युवा कवि शीला बड़ोदिया की तीन कवितायेँ

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युवा कवि शीला बड़ोदिया की तीन कवितायेँ

1.मैं अहिल्या मैं अहिल्या

हलाहल पान करने वाली,
भोलेनाथ की परम भक्त।
नर्मदा तट की वासिनी,
मैं अहिल्या मैं अहिल्या ।

ना थी अबला बेचारी,
वह बनी, सशक्त नारी।
जन-जन में लोकप्रिया,
मैं अहिल्या मैं अहिल्या।

धर्म रक्षक, धर्म प्रिया,
निर्भीक, सुशासिका ।
परम न्यायप्रिया,जनता की प्यारी,
मैं अहिल्या मैं अहिल्या।

ब्रह्मचारी, ध्यान प्रिया,
सदा लोकहित किया।
लोक हृदय में राज किया,
मैं अहिल्या मैं अहिल्या। ।

2.शरद पूर्णिमा

पूर्णिमा का ये,
चमकता चंद्रमा,
बिखेर रहा,
वातावरण में उजास।
ना रही गर्मी,
ना रही उमस,
शरद ऋतु का है,
यह आगमन।
विदा होती,
वर्षा ऋतु का,
दे रहा संदेश।
घोल रहा,
मीठी-मीठी ठंडक,
गुदगुदाती ठंड की,
दे रहा आहट।
चंद्रमा तो है ही,
प्रेम का प्रतीक,
देख प्रेमी के मन में,
होती है ललक।
मिल जाए,
प्रीतम की,
एक झलक।
शरद पूनम के,
चांद को देख,
खींची आती,
चकोर भी,
प्रेमी की ओर।
चुपचाप,
एक-दूजे को,
देखते रहते,
नहीं मचाते शोर।।

3.बारिश की पहली बूँद

सूखे पेड़ डालियों,
खनकती झाड़ियों,
सूखी घास पर,
जब पड़ती बारिश की पहली बूँद ।
आतुर हो,
कोंपल निकल आती,
झाड़ियां नरमा जाती,
हरी हो जाती घास,
जब पड़ती बारिश की पहली बूँद ।
चहक उठते खग,
नाचे पंखों को उठा मोर,
फुदकती गौरैया मचाती शोर,
जब पड़ती बारिश की पहली बूँद।
धधकता वो सूरज,
ढक देता बादल,
धरती ओढ़ लेती,
हरियाली का आँचल,
जब पड़ती बारिश की पहली बूँद।।
जब बादल बरसे,
मिट्टी की सोंधी खुशबू,
प्रफुल्लित कर देती मन को,
जब पड़ती, बारिश की पहली बूँद।।

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शीला बड़ोदिया,इंदौर

परिचय -शिक्षक, कवि,लेखक.रुचि- साहित्य, लेखन, संगीत , घूमना।
प्रकाशित पुस्तक-” मेरी इक्यावन कविता “,
दैनिक अखबार, मैग्जीन, किताबों में कविता, कहानियाँ, लघुकथा, समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित

गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मिलित आकाश श्रृंखला के लिए
नर्मदा साहित्य मंथन लेखन प्रतियोगिता पुरस्कार
विश्व संवाद केंद्र मालवा मध्य प्रदेश द्वारा सम्मानित,
भारत श्रीलंका सम्मिलित साहित्य, सम्मान,
अखिल भारतीय हिन्दी सेवा समिति द्वारा कविता पाठ में सम्मान,एवं कई सम्मानों से सम्मानित .