Jhali Pond lit up with the Glow of Thousands of Lamps : सोमवती अमावस्या पर दीपदान एवं धार्मिक आयोजन संपन्न, सनातन परंपराओं के संरक्षण का लिया संकल्प!

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Jhali Pond lit up with the Glow of Thousands of Lamps : सोमवती अमावस्या पर दीपदान एवं धार्मिक आयोजन संपन्न, सनातन परंपराओं के संरक्षण का लिया संकल्प!

Ratlam : जनअभियान परिषद की नगर विकास प्रस्फुटन समिति, वार्ड क्रमांक 36 द्वारा सोमवती अमावस्या एवं अधिक मास की अमावस्या के पावन अवसर पर रतलाम स्थित कालिका माता मंदिर के समीप झाली तालाब पर भव्य दीपदान एवं धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी नागरिकों ने सहभागिता कर दीप प्रज्वलित किए तथा सनातन संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। संध्या समय आयोजित दीपदान कार्यक्रम के दौरान झाली तालाब का वातावरण हजारों दीपों की ज्योति से आलोकित हो उठा। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर सुख, शांति, समृद्धि एवं समाज कल्याण की कामना की।

 

दीपों की मनमोहक छटा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की तथा धार्मिक आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रतलाम ब्लॉक समन्वयक शैलेंद्र सिंह सोलंकी के साथ ही श्रीमती शोभा प्रधान श्रेष्ठ, रानी चौहान, समिति सचिव आशा उपाध्याय, निर्मला राणावत, संतोष प्रजापत, मनीषा राणावत, गोपाल कुमार सोढा, विभूति सोढा, सुषमा गहलोत, भीम कुमार सहित अनेक श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों ने सहभागिता की। सभी ने सामूहिक रूप से सनातन धर्म की गौरवशाली परंपराओं को जीवित रखने तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया।

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समिति के परामर्शदाता राजेश सोलंकी, प्रदीप बिलवाल समिति अध्यक्ष नरेंद्र श्रेष्ठ सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं। समिति अध्यक्ष नरेंद्र श्रेष्ठ ने कहा कि दीपदान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सद्भाव एवं संस्कारों के प्रसार हेतु इस प्रकार के आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है। अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाने तथा सनातन परंपराओं के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। सनातन परंपराओं का संरक्षण ही हमारी सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने का आधार हैं!