिखाई देते हैं जैसे नंदी मुख से भगवान के दर्शन सावन महीने और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर बंद होना धर्म व शास्त्र अनुसार है? भगवान पशुपतिनाथ का शिवरात्रि पर अभिषेक की परम्परा को भी खंडित किया गया ऐसा पहली बार हुआ है। क्या इस बात का भी ज्ञान इन जिम्मेदारों को है? यदि प्रतिमा लेपन का कार्य पूर्ण हो चुका है तो क्यों भक्तों को भगवान से दूर किया जा रहा हे।
भक्तों ने देवाधिदेव महादेव से प्रार्थना है कि जिम्मेदारों को सद्बुद्धि दे। आश्चर्य की बात तो यह है कि यह सब ऐसे समय हो रहा है जब प्रदेश में हिंदुत्व का ठेका लेने वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। क्या कारण है कि 20 वर्ष की भाजपा सरकार में पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति क्यों नहीं बन पाई? हिंदुत्व का दंभ भरने वाली इस सरकार में हिंदू ही अपमानित और प्रताड़ित हो रहा है और जो अनुशासित संगठन इनको चलाता है वह क्यों मोन है? इस बात को भी क्या नियम भी इन्हीं के सरकारी नुमाइंदों ने इन्हीं के जनप्रतिनिधियों की अनुमति से बनाए गए और नियम तोड़ने का अधिकार भी इन्ही लोगों के पास है। गर्भगृह में भक्तों को अतिशीघ्र प्रवेश मिले ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए जिला पंचायत सदस्य श्री दीपक गुर्जर ने चेतावनी दी है नहीं तो एक बड़ा आंदोलन भक्तों ओर श्रद्धालुओं द्वारा इसके लिए किया जाएगा।





