मंदसौर में हुआ देश का पहला “भारत सरसों संगम 2026” आयोजन

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मंदसौर में हुआ देश का पहला “भारत सरसों संगम 2026” आयोजन

1500 से अधिक किसानों की भागीदारी, कृषि क्षेत्र की कंपनियों ने लगाए स्टॉल

मंदसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट

मंदसौर/ मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के ग्राम कनघट्टी में देश के पहले “भारत सरसों संगम” का आयोजन शुक्रवार को किया गया। सरसों उपज की समृद्धि और किसानों की उन्नति को समर्पित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में जिले भर से एवं आसपास क्षेत्र के 1500 से अधिक किसानों ने भाग लिया।

इस भारत सरसों संगम कार्यक्रम में देश की कृषि क्षेत्र अग्रणी कंपनियों एवं संस्थाओं ने अपने स्टॉल लगाकर किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज, पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक व पुनर्योजी कृषि पद्धतियों तथा बाजार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।

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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने किसानों और आयोजन से जुड़ी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए किसानों को पुनर्योजी (Regenerative) कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरसों जैसी तिलहनी फसलों का विस्तार न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

इस अवसर पर The Solvent Extractors’ Association of India के चेयरमैन डॉ. बी. वी. मेहता ने संबोधित करते हुए Solidaridad द्वारा संचालित पुनर्योजी सरसों कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत में खाद्य तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में सरसों उत्पादन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।

सॉलिडरिडाड संस्था के महाप्रबंधक सुरेश मोटवानी ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह संगम प्रधानमंत्री के उस विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला है, जिसमें भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि पुनर्योजी कृषि मॉडल से मिट्टी की सेहत सुधरती है, उत्पादन लागत घटती है और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होती है।

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कार्यक्रम में विभिन्न अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिनमें Adani Wilmar Limited से श्री राहुल, Louis Dreyfus Company से श्री गंगाधर, तथा VVF Limited से श्री महेश शामिल रहे। इन कंपनियों ने किसानों को गुणवत्ता आधारित खरीद, बाजार की मांग, मूल्य संवर्धन और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी जानकारियां कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चुंडावत ने सरसों में पुनर्योजी कृषि पद्धति पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

उन्होंने बताया कि फसल चक्र अपनाना, जैविक खादों का उपयोग, रसायनों का संतुलित प्रयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन तथा अवशेष प्रबंधन जैसी तकनीकें अपनाकर किसान लागत कम कर सकते हैं और उत्पादन में स्थायी वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए प्राकृतिक एवं जैविक विकल्पों को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

वहीं जिला उप संचालक कृषि (DDA) श्री रवींद्र मोदी ने कृषि क्षेत्र में संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, कृषि यंत्रीकरण अनुदान, सूक्ष्म सिंचाई योजना एवं तिलहन प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में विस्तार से बताते हुए किसानों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया।

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संगम में लगाए गए स्टॉल किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। यहां उन्नत सरसों बीज, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व, ड्रिप सिंचाई तकनीक, मृदा परीक्षण, कीट प्रबंधन, फसल बीमा और बाजार लिंकज जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं के समाधान प्राप्त किए और आधुनिक खेती की नई तकनीकों को समझा।

इस कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें केवल मंदसौर ही नहीं, बल्कि रतलाम और नीमच जिलों के साथ-साथ हरियाणा एवं राजस्थान से भी बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। विभिन्न राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि पुनर्योजी सरसों मॉडल से उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।

विभिन्न राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि पुनर्योजी सरसों मॉडल से उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।

“भारत सरसों संगम” ने न केवल किसानों को नई तकनीकों और बाजार से जोड़ा, बल्कि यह मंच किसानों, कंपनियों और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने का भी माध्यम बना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में सरसों उत्पादन को नई दिशा देंगे और भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष श्री कन्हैया लाल, जनपद सदस्य तथा सरपंच, बड़ी संख्या में किसान, पत्रकार उपस्थित रहे।